बिहार में दो विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है। कुशेश्वरस्थान और तारापुर सीट पर जीत के लिए पार्टियों ने अपने-अपने दांव खेल लिए हैं। अब 30 अक्टूबर को वोटिंग और 2 नवंबर को उनकी किस्मत का फैसला होगा। इससे पहले हम आज आपको बता रहे हैं कि इन दोनों विधानसभाओं में कास्ट फैक्टर क्या है? सियासतदानों ने अपनी बिसात कैसे बिछाई है और किस तरह से जनता को उलझन में डाला है। अब जनता समीक्षा करके अपने वोट का दम दिखाएगी।
तारापुर में डिसाइडिंग फैक्टर हैं कुशवाहा
पहले हम बात तारापुर विधानसभा क्षेत्र की…. तारापुर विधानसभा JDU के मेवालाल चौधरी विधायक थे। वह 1 दिन के लिए शिक्षा मंत्री भी बने थे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में उनकी मौत हो गई। उसके बाद यह सीट खाली हो गई। तारापुर के बारे में कहा जाता है कि यहां कुशवाहा वोट बैंक का वर्चस्व है। लेकिन यहां यादव 65 हजार, कुशवाहा 58 हजार, अति पिछड़ा 48 हजार, वैश्य 40 हजार, सवर्ण 40 हजार, अति पिछड़ा 35 हजार, मुस्लिम 22 हजार और अन्य 9 हजार यानी कुल 3 लाख 17 हजार मतदाता है।
इस समीकरण के मुताबिक, यादव का वोट बैंक भारी है, लेकिन डिसाइडिंग फैक्टर कुशवाहा वोट हैं। ऐसे में JDU ने अपने परंपरागत वोट बैंक को देखते हुए कुशवाहा उम्मीदवार राजीव कुमार सिंह को उतारा है, जबकि RJD ने नया प्रयोग करते हुए और अपनी पार्टी से अलग दांव खेलते हुए वैश्य समाज के अरुण साह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने सवर्ण जाति से राजेश मिश्रा को उतारकर सवर्ण वोटरों पर छापा मारा है। चिराग पासवान ने एक बार फिर से चुनाव में अलग दांव खेलते हुए राजपूत उम्मीदवार चंदन सिंह उतारा है।
अब इस सीट के समीकरण के मुताबिक, JDU को उम्मीद है कि राजीव कुमार सिंह को NDA के सवर्ण और वैश्य के वोट का सहारा मिल जाएगा और वह इस सीट को जीत जाएंगे। हालांकि, नीतीश कुमार को दलित और महादलित समुदाय से भी काफी उम्मीदें रहती हैं। वहीं, RJD ने पिछली बार की तरह यादव उम्मीदवार न उतारकर वैश्य उम्मीदवार को उतारा है। ऐसे में वहां के वैश्य समुदाय के लोगों का मूड बदलता दिख रहा है, हालांकि RJD को अपने यादव वोटरों पर बहुत ज्यादा विश्वास है। वहीं, कांग्रेस और चिराग पासवान ने सवर्ण उम्मीदवार उतारकर NDA के मंसूबे पर पानी फेरने का पूरा प्लान बना लिया है।
कुशेश्वरस्थान में ब्राह्मणों का रहा है खास प्रभाव
अब बात कुशेश्वरस्थान विधानसभा की करते हैं। कुशेश्वरस्थान आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है। यहां दलित महादलित समुदाय से ही उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर स्थानीय राजनीति में मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, राजपूत, रविदास, कुर्मी, पासवान भी यहां अच्छी संख्या में हैं। शशिभूषण हजारी JDU के लगातार विधायक रहे हैं। उनके निधन के बाद JDU ने सहानुभूति वोट बैंक वोट को देखते हुए उनके पुत्र अमन हजारी को उतारा है, लेकिन RJD सूत्रों की मानें तो पिछली दफा कुशेश्वरस्थान कांग्रेस को दिए जाने के कारण ही हार गई थी।
माना जा रहा है कि पिछली दफा कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक राम जिनकी इस क्षेत्र में बहुत पकड़ नहीं थी, वह 7222 वोट से हार गए थे। इनकी जगह पर यदि कोई RJD का उम्मीदवार होता तो यह चुनाव जीत जाता। इसी को लेकर इस बार RJD ने गठबंधन को दरकिनार करते हुए कुशेश्वरस्थान से भी अपने उम्मीदवार उतार कर अपने पुराने वोट पर दावा किया है। लेकिन, ये सीट कांग्रेस की रही है बीच के चुनावों में भले BJP और JDU ने इसे जीत लिया था। लेकिन, कांग्रेस ने इस बार पूरा दमखम लगाया है। कांग्रेस के उम्मीदवार अतिरेक कुमार पिछले बार के प्रत्याशी रहे अशोक राम के पुत्र है। इस क्षेत्र में ब्राह्मणों का खासा प्रभाव रहा है। ऐसे में आरक्षित सीट होने के बावजूद यहां सवर्ण नेता कैम्प करके प्रचार कर रहे थे।
देश के 14 राज्यों में तीन लोकसभा सीटों और 30 विधानसभा सीटों पर 30 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार बुधवार शाम समाप्त हो गया। ज्यादातर सीटों पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच है। निर्वाचन आयोग ने कोविड के मद्देनजर उपचुनाव में कई पाबंदियां लगाई हैं।
जिन सीटों पर लोकसभा उपचुनाव होंगे उनमें दादरा एवं नगर हवेली, हिमाचल प्रदेश की मंडी और मध्य प्रदेश की खंडवा सीट शामिल हैं। जिन 30 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उनमें से पांच असम में, चार पश्चिम बंगाल में, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मेघालय में तीन-तीन, बिहार, कर्नाटक और राजस्थान में दो-दो और आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मिजोरम, नगालैंड और तेलंगाना में एक-एक सीट है। मतगणना दो नवंबर को होगी।
तीनों लोकसभा क्षेत्रों में मौजूदा सदस्यों की मृत्यु हो गई थी। मार्च में रामस्वरूप शर्मा (भाजपा) के निधन के बाद मंडी सीट खाली हुई थी। खंडवा संसदीय क्षेत्र के लिए उपचुनाव भाजपा सदस्य नंद कुमार सिंह चौहान की मृत्यु के कारण कराना पड़ रहा है, जबकि दादरा और नगर हवेली से निर्दलीय लोकसभा सदस्य मोहन देलकर फरवरी में मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे।
असम के पांच विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और अन्य दो सीटों पर गठबंधन सहयोगी यूपीपीएल के उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने सभी पांचों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि उसकी पूर्व सहयोगी एआईयूडीएफ और बीपीएफ क्रमश: दो और एक सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में रैलियां कीं। मध्य प्रदेश में केंद्रीय मंत्रियों प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने अभियान का नेतृत्व किया।







