प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आर्थिक क्षेत्रों से बहुस्तरीय संपर्क के लिए प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को लॉन्च किया है। यह रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है। वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने बताया कि इस योजना का मकसद बुनियादी ढांचा संपर्क परियोजनाओं की एकीकृत योजना बनाना और समन्वित कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। गोयल ने कहा कि 16 मंत्रालयों और विभागों ने उन सभी परियोजनाओं को जीआईएस मोड में डाल दिया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है।
गोयल ने कहा कि गति शक्ति हमारे देश के लिए एक राष्ट्रीय अवसंरचना मास्टर प्लान होगा, जो समग्र बुनियादी ढांचे की नींव रखेगा। अभी हमारे परिवहन के साधनों के बीच कोई समन्वय नहीं है। गति इन सभी बाधाओं को दूर करेगी। यह मंच उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा, स्थानीय विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं को विकसित करने में भी मदद करेगा।
विकास के लिए जरूरी है गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गतिशक्ति का शुभारंभ करते हुए कहा कि अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी से 21वीं सदी में भारत को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में देरी और विकास कार्यों में सुस्ती के कारण करदाताओं के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं किया गया। पहले विभाग अलग-अलग काम करते थे, परियोजनाओं को लेकर उनके बीच कोई समन्वय नहीं था। गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के बिना विकास संभव नहीं है। सड़क से लेकर रेलवे, उड्डयन से लेकर कृषि तक परियोजनाओं के समन्वित विकास के लिए विभिन्न विभागों को आपस में जोड़ता है। प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान समग्र शासन का विस्तार है। भारत में लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत जो जीडीपी का 13 प्रतिशत हिस्सा है, निर्यात में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही है। गति शक्ति से इस समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान योजना लगभग 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक की योजना है और इसके परिणामस्वरूप लाखों युवाओं के लिए देश में ही नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अधिकारी ने कहा कि यह असंबद्ध योजनाओं की समस्या को दूर करेगा, मानकीकरण की कमी, मंजूरी के मुद्दों और समय पर निर्माण और क्षमताओं का अधिकतम उपयोग जैसे मुद्दों को हल करेगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने इस मंच को विकसित किया है।
राष्ट्रीय योजना समूह रखेगा निगरानी
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) सभी परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय होगा। परियोजनाओं का जायजा लेने के लिए एक राष्ट्रीय योजना समूह नियमित रूप से बैठक करेगा। किसी भी नई जरूरत को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान में किसी बदलाव को मंजूरी देने को लेकर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह गठित किया जाएगा।
सभी राज्यों से शामिल होने का किया आग्रह
सभी राज्यों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इससे देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के उचित कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और आगे चलकर मंच का आंकड़ा निजी क्षेत्र को भी दिया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि सड़क, रेलवे, दूरसंचार, तेल और गैस जैसे मंत्रालयों की परियोजनाएं इस मंच पर हैं, और इससे कपड़ा तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों को भी अपने पार्कों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
क्या है ‘गति शक्ति’
‘गति शक्ति’ नेशनल मास्टर प्लान रेल और सड़क सहित 16 मंत्रालयों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मंच है। इस योजना का मकसद बुनियादी ढांचा संपर्क परियोजनाओं की एकीकृत योजना बनाना और समन्वित कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। 16 मंत्रालयों और विभागों ने उन सभी परियोजनाओं को जीआईएस मोड में डाल दिया है, जिन्हें 2024-25 तक पूरा किया जाना है।
‘गति शक्ति’ किन बाधाओं को दूर करेगी
एक शीर्ष अधिकारी बताया, ‘‘गति शक्ति हमारे देश के लिए एक राष्ट्रीय अवसंरचना मास्टर प्लान होगा, जो समग्र बुनियादी ढांचे की नींव रखेगा। अभी हमारे परिवहन के साधनों के बीच कोई समन्वय नहीं है। गति शक्ति इन सभी बाधाओं को दूर करेगी।’’ यह मंच उद्योगों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा, स्थानीय विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगा और भविष्य के आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण के लिए नई संभावनाओं को विकसित करने में भी मदद करेगा।
निगरानी और कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय
अधिकारी ने कहा, ‘‘यह असंबद्ध योजनाओं की समस्या को दूर करेगा, मानकीकरण की कमी, मंजूरी के मुद्दों और समय पर निर्माण और क्षमताओं का अधिकतम उपयोग जैसे मुद्दों को हल करेगा।’’ सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के तहत भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान ने इस मंच को विकसित किया है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) सभी परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय होगा।
परियोजनाओं का जायजा लेने के लिए नियमित बैठक
परियोजनाओं का जायजा लेने के लिए एक राष्ट्रीय योजना समूह नियमित रूप से बैठक करेगा। किसी भी नई जरूरत को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान में किसी बदलाव को मंजूरी देने को लेकर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह गठित किया जाएगा। सभी राज्यों से इस पहल में शामिल होने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इससे देश भर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के उचित कार्यान्वयन में मदद मिलेगी और आगे चलकर मंच का आंकड़ा निजी क्षेत्र को भी दिया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि सड़क, रेलवे, दूरसंचार, तेल और गैस जैसे मंत्रालयों की परियोजनाएं इस मंच पर हैं, और इससे कपड़ा तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालयों को भी अपने पार्कों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।







