जम्मू–कश्मीर में सुरक्षाबलों के हौसले बुलंद हैं। इसकी बानगी पिछले २४ घंटे में दिखी जब सुरक्षाबलों ने छह आतंकवादियों को मुठभेड में मार गिराया। पहली घटना कुपवाड़़ा जिले में हुई जहां नियंत्रण रेखा (एलओसी) से घुसैपठ करते तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया। तीनों लश्कर–ए–तैयबा के दहशतगर्द थे। दूसरी घटना इससे पहले बुधवार को बारामुला में हुई। यहां भी तीन पाकिस्तानी आतंकी मार गिराए गए। घाटी में अब पहले वाली बात नहीं रही। सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस के चलते इस साल अब तक २६ पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए हैं। इनमें १४ जैश–ए–मोहम्मद के जबकि १२ लश्कर–ए–तैयबा के आतकी थे। दरअसल‚ पिछले तीन–चार वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के खिलाफ काफी सख्त रवैया अपनाया है। जहां एक तरफ वहां के बाशिंदों को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाएं दी जाती हैं तो वहीं आतंकियों का साथ देने वाले या उनके इशारे पर खूनखराबा करने वालों के विरुद्ध कड़़ा रुख अख्तियार किया जाता है। घाटी में कई वर्षों से वहां के युवाओं को बरगलाने और पाकिस्तान की शह पर यहां निर्दोष लोगों का खून बहाने की साजिश में शामिल यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा मिलने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान की मंशा दरअसल घाटी के लोगों खासकर युवाओं को हिंसा की आग में झोंक देना है। यही वजह है कि यासीन को सजा सुनाए जाने के विरोध में कश्मीर घाटी में प्रदर्शन हुए और जमकर पत्थरबाजी हुई। हालांकि सरकार और सेना ने राज्य के युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के कई सारे जतन किए हैं। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने से लेकर सरकारी सुविधाएं उनके वास्ते मुहैया कराई गई है। इस पहल का फायदा भी हुआ है। युवा अब पत्थर उठाने के बजाय रोजगार‚ पढ़ाई और अमन की चाह रखता है। इन्हीं सब बातों से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और येन–केन–प्रकारेण भारत की शांति में खलल ड़ालना चाहता है। घाटी में अपनी सीमित होती भूमिका को जिंदा रखने के लिए पाकिस्तान नित नये हथकंडे़ अपनाने से नहीं हिचक रहा है। भारी मात्रा में आतंकियों के कब्जे से हथियारों की बरामदगी इसी तथ्य की ओर इशारा कर रही है।
पटना में पूर्व मुखिया संजय यादव की हत्या पर भारी बवाल…………
पूर्व मुखिया संजय यादव की अपराधियों ने हत्या कर उनके शव को बिहटा थानाक्षेत्र के राघोपुर गांव के बधार स्थित...





