भारत कोरोना से बचाव के टीकों के किसी अवरोध के बिना तेजी से उत्पादन और टीकाकरण की प्रक्रिया के रिकार्ड़ तोड गति पकड़़ लेने के बाद वैश्विक प्रतिबद्धता के तहत दोबारा अन्य देशों की तरफ भी वैक्सीन मैत्री का हाथ बढ़ाने जा रहा है। इसके तहत अगले महीने से मित्र देशों के लिए वैक्सीन निर्यात की प्रक्रिया फिर शुरू हो जाएगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहल पर ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड़ इम्यूनाइजेशन (गावी) के तहत कोवैक्स कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें वैक्सीन उत्पादन में सक्षम देशों को उन गरीब और अल्पविकसित देशों को टीकों की आपूर्ति करनी है जो कोरोना टीकों के विकास और उत्पादन का खर्च नहीं उठा सकते। दुनिया के तमाम देशों के पास न तो टीकों के विकास की वैज्ञानिक क्षमता है और न उनके उत्पादन लायक बुनियादी ढांचा है। भारत दुनिया का सबसे बड़़ा टीका उत्पादक देश है। इसलिए सारी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी हुई थीं । भारत ने भी दुनिया को निराश नहीं किया और टीकों का विकास होते ही इनके उत्पादन में अग्रणी स्थान हासिल कर लिया। सीरम इंस्टीटूट आफ इंडि़या गरीब और अल्प विकसित देशों को टीकों का निर्यात करने के लिए प्रतिबद्ध था। कोराना की दूसरी लहर जिस समय पीक पर थी और देश में कोरोना से दिन–प्रतिदिन मौतों का सिलसिला तेज होता जा रहा उस समय दूसरे देशों को टीका निर्यात पर खूब सवाल उठाए गए। इसके बाद सरकार ने देश में टीकों की कमी को देखते हुए इसी साल अप्रैल माह में टीकों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। देश में अभी टीकाकरण और आपूर्ति को लेकर कोई मारामारी नहीं है। देश में ८१ करोड़़ लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। भारत का लक्ष्य है कि दिसम्बर तक देश के ९५ फीसद वयस्कों को टीका लग जाएं। इनमें से ६४ फीसद को एक और २२ फीसद लोगों को दोनों ड़ोज दी जा चुकी हैं। अभी ५ से १७ साल तक के बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है‚ हालांकि इसके परीक्षण हो चुके हैं और नियामक की मंजूरी का इंतजार है। तीन माह में देश में १०० करोड़़ सेे ज्यादा खुराकें उपलब्ध होंगी। भारत अपनी जरूरत पूरी करने के बाद ही टीकों का निर्यात करेगा। भारत अब तक ९० देशों को ६.६ करोड़़ टीके की खुराक दे चुका है। इसमें १६ फीसद टीके दान में दिए गए हैं।
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