बिहार में राजग के नए सेतु बनकर उभर सकते हैं प्रधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के दौरे के निकाले जा रहे बड़े मायने भाजपा विधान मंडल दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष तक को धर्मेंद्र प्रधान के दौरे की सूचना नहीं होने को लेकर लगाए जा रहे कयास
केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बिहार भाजपा के पूर्व चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुरुवार की रात गोपनीय मुलाकात की चर्चा दूसरे दिन भी परवान पर रही। नया समीकरण यह उभर कर सामने आ रहा है कि अब केंद्रीय नेतृत्व की ओर से बिहार भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव की जगह धर्मेंद्र प्रधान को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। यह काम पहले अरुण जेटली करते थे।
दरअसल, बिहार राजग के लिए दस वर्षों से अधिक समय तक दिवंगत हो चुके अरुण जेटली संकटमोचक की भूमिका निभाने में महारत हासिल कर चुके थे। उनके नहीं रहने के बाद 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव में बतौर बिहार के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ समन्वय के स्तर पर काफी सराहनीय रही थी।
ऐसे में पिछले दिनों कई बिंदुओं पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और मतभेद के बाद धर्मेंद्र प्रधान और नीतीश कुमार के बीच हुई मुलाकात के बारे में बिहार भाजपा के कर्णधारों को भनक तक नहीं लगना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल और उप मुख्यमंत्री एवं विधान मंडल दल के नेता तारकिशोर प्रसाद तक पटना में नहीं थे।
भाजपा-जदयू के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार नीतीश कुमार का भूपेंद्र यादव से तालमेल ठीक नहीं है। इसके पीछे का कारण बताया जाता है कि नीतीश के बारे में भाजपा के कुछ पदाधिकारी, मंत्री एवं विधायक की बयानबाजी पर भी भूपेंद्र चुप्पी साधे रहते हैैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लेते हुए नीतीश की नाराजगी दूर करने की पहल की है। यही नहीं, नीतीश और भाजपा के बीच तालमेल और समन्वय का जिम्मेदारी भी धर्मेंद्र प्रधान को सौंप दी गई है। इसी सिलसिले में वे पटना आए और करीब दो घंटे तक नीतीश कुमार से अकेले में कई बिंदुओं पर उन्होंने बातचीत की।
बताया जा रहा है कि नीतीश ने इस दौरान अपने मन की बात कही और धर्मेंद्र प्रधान ने न केवल उन्हें सुना, बल्कि अलग-अलग मुद्दों पर भाजपा के स्टैंड की जानकारी दी। दोनों के बीच मुलाकात में एक महत्वपूर्ण उपस्थिति शिक्षा मंत्री विजय चौधरी की रही। शिक्षा से संबंधित कुछ मुद्दों पर बातचीत हुई और धर्मेंद्र प्रधान के इस यात्रा पर सरकारी दौरे का मुलम्मा चढ़ा दिया। आखिरी में नीतीश कुमार और विजय चौधरी धर्मेंद्र प्रधान को राजकीय अतिथिशाला तक छोड़ने भी गए।
संजय जायसवाल और तारकिशोर प्रसाद की धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात अगली सुबह तब हुई, जब वे दिल्ली वापस जाने लगे। हालांकि, अंतिम रूप से उनके दौरे को राष्ट्रपति व उप राष्ट्रपति चुनाव के साथ राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव पर चर्चा के अलावा नीतीश कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर दोनों दलों के बीच समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।







