भगवान सूर्य, उषा, प्रकृति, जल और वायु को समर्पित छठ पर्व बिहार का बेहद ही खास पर्व है। इसकी गूंज न सिर्फ देश भर में बल्कि विदेशों में भी देखने को मिलती है। माना जाता है कि छठ करने से निसंतान माता-पिता को पुत्र की प्राप्ति होती है। साथ ही उनकी संतान की जिंदगी सुखी होती है। आधुनिकता की इस दौर में भले ही छठ पूजा में भी नया रंग देखने को मिलता हो पर आज भी छठ को लेकर लोगों में वही श्रद्धा दिखाई देती है।
वहीं, अब बेगूसराय भी इस रंग में धीरे-धीरे रंगने लगा है। जिले में लगभग हर जगह छठ के गीत और पूजा की तैयारी देखने को मिल रही है। बेगूसराय में छठ का क्या महत्व है इसकी चर्चा खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने ट्वीट में किया है। सूर्य उपासना का यह अनुपम व्रत कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। माना जाता है कि ये पर्व संतान की जिंदगी में खुशहाली लाती है।
इसको लेकर बेगूसराय के युवाओं की टोली सम्मिलित रूप से अपने-अपने जगह पर घाटों की साफ-सफाई करते हैं। जिसके बाद उस स्थान को भव्य तरीके से सजाया जाता है। इसकी सुंदरता बेगूसराय के सिमरिया गंगा घाट, मटिहानी गंगा घाट, बड़ी पोखर, विष्णुपुर चतुर्भुज पोखर, तेलिया पोखर, रिफाईनरी टाउनशिप पोखर पर जबरदस्त तरीके से देखने को मिलती है।
इसके अलावा भी लोग आने अपने घरों पर श्रद्धा और भक्ति से मनाते है। इसके लिए जिला प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद रहती है। मान्यताओं के अनुसार, इस पूजा में श्रद्धालु अलग-अलग तरह के प्रसाद चढ़ाते है। जिसमें ठेकुआ भी आता है। ठेकुआ एक ऐसा प्रसाद है जो अमीर से लेकर गरीब तक हर घर में इसे प्रसाद के रूप में सूर्य देव और छठी मैया को चढ़ाया जाता है।
वहीं, लोकगीत के मधुर धुनों पर झूमती महिलाएं जब ठेकुआ बनाती हैं तो इसमें ना सिर्फ चीनी और गुड़, बल्कि महिलाओं के मधुर गीतों की मिठास भी घुल जाती है। मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया को भी ठेकुआ काफी पसंद है। बेगूसराय बिहार की औद्योगिक राजधानी है जहां तमाम जाति धर्म और संस्कृति के लोग रहते हैं। ऐसे में वैसे लोग जो यहां छठ देखते आते है वे अपने साथ छठ की महत्ता को समेटकर दूर तक ले जाते है। साथ ही जहां भी रहते है बड़ी ही श्रद्धा से छठ की पूजा अर्चना करते है।






