मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर देश में जातीय जनगणना की मांग दोहरायी। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना हर हाल में होनी चाहिए‚ यह सभी के हित में है इसलिए केंद्र सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे। मुख्यमंत्री ने रविवार को दिल्ली में नक्सलवाद को लेकर गृहमंत्री अमित शाह के साथ १० राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जातीय जनगणना बहुत जरूरी और देश हित में है। इसे नहीं कराने के पीछे जो तर्क दिये जा रहे हैं‚ वह सही नहीं है। केंद्र सरकार को अपने निर्णय पर एक बार फिर से पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना से सरकार को बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। जाति आधारित जनगणना एक वैध मांग है तथा प्रत्येक जाति की गणना की जानी चाहिए। यह समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा‚ जातीय जनगणना के कई फायदे हैं। हमने जो कहा है‚ उसका तर्क है। यह कहे जाने पर कि केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को यह भी बताया है कि २०११ में हुई जाति जनगणना अपने डेटा में गंभीर त्रुटियों के कारण अनुपयोगी है‚ उन्होंने स्पष्ट किया कि २०११ में सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना की गयी थी‚ लेकिन वह इस तरह का नहीं था‚ जिसकी राजनीतिक दल मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी‚ लेकिन आजादी के बाद नहीं। जातीय जनगणना होगी‚ तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है‚ उसे आगे कैसे किया जाये। उन्होंने कहा कि यह सभी को पता है कि जातिगत जनगणना कराने में थोड़ी परेशानी जरूर होगी‚ लेकिन इस कार्य के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना होगी‚ तो हर घर से पूरी जानकारी ली जायेगी‚ तो सारी बातें स्पष्ट होंगी। ऐसी कोई जाति नहीं‚ जिसमें उपजाति नहीं है। जब जातीय जनगणना होगी‚ तो उसमें लाखों जातियां और उपजातियां आयेंगी‚ लेकिन उसका विभाजन अलग–अलग कैटेगरी में किया जा सकता है। यह बहुत मुश्किल काम नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जाति के आधार पर गणना नहीं होती है‚ तो हम लोग इसे कतई सही नहीं मानेंगे। बिहार के सभी दलों ने जातीय जनगणना की मांग की है। इससे संबंधित प्रस्ताव विधानमंडल से सर्वसम्मति से पास किया गया है। उन्होंने कहा‚ ‘हम तो यही आग्रह करेंगे कि केंद्र सरकार फिर से निर्णय पर पुनर्विचार करे और जातीय जनगणा कराये। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि मैं बिहार में एक बार फिर से इस मुद्े पर सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलांगा और विचार करूंगा। उन्होंने कहा‚ ‘हर किसी को मालूम है कि हमलोगों की इच्छा क्या है।’ गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर जाति आधारित गणना को प्रशासनिक रूप से बेहद कठिन और लंबा काम बताया था। इससे यह संदेश गया है कि केंद्र सरकार जातीय जनगणना करना नहीं चाहती है। जातीय जनगणना कराने की मांग को लेकर पिछले २३ अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार से १० दलों के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। सभी को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री उनकी मांग को स्वीकार करेंगे।







