भारत ने पिछले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कोरोना विषाणु रोधी टीकाकरण अभियान में दो करोड़़ ५० लाख १० हजार से अधिक टीके लगाकर एक रिकॉर्ड बनाया। इसी के साथ चीन का एक दिन में दो करोड़़ ४७ लाख टीके लगाने का रिकॉर्ड़ ध्वस्त हो गया। निश्चित तौर पर इस महती उपलब्धि का श्रेय देश के चिकित्साकर्मियों और अन्य कोरोना योद्धाओं को जाता है। सबसे अधिक टीका लगाने वाले राज्यों में बिहार‚ कर्नाटक‚ उत्तर प्रदेश‚ मध्य प्रदेश और गुजरात है। गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी राज्य भाजपा और एनड़ीए शासित राज्य हैं। हालांकि गैर भाजपा शासित राज्यों ने भी बढ़–चढ़कर हिस्सा लिया। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि कोरोना की दूसरी लहर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता कुछ कम हुई है। अगर ऐसा है तो यह कहा जा सकता है कि डै़मेज कंट्रोल के लिए भाजपा शासित राज्यों ने एक दिन में रिकॉर्ड़ टीकाकरण करने की रणनीति बनाई हो। दूसरी तरफ पिछले दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस तरह का संकेत दिया है कि दुनिया के लगभग सभी हिस्सों से कोरोना का प्रकोप कम हो रहा है। यह खबर निश्चित तौर पर राहत देने वाली है। डे़ल्टा विषाणु से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले भारत‚ ईरान‚ तुर्की और ब्रिटेन में भी मामले लगातार कम हो रहे हैं। कोरोना विषाणु के कमजोर पड़़ने की मुख्य वजह कोरोना रोधी टीकाकरण अभियान को बताया जा रहा है। हाल ही में अमेरिका की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है‚ जिसमें यह बताया गया है कि टीका लेने वालों की तुलना में टीका नहीं लेने वालों को अस्पतालों में भर्ती होने का खतरा दस गुना ज्यादा है। इसका अर्थ यह हुआ कि कोरोना को रोकने का सबसे बड़़ा हथियार टीकाकरण है। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि यहां २० प्रतिशत वयस्क आबादी को कोरोना रोधी टीके की दोनों खुराकें दी जा चुकीं हैं और ६२ फीसद आबादी को कम–से–कम एक खुराक मिल चुकी है। चिंता की बात यह है कि कोरोना विषाणु का संक्रमण वहां ज्यादा पैर पसारता है जहां टीकाकरण नहीं हुआ है। इसलिए इन क्षेत्रों में टीकाकरण की रफ्तार को और तेज करना होगा।
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