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ज्ञानवापी मस्जिद मामले में फैसला टला, 26 मई को अगली सुनवाई

UB India News by UB India News
May 25, 2022
in अध्यात्म, कानून, खास खबर
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अतीत में हिंदुओं के आस्था केंद्रो पर कितने और किस–किस प्रकार के अत्याचार हुए………..
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की अदालत में हुई. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने 26 मई तक इस बात पर फैसला सुरक्षित रख लिया कि पहले किस मामले की सुनवाई हो. ज्ञानवापी परिसर में मौजूद मां श्रृंगार गौरी की पूजा-अर्चना की इजाजत देने के मामले में सिविल जज के आदेश पर सर्वेक्षण के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. अब कमीशन की रिपोर्ट पर 26 मई को सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि किसका पक्ष मजबूत है.

अदालत ने दोनों पक्षों को सर्वे रिपोर्ट की कॉपी और संबंधित वीडियो सौंपने के निर्देश भी दिए हैं. एक हफ्ते में रिपोर्ट पर आपत्ति जताई जा सकती है. गौरतलब है कि सोमवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से प्‍लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्‍ट, 1991 का हवाला देते हुए पहले मेंटेनेबिलिटी पर सुनवाई की मांग की गई. यानी यह देखा जाए कि मामला चलने लायक है या नहीं. हिंदू पक्ष ने धर्मस्‍थल का स्‍वरूप तय करने के लिए ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की फोटो और विडियोग्राफी को अदालत से देखने का अनुरोध किया. साथ ही इसे सीलबंद लिफाफे में मांगा.

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कोर्ट परिसर के साथ ही कोर्ट रूम के बाहर भारी फोर्स तैनात रही. अदालत में सिर्फ हिंदू और मुस्लिम पक्ष के 19 वकील और चार याचिकाकर्ता महिलाओं को ही जाने की अनु‍मति मिली. जिला जज की अदालत में दोपहर 2 बजे सुनवाई शुरू हुई, जो लगभग 45 मिनट चली. काशी विश्‍वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी ने पक्षकार बनने और ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा की अनुमति के लिए जिला जज की अदालत में अर्जी दी, जिसे अदालत ने संज्ञान नहीं लिया.

ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई को देखते हुए मंगलवार सुबह से ही वाराणसी के दीवानी कचहरी परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कचहरी परिसर में वादकारियों, अधिवक्ताओं और उनके सहायकों, न्यायिक सेवा से जुड़े कर्मियों-अफसरों और दुकानों के संचालकों के अलावा अन्य किसी के अनावश्यक प्रवेश पर सख्ती के साथ रोक लगाई गई है।

संपत्ति नहीं, पूजा के अधिकार का है मामला- अधिवक्ता मदन मोहन

मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की वादी महिलाओं के अधिवक्ता मदन मोहन यादव।
मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की वादी महिलाओं के अधिवक्ता मदन मोहन यादव।

मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की वादी महिलाओं के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने कल अपनी दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा कि मामला पूजा स्थल अधिनियम के मापदंडों को पूरा नहीं करता है। वह चाहते थे कि मामला खारिज हो जाए, लेकिन हमने भी कोर्ट के सामने अपनी दलीलें पेश की थीं। मामले को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता, यह चलता रहेगा। यह संपत्ति का नहीं बल्कि पूजा के अधिकार का मामला है।

कोर्ट को तय करना है मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं है: अभय नाथ यादव

प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता अभय नाथ यादव कर रहे हैं।
प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से मामले की पैरवी अधिवक्ता अभय नाथ यादव कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 23 मई यानी सोमवार से मां शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई जिला जज की अदालत में शुरू हुई है। 23 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने कोर्ट में कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य है या नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘अदालत में यह मुकदमा दाखिल होने के बाद ही हमारी ओर से प्रार्थना पत्र देकर कहा गया था कि यह सुनने योग्य नहीं है। हमारे प्रार्थना पत्र पर सुनवाई नहीं हुई और सर्वे का आदेश दे दिया गया। ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई करना उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन है’।

सर्वे रिपोर्ट पर भी कार्रवाई करे कोर्ट

वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद कोर्ट का रिकॉर्ड बन गई है।
वादिनी महिलाओं के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद कोर्ट का रिकॉर्ड बन गई है।

अदालत में प्रवेश करने से पहले वादी 5 महिलाओं की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि कि यह धर्म की लड़ाई है और हम सब इसे लड़ रहे हैं। हम हर तारीख पर सुनवाई के लिए मौजूद रहेंगे। इस मसले पर उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 कहीं से भी लागू नहीं होता है। हम कोर्ट में अपनी दलील प्रस्तुत कर चुके हैं। अब बस कोर्ट के आदेश का इंतजार है।

