प्रधानमंत्री द्वारा शुक्रवार को तीन कृषि कानून को वापस लेने की घोषणा पर अखिल भारतीय किसान महासभा और ऐक्टू ने राजधानी में स्टेशन गोलंबर से बुद्ध स्मृति पार्क तक विजय जुलूस निकाला। अखिल भारतीय मिसान संघर्ष समिति के बिहार–झारखंड़ प्रभारी राजाराम सिंह‚ किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व काराकाट विधायक अरुण सिंह‚ किसान महासभा के वरिष्ठ नेता केड़ी यादव‚ खेग्रामस नेता धीरेंद्र झा‚ ऐक्टू नेता रणविजय कुमार‚ सरोज चौबे‚ शशि यादव‚ आरएन ठाकुर आदि नेताओं के नेतृत्व में निकले विजय जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारी किसान कार्यकर्ता ‘अभी तो यह अंगडाई है‚ आगे बडी लडाई है’‚ ‘तीन कृषि कानून की वापसी तो झांकी है‚ चार लेबर कोड की वापसी बाकी है’‚ ‘एमएसपी की गारंटी करो’ आदि नारे लगा रहे थे। नेताओं ने बिजली बिल २०२०‚ सीएए‚ यूएपीए सरीखे काले कानूनों के वापसी की भी मांग उठायी। साथ ही किसानों के हत्यारे केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी की भी मांग की। विजय जुलूस के बाद बुद्ध स्मृति पार्क पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए किसान महासभा व ऐक्टू नेताओं ने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी के लिए जारी आंदोलन के दौरान ८०० किसानों के बलिदान को हिंदुस्तान याद रखेगा। चार श्रम कोड‚ बिजली बिल– २०२०‚ सीएए और यूएपीए की वापसी और एमएसपी को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने इसे ऐतिहासिक किसान आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बताया और इस अवसर पर मिठाइयां बांटकर लोगों के साथ अपनी खुशियां बांटीं। नेताओं ने लोगों से जुल्मों–सितम की अहंकारी मोदी सरकार को एक धक्का और देने का आह्वान किया है। नेताओं ने कहा कि कृषि कानून पर मोदी को माफी मांगने की नौटंकी बंद कर चरम पर पहुंची महंगाई व बेरोजगारी‚ निजीकरण‚ मुद्रीकरण और अडानी–अंबानी सरीखे पूंजीपतियों के हाथों सार्वजनिक संपत्तियां बेचकर देश पर कंपनी राज थोपने की साजिश बंद करे। मोैके पर कई लोग मौजूद थे।
नव उदारवाद के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़़े व बेमिसाल आंदोलन के साथ व्यापक जनसमर्थन को देखकर मोदी सरकार द्वारा कृषि कानून की वापसी की घोषणा पर खुशी जाहिर करते हुए बिहार राज्य किसान सभा के महासचिव अशोक प्रसाद सिंह ने कहा कि संयुक्त किसान आंदोलन की यह बडी जीत है। उन्होंने कहा कि ७०० से ज्यादा किसानों की शहादत के बदौलत ही यह जीत हुई है लेकिन तीनों काले कृषि कानून को जब तक संसद से वापस नहीं लिया जाता तब तक किसानों को भरोसा नहीं होगा। इसलिए संसद से इसे वापस लिया जाए और इस आंदोलन में शहीद हुए किसानों को शहीद का दर्जा दिया जाए। मृतक किसानों के परिवार को मुआवजा एवं परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी‚ एमएसपी की कानूनी गारंटी‚ इस आंदोलन के दौर में किसानों पर देश के अंदर जितने भी मुकदमे हुए हैं उसे वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि २० नवंबर को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। उसी आधार पर २१ नवंबर को पटना में आहूत बैठक में फैसला लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसान विरोधी कॉरपोरेट पक्षी तीन काले कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की समीक्षा तथा उसके कायोंर् के बारे में निर्णय लेने के लिए एक कमेटी बनाने का भी एलान किया है जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों‚ प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों‚ अन्य विशेषज्ञों एवं सरकार के प्रतिनिधियों को रखा जाएगा। अखिल भारतीय खेत मजदूर किसान सभा के संयोजक सुबोध मित्रा एवं सह संयोजक एस झांसी ने कहा कि केन्द्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं और संसदीय प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रतीक्षा करेंगे। इन नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे किसान आंदोलन की यह बडी जीत है।







