इंधन उत्पादों की लगातार बढ़ती कीमतों से जनजीवन पर पड रहे असर के मद्देनजर केंद्र सरकार ने शनिवार को पेट्रोल एवं ड़ीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में क्रमशः आठ रुपये और छह रुपये प्रति लीटर तक की कटौती करने की घोषणा की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने एलपीजी सिलेंड़र पर भी २०० रुपये प्रति सिलेंड़र देने का फैसला किया है। नई दरें शनिवार की रात बारह बजे से लागू भी कर दी गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन फैसलों पर कहा कि हमारे लिए हमेशा लोग पहले होते हैं। ये फैसले विभिन्न क्षेत्रों पर सकारात्मक प्रभाव ड़ालेंगे। वित्त मंत्री ने ट्वीट करके कहा कि दुनिया इस वक्त मुश्किल वक्त से गुजर रही है। विश्व कोरोना महामारी से उबर ही रहा था कि यूक्रेन युद्ध का संकट आ खड़़ा हुआ जिससे आपूर्ति „ाृंखला बाधित होने से कई चीजों की कमी हुई है। इसके बावजूद हम आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछमहीनों में पेट्रोल–ड़़ीजल के दाम बढ़ने के अलावा रसोई गैस के दाम भी लगातार बढ़े हैं। इससे आम लोगों के बजट पर बुरा असर पड़़ रहा था। विपक्ष के अलावा तमाम जानकार लगातार सरकार से मांग कर रहे थे कि उपभोक्ताओं को राहत दी जाए। इससे पहले चार नवम्बर‚ २०२१ को भी पेट्रोल–ड़ीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करके सरकार ने आमजन को राहत दी थी‚ लेकिन मार्च‚ २०२२ के दूसरे पखवाड़े़ से इन उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया और इसके लिए रूस–यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम में बढ़ोतरी को जिम्मेदार बताया जा रहा था। बेशक‚ यह कारण ठोस है‚ लेकिन रिकॉर्ड़तोड़़ महंगाई के चलते जरूरी हो गया था कि आम जन को राहत दी जाए। अप्रैल में थोक महंगाई रिकॉर्ड़ १५.०८ फीसद थी‚ जबकि मई में खुदरा महंगाई ७.७९ फीसद रही। खुदरा महंगाई आठ साल और थोक महंगाई साल की उचाई पर आंकी गई। महंगाई में सबसे बड़़ा योगदान पेट्रोल–ड़ीजल के दामों का था। एक साल के भीतर ड़ीजल महंगा होने से मालभाड़़ा २० फीसद तक बढ़ जाने से महंगाई थामने के प्रयास नाकाफी साबित होने का अंदेशा पैदा हो गया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी उत्पाद शुल्क घटाने की बात कही थी। अब राज्य सरकारों को भी चाहिए कि वे पेट्रोल–ड़ीजल पर वैट घटाकर उपभोक्ताओं की राहत में इजाफा करें। महंगाई का दंश इससे कम हो सकेगा।
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