राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की उपस्थिति में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि लालू प्रसाद के छोटे बेटे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को राजद के नीति निर्धारक होंगे। राजद विधानमंडल दल के नेताओं की उपस्थिति में यह सर्वसम्मति से पास हुआ। पार्टी के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी ने यह जानकारी दी। इस बैठक में उदय नारायण चौधरी समेत कई वैसे नेता भी मौजूद रहे जो वर्तमान समय में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। जैसे वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी, वृषिण पटेल आदि। अब्दुलबारी सिद्दीकी बैठक में नहीं आए। श्याम रजक देर से आए। प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी नहीं आए। इन सबों के देर से आने या नहीं आने को विधान परिषद की एमएलसी सीट से जोड़ कर देखा जा रहा है। बता दें कि कि राजद ने कारी सोहैब, मुन्नी रजक और अशोक कुमार पांडेय को उम्मीदवार बनाया है।
तेजस्वी पार्टी में ताकतवार तो हैं ही
कहने को यह बैठक जाति जनगणना के लिए एक जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले जाति जनगणना के तौर-तरीकों को साफ करने के लिए और राजद सदस्यता अभियान को जोर देने के लिए बुलायी गई थी लेकिन असल बात सामने आई कि लालू प्रसाद ने राजद की बागडोर तेजस्वी को सौंप दी। जैसा कि आम तौर पर पार्टियां करती हैं उसे लोकतांत्रिक स्वरूप दिया जाए। वह भी दिया गया। प्रस्ताव राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री आलोक मेहता ने लाया और सभी ने सर्वसम्मति से सहमति जता दी। ऐसे भी तेजस्वी यादव ही नेता प्रतिपक्ष हैं और उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर महागठबंधन ने 2020 का विधान सभा चुनाव लड़ा था। राजद सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।
लालू जानते हैं तेजप्रताप सम्मान चाहते हैं
राबड़ी आवास में हुई इस बैठक में लालू प्रसाद के सबसे करीब बैठे उनके बड़े बेटे तेजप्रताप यादव। वही तेजप्रताप जो दिनकर की रश्मिरथी की पंक्तियों सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहते रहे हैं कि- ‘ दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पांच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे!, दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका, उलटे, हरि को बांधने चला, जो था असाध्य, साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।’
कुर्सी की सेटिंग से तेजस्वी की सेटिंग तक
बैठक में लालू प्रसाद यादव बीच में बैठे। लालू प्रसाद की बायीं तरफ तेजप्रताप यादव बैठे और तेजप्रताप के बाद शिवानंद तिवारी। लालू प्रसाद की दायीं तरफ पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी राबड़ी देवी बैठीं। राबड़ी देवी के बगल में पूर्व मंत्री कांति सिंह बैठीं और उसके बगल में रामचंद्र पूर्व, फिर अवध बिहारी सिंह और फिर बैठे तेजस्वी यादव। लालू प्रसाद की बेटी मीसा भारती इस प्रमुख कतार में नहीं दिखीं। बता दें कि उन्हें लालू प्रसाद फिर से राज्य सभा भेज रहे हैं। कुर्सी की यह सेटिंग तेजस्वी यादव की अलग छवि दिखाने, तेजप्रताप को सम्मान देते हुए तेजस्वी को राष्ट्रीय जनता की लालेटन सौंपने के लिए की गई! अब लालू प्रसाद ने तेजस्वी का कद पार्टी के अंदर और ज्यादा बढ़ा दिया है।
लालू सब कुछ समझ रहे हैं
लालू प्रसाद को मालूम है कि पार्टी के अंदर तेजस्वी का सबसे बड़ा विरोधी कौन है। तेजस्वी का विरोधी होने और तेजस्वी के करीबियों का विरोधी होने में बहुत अंतर नहीं है। इसलिए लालू प्रसाद उन शक्तियों पर नियंत्रण भी पाना चाहते हैं। लालू प्रसाद काफी बीमार रहते हैं, उम्र भी काफी हो गई है लेकिन उनका जिल ही है कि वे विधान सभा की सीढ़ी चढ़ बेटी मीसा को राज्य सभा का नामांकन भरवाने चले जाते हैं।
तेजस्वी के सामने 5 चुनौतियां
– पार्टी के अंदर के विरोधी को हिसाब से रखना। – राजकुमार वाली छवि से बाहर निकलना और ट्वीटर से बिल्कुल अलग सड़क पर आंदोलन का रुख करना। – उन्हें बतौर नेता प्रतिपक्ष आम लोगों के लिए सहज- सुलभ होना होगा। – आगामी लोक सभा चुनाव में खुद को साबित करना होगा क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में राजद को एक भी सीट नहीं मिली थी। – कांग्रेस और माले से रिश्ते में आई खटास को कैसे कम करते हैं !







