शराबबंदी पर महागठबंधन में अलग-अलग सुर हैं। सभी अपने- अपने तरीके से बात रख रहे हैं। महागठबंधन के अंदर से सबसे गजब का आइडिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने दिया है। उन्होंने शराब की कीमत तिगुनी करने का प्रस्ताव दिया है। वह मानते हैं कि इसके बाद जहरीली शराब से मौत थम जाएगी।
RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं, ‘शराबबंदी इसलिए बिहार में फेल है क्योंकि सत्ता का संरक्षण इसे प्राप्त है। शराब माफिया का मनोबल इसलिए बढ़ा हुआ है कि उन्होंने सत्ता पार्टी का दामन थाम रखा है। नतीजा शराब का अवैध कारोबार चरम पर है और शासन-प्रशासन का खौफ नहीं है। शराबबंदी अगर लागू है तो सख्ती से हो सिर्फ गरीबों को फंसाने के लिए शराबबंदी न हो।’ RJD के मुख पत्र राजद समाचार में उसके संपादक प्रेम कुमार मणि ने शराबबंदी पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
लोगों की मौत सरकार की नाकामी से हुई, इसलिए मुआवजा मिलना चाहिएः माले
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल कहते हैं, ‘माले पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में बहुत पहले से रही है, लेकिन सरकार इस पर रोक नहीं लगा पा रही है। जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोगों की मौत इसलिए हुई कि शराब बनाने वालों को सत्ता का संरक्षण मिलता रहा है। इसलिए जिन गरीबों की मौत हुई है, सरकार उन्हें मुआवजा दे। शराब के अवैध कारोबार में पुलिस की सबसे बड़ी भूमिका है।’ वह कहते हैं कि सरकार को अपना ओरिएंटेशन ठीक करना चाहिए।
शराब की कीमत तिगुनी की जाए और प्राप्त राजस्व से कारखाने खुले: कांग्रेस
कांग्रेस विधायक दल के नेता अजीत शर्मा ने तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के विकास के लिए एक अनोखा टिप्स दिया है। उन्होंने कहा है, ‘या तो शराबबंदी पूरी तरह से हो या शराब की कीमत तिगुनी कर दी जाए और उससे प्राप्त होने वाले राजस्व से बिहार में कल कारखाने खोले जाएं। इससे जहरीली शराब से होने वाली मौत पर रोक लग जाएगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को खोखला कर रहे कालाधन पर भी रोक लगेगी।’







