बिहार के बोचाहां में 12 अप्रैल को उपचुनाव होने वाला है। चुनाव प्रचार थम गया है। वीआईपी पार्टी के विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद यहां चुनाव हो रहा है। उनके ही पुत्र अमर पासवान राजद की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। राजद ने उन्हें इसलिए भी टिकट दिया है कि उपचुनाव का ट्रेंड यही रहा है कि सहानुभूति (सिपैंथी)वोट मायने रखता है। ज्यादातर जीत भी उसी उम्मीदवार की होती है जो दिवंगत विधायक की पत्नी, पति, पुत्र, बहू या अन्य बहुत नजदीकी रिश्तेदार होते हैं।
इन दोनों सीटों पर दिखा बड़ा असर, दोनों पर जदयू की जीत हुई
2020 के बाद के उपचुनाव की बात करें तो हाल में तारापुर और कुशेश्वरस्थान में उपचुनाव हुए। तारापुर की सीट जदयू के विधायक मेवालाल चौधरी के निधन की वजह से खाली हुई थी और कुशेश्वर स्थान में शशिभूषण हजारी के निधन से। तारापुर में मेवालाल चौधरी के पुत्र या उनके परिवार से कोई चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हुआ।
मेवालाल चौधरी की पत्नी नीता चौधरी का निधन मेवालाल चौधरी के निधन से पहले ही हो चुका था। वह भी जदयू की विधायक रही थीं। दोनों के निधन के बाद जदयू के राजीव कुमार सिंह ने राजद के अरुण कुमार साह को तारापुर उपचुनाव में हराया। सहानुभूति वोट का लाभ जदयू को मिला। कुशेश्वर स्थान में जदयू के उम्मीदवार अमन भूषण हजारी की जीत हुई। वे स्व. शशिभूषण हजारी के पुत्र हैं। यहां भी उसी सिपैंथी वोट का असर दिखा।
दरौंदा का इतिहास सबसे यादगार है
इससे पहले जो सबसे चर्चित उपचुनाव रहा, वह था 2011 में दरौंदा की विधायक जगमातो देवी का निधन के बाद हुआ उपचनाव। जदयू आतंक का पर्याय माने जाने वाले उनके पुत्र अजय सिंह को टिकट नहीं देना चाहती थी। लेकिन प्रस्ताव दिया गया कि अगर वे शादी कर लें तो पत्नी को टिकट दे दिया जाएगा। अजय सिंह ने विज्ञापन निकाला और 16 लड़कियों का बायोडाटा आया।
इनमें से अजय सिंह ने कविता सिंह से शादी की। तमाम मान्यताओं को छोड़ते हुए पितृपक्ष के समय शादी की गई। खबर बनी कि पितृपक्ष में शादी करवाकर नीतीश कुमार ने टिकट दिया। शादी के दूसरे ही दिन नीतीश कुमार की पार्टी ने कविता सिंह को टिकट दे दिया। जगमातो देवी से जुड़े सिपैंथी वोट का फायदा उनकी बहू कविता सिंह को मिला और वह चुनाव जीत गईं। आगे वह सीवान से सांसद भी बनीं।

सेंटिमेंटल वोट का फायदा राजीव गांधी तक को मिला था: ध्रुव कुमार
राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव कुमार कहते हैं कि सिपैंथी वोट बैंक से ही राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद रिकॉर्ड बनाया था। ज्यादातर बार सहानुभूति वोट फायदा करता है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं है। बोचाहां में सिपैंथी वोट का असर पड़ेगा। बिहारी या भारतीय वोटर भावुक वोटर भी होते हैं।
तारापुर उपचनाव में राजद ने जदयू को कड़ी टक्कर दी पर सिपैंथी वोट का फायदा जदयू को वहां मिल गया। बोचाहां में अमर पासवान को राजद ने बहुत सोच-समझ कर टिकट दिया है। वे पहले युवा राजद से जुड़े रहे हैं पर सिपैंथी वोट का फायदा मिलने की बहुत उम्मीद है।