अदालत के आदेश से ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हुआ। सर्वे कमिश्नर की रिपोर्ट अब कोर्ट का रिकॉर्ड है। सर्वे रिपोर्ट को भी दूसरे पक्ष के प्रार्थना पत्र के साथ ही पढ़ा जाए। सर्वे रिपोर्ट से संबंधित वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी हमें उपलब्ध कराई जाए। उस पर सुनवाई करते हुए आपत्ति मांगी जानी चाहिए।

ज्ञानवापी परिसर शिव परिवार को समर्पित हो- हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता

हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि स्थिति को समझते हुए मुस्लिम भाई मदद करें।
हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि स्थिति को समझते हुए मुस्लिम भाई मदद करें।

हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने मंगलवार को कहा कि ज्ञानवापी परिसर विवाद में पक्षकार बनने के लिए हमने बनारस जिला न्यायालय में आवेदन दायर किया है। चल रही दलील के अलावा हम ज्ञानवापी मंदिर स्थल को पूजा के उद्देश्य से हिंदुओं को पूर्ण रूप से सौंपने की अपील करते हैं। काशी को हमेशा से महादेव की नगरी के रूप में जाना जाता रहा है, इसलिए हमारी मांग है कि मस्जिद को सौहार्दपूर्ण तरीके से किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। हम अपने सभी मुस्लिम भाइयों-बहनों से गंगा-जमुनी तहजीब के तहत शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए एक कदम आगे बढ़ने की अपील करते हैं।

दो अन्य प्रार्थना पत्र भी हुए हैं दाखिल

श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने भी जिला जज की अदालत में सोमवार को याचिका दाखिल की थी। पूर्व महंत के अनुसार, ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार उन्हें दिया जाए। उनके पूर्वज अकबर के शासनकाल के समय से विश्वनाथ मंदिर में पूजा-पाठ का काम कर रहे हैं। अदालत ने पूर्व महंत की याचिका पर मंगलवार तक के लिए सुनवाई टाल दी थी।

सीआरपीसी की धारा 156-3 के तहत अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित सात नामजद और 200 अज्ञात पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज करने के लिए एसीजेएम-5 की अदालत में सोमवार को प्रार्थना पत्र दिया था। आज मंगलवार को अदालत ने शपथ पत्र में दिए गए बयान पर सवाल उठाया। ज्ञानवापी परिसर के सर्वे के दौरान स्वयंभू विश्वेश्वर के पाए जाने को व्यक्तिगत जानकारी होना बताया। अदालत के सवाल के बाद हरिशंकर पांडेय के अधिवक्ता बृजेश मिश्र ने पूरक शपथ पत्र देने की बात कही। अदालत ने कहा कि हम इस प्रकरण पर अब शाम के समय अपना आदेश सुनाएंगे।

8 हफ्ते में पूरी करनी है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने बीती 20 मई को ज्ञानवापी केस को वाराणसी के जिला जज की कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने 51 मिनट चली सुनवाई में साफ शब्दों में कहा था कि मामला हमारे पास जरूर है, लेकिन पहले इसे वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में सुना जाए। कोर्ट ने कहा था कि जिला जज 8 हफ्ते में अपनी सुनवाई पूरी करेंगे। तब तक 17 मई की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देश जारी रहेंगे।

ये तस्वीर ज्ञानवापी कुंड की है। इसे 1900 के आस-पास कैमरे में कैद किया गया। इस कहानी का जिक्र लंदन के के एम ए शेरिंग की किताब 'सेक्रेड सिटी ऑफ द हिंदूज' में भी है।
ये तस्वीर ज्ञानवापी कुंड की है। इसे 1900 के आस-पास कैमरे में कैद किया गया। इस कहानी का जिक्र लंदन के के एम ए शेरिंग की किताब ‘सेक्रेड सिटी ऑफ द हिंदूज’ में भी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 21 मई को सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित पत्रावली जिला जज की कोर्ट में स्थानांतरित कर दी गई थी। बता दें कि 17 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में तीन बड़ी बातें कही थीं।

ये तस्वीर 1890 में ली गई थी। तस्वीर में ज्ञानवापी कुंड के सामने स्थापित नंदी की मूर्ति और उसके ठीक बगल में बने मंदिर में बैठे पुजारी को देखा जा सकता है।
ये तस्वीर 1890 में ली गई थी। तस्वीर में ज्ञानवापी कुंड के सामने स्थापित नंदी की मूर्ति और उसके ठीक बगल में बने मंदिर में बैठे पुजारी को देखा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि शिवलिंग के दावे वाली जगह को सुरक्षित किया जाए। मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से न रोका जाए। सिर्फ 20 लोगों के नमाज पढ़ने वाला ऑर्डर अब लागू नहीं। यानी ये तीनों निर्देश अगले 8 हफ्तों तक लागू रहेंगे। इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं होगा।

जिला जज की अदालत में विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने भी याचिका दाखिल की है। कहा- ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार उन्हें दिया जाए।
जिला जज की अदालत में विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत ने भी याचिका दाखिल की है। कहा- ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की पूजा का अधिकार उन्हें दिया जाए।
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