प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दो रक्षा कार्यालय परिसरों का उद्घाटन किया. ये रक्षा कार्यालय परिसर दिल्ली के कस्तूरबा गांधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू में हैं. नए रक्षा कार्यालय परिसरों में सेना, नौसेना और वायु सेना सहित रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लगभग 7,000 अधिकारी काम कर सकते हैं. इस मौके पर पीएम मोदी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वेबसाइट भी लांच की. PMO की तरफ से बताया गया था कि ये भवन आधुनिक होने के साथ-साथ सुरक्षित भी हैं. उद्घाटन कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री कौशल किशोर, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल विपिन रावत (सीडीएस) और सशस्त्र बलों के प्रमुख शामिल रहे.
उद्घाटन समारोह के बाद आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अभी तक डिफेंस से जुड़ा हमारा कामकाज दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान बनाए गए हटमेंट से ही चल रहा था। ऐसे हटमेंट्स जिनको उस समय घोड़ों के अस्तबल और बैरकों से संबंधी जरूरतों के अनुसार बनाया गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा, “नई सुविधाओं के लिए डिफेंस से जुड़े सभी साथियों को बहुत बहुत बधाई, साथियों आप सभी परिचित हैं कि अभी तक डिफेंस से जुड़ा हमारा कामकाज दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान बनाए गए हटमेंट से ही चल रहा था। ऐसे हटमेंट्स जिनको उस समय घोड़ों के अस्तबल और बैरकों से संबंधी जरूरतों के अनुसार बनाया गया था।”
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद के दशकों में इनको रक्षा मंत्रालय, थल सेना, नौ सेना और वायुसेना के दफ्तरों के रूप में विकसित करने के लिए समय समय पर हल्की फुल्की मरम्मत हो जाती थी, कोई ऊपर का अधिकारी आने वाला होता था तो थोड़ी पेंटिंग हो जाती थी, ऐसा ही चलता रहा था। उन्होंने कहा, “मैंने जब इन सबको देखा तो पहला विचार आया कि ऐसी बुरी अवस्था में हमारे इतने प्रमुख सेना के लोग देश की रक्षा के लिए काम करते हैं, इसकी इस हालत के संबंध में हमारे दिल्ली के मीडिया में क्यों कभी लिखा नहीं, वरना यह ऐसी जगह थी कि कोई इसकी आलोचना जरूर करता कि भारत सरकार क्या कर रही है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, किसी ने इसपर ध्यान नहीं दिया।”
उन्होंने कहा कि इन हटमेंट्स में आने वाली परेशानियों को भी आप लोग भली भांति जानते हैं, आज जब 21वीं सदी के भारत की सैन्य ताकत को हम हर लिहाज से आधुनिक बनाने में जुटे हैं, एक से एक आधुनिक हथियारों से लैस करने में जुटे हैं, बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जा रहा है, सीडीएस की नियुक्ति हुई, सेना की प्रोक्योरमेंट तेज हुई है तब देश की रक्षा और सुरक्षा से जुड़ा कामकाज दशकों पुराने हटमेंट्स से हो यह कैसे संभव हो सकता था, इसलिए इन स्थितियों को बदलना भी जरूरी था।
सेंट्रल विस्टा का विरोध करने वाले लोगों पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का यह भी एक हिस्सा है, सेना के अफसरों के लिए व्यवस्था विकसित हो रही है, जो लोग सेंट्रल विस्टा के प्रोजेक्ट के पीछे डंडा लेकर पड़े थे, वे बड़ी चतुराई से इसपर बिल्कुल चुप रहते थे क्योंकि उनको पता है कि यह जानकारी जब सामने आएगी तो उनकी गपबाजी चल नहीं पाएगी। पीएम ने कहा कि ये नया डिफेंस ऑफिस कॉम्प्लेक्स हमारी सेनाओं के कामकाज को अधिक सुविधाजनक, अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों को और सशक्त करने वाला है।
केंद्र सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा के तहत पहली बिल्डिंग तैयार हो गई हैं. नए रक्षा कार्यालय परिसर काफी एडवांस हैं. इन इमारतों की एक खासयित यह भी है कि इनके निर्माण में नई और टिकाऊ निर्माण तकनीक, एलजीएसएफ (लाइट गेज स्टील फ्रेम) का इस्तेमाल हुआ है. इस तकनीक की वजह से पारंपरिक आरसीसी निर्माण की तुलना में निर्माण समय 24-30 महीने कम हो गया.
दरअसल, अबतक रक्षा मंत्रालय का मुख्य दफ्तर साउथ ब्लॉक के पास था, जबकि बाकी दफ्तर इधर-उधर थे. इनको अब इन दो बिल्डिंग्स में समाहित कर दिया जाएगा. दोनों ही बिल्डिंग्स अब तैयार हैं. अगले कुछ महीनों में कर्मचारी इनमें शिफ्ट हो जाएंगे.
क्या होगा फायदा
ये दोनों इमारतें सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं. पहला कार्यालय कस्तूरबा गांधी मार्ग (सेंट्रल दिल्ली) और दूसरा अफ्रीका एवेन्यू (चाणक्यपुरी) में स्थित है. रक्षा मंत्रालय के इन दो कार्यालयों को तैयार करने में 775 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. जानकारी के मुताबिक इन दो दफ्तरों में कुल 7 हजार ऑफिसर्स-कर्मचारी काम कर सकेंगे. जो कि 27 अलग-अलग संगठनों के होंगे. नए रक्षा कार्यालय परिसरों में सेना, नौसेना और वायु सेना सहित रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के कर्मचारी बैठेंगे.







