दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी 20 श्रृंखला के लिए आईपीएल प्रतिस्पर्धा से दो खिलाडि़़यों का चयन वाकई अच्छी खबर है। मगर यह संख्या अपर्याप्त ही कही जाएगी। आईपीएल निश्चित तौर पर नये उभरते हुए खिलाडि़़यों के लिए भारतीय टीम में सलेक्शन का आधार रहा है। इस फटाफट स्पर्धा से भारत को कई खिलाड़़ी मिले जिन्होंने आगे चलकर अपने बेहतरीन प्रदर्शन से अपने चयन को सही साबित कर दिखाया। इस बार भी उम्मीद थी कि आईपीएल से भारतीय टीम को करीब ४–५ खिलाड़़ी मिलेंगे। मगर सिर्फ दो गेंदबाजों–जम्मू–कश्मीर के तेज गेंदबाज उमरान मलिक और पंजाब के अर्शदीप सिंह को ही जगह मिल सकी। उमरान जहां दाएं हाथ के गेंदबाज हैं वहीं अर्शदीप बाएं हाथ से गेंदबाजी करते हैं। डे़थ ओवर में उम्दा प्रदर्शन के चलते अर्शदीप का चयन आसान हुआ‚ वहीं उमरान लगातार तेज गेंदबाजी करने की वजह से चयनकर्ताओं के पसंदीदा बने। इसके बावजूद कुछ खिलाड़़ी बेहतर प्रदर्शन के बावजूद चयन के मामले में अनलकी साबित हुए। खासकर आईपीए‚ के हर सीजन में प्रभावशाली खेल दिखा रहे राहुल त्रिपाठी और राहुल तेवतिया का टीम इंडि़या में नहीं चुना जाना खेल प्रशंसकों को खल गया। त्रिपाठी का चयन नहीं होने पर पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने ट्वीट कर आश्चर्य जताया। वहीं भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने राहुल त्रिपाठी को भविष्य का बेहतरीन खिलाड़़ी बताया गया। शास्त्री ने त्रिपाठी के प्रदर्शन पर खुशी जताई थी और कहा था कि वह टीम इंडि़या में चयन के हकदार हैं। खैर‚ यह देखना दिलचस्प होगा दोनों खिलाडि़़यों को अंतिम ग्यारह में जगह मिलती है या नहीं। इनके प्रदर्शन के आधार पर ही ऑस्ट्रेलिया में खेले जाने वाले सीरीज के लिए रास्ता खुलेगा। अपने रफ्तार से उमरान ने हर किसी को चौंकाया है‚ सो ऑस्ट्रेलिया में ऐसे गेंदबाजों का होना जरूरी होगा। अलबत्ता‚ दोनों खिलाड़़ी अभी सीखने के दौर में हैं। चूंकि टीम में भुवनेश्वर कुमार भी हैं‚ इस नाते उनसे दोनों नवोदित खिलाडि़़यों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। कप्तान और टीम प्रबंधन को उमरान और अर्शदीप को अंतिम ग्यारह में जगह देने का फैसला लेना चाहिए। कई बार चयन के बावजूद खिलाड़़ी बेंच पर ही बैठे रह जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। प्रतिभा का सम्मान जरूरी है।
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