मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत रविवार को शुरू होने के पहले ही सुबह 10 बजे ही जीआईसी मैदान पूरी तरह भर गया है. पंजाब, हरियाणा से लेकर दक्षिण भारत के किसान संगठनों के प्रतिनिधि यहां अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे हैं. कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन के बीच इस महापंचायत पर सबकी नजरें हैं. इसे किसानों के मिशन यूपी का आगाज करने का संकेत भी माना जा रहा है. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने संकेत दिया है कि मुजफ्फरनगर के बाद यूपी के अन्य मंडलों औऱ जिलों में भी किसानों की इसी तरह महापंचायत हो सकती है, ताकि यूपी चुनाव के पहले किसानों को लामबंद किया जा सके.
इस महापंचायत में पूरे देश भर के 300 किसान संगठनों के शामिल होने की बात कही जा रही है. वहीं राकेश टिकैट ने कहा है कि इस पंचायत में कितने संख्या में किसान शामिल होंगे वो बताना असंभव है. पूरे देश भर के किसान यहां कूच करने वाले हैं. उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि अगर किसनों को रोकने की कोशिश की गई तो बैरिकेट तोड़ देंगे.
मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने काफी दिनों से ज्यादा से ज्यादा किसानों को जुटाने के लिए मेहनत की है. किसान पिछले साल नवंबर से मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार तीनों कृषि कानून वापस ले. केंद्र इसके लिए राजी नहीं है. केंद्र और किसान प्रतिनिधियों के बीच लंबे समय से वार्ता भी नहीं हुई है.
किसान नेता महापंचायत में अपनी मांगों को लेकर क्या ऐलान करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा. कृषि कानूनों के अलावा किसान नेताओं ने बिजली संशोधन विधेयक और सार्वजनिक संपत्ति के मौद्रीकरण का भी मुद्दा उठा दिया है. किसान नेता लगातार कह रहे हैं कि वो कृषि कानूनों के खिलाफ अनिश्चितकालीन लड़ाई लड़ने को तैयार हैं.
राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन को लेकर कहा था कि जब तक कृषि कानूनों की वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं होगी. हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के अनुरोध पर वो मुजफ्फरनगर जा रहे हैं, लेकिन अपने घर नहीं जाएंगे.







