कांग्रेस में काफी समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कोई इट से इट बजा रहा‚ .तो कोई आलाकमान के भेदभावपूर्ण रवैये पर आह भर रहा है। ऊपर से नीचे तक पार्टी में हर स्तर पर गुटबाजी चरम पर है। पंजाब कांग्रेस में तो मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का घमासान खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पंजाब में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जारी घमासान को प्रदेश कांग्रेस की बागड़ोर सिद्धू को सौंप कर यह मान लिया गया था कि दोनों के बीच का झगड़़ा खत्म हो गया है। लेकिन गत दिनों सिद्धू के सलाहकरों द्वारा कश्मीर पर दिये गए बयान से हुई पार्टी की किरकिरी के बाद यह गुटबाजी एक बार फिर उफान पर है। शुक्रवार को सिद्धू के यह बयान देने कि ‘अगर उन्हें आजादी से काम नहीं करने दिया गया तो वह इसका मुंहतोड़़ जवाब देंगे और इट से इट बजा देंगे‚ के बाद इस मामले ने और तूल पकड़़ लिया है। अब इसमें जी–२३ समूह के नेता मनीष तिवारी ने भी कड़़ी प्रतिक्रिया देते हुए आलाकमान को कटघरे में खड़़ा कर दिया है। उन्होंने सिद्धू के बड़़बोलेपन को लेकर पार्टी की चुप्पी पर नाराजगी का इजहार करते हुए शनिवार को सिद्धू का वीडि़यो ट्वीट किया‚ जिसमें सिद्धू कह रहे हैं कि अगर अनुमति नहीं दी गई तो वह ईंट से ईंट बजा देंगे।’ पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी का कहना है कि अगर वे एक शब्द भी बोलते हैं तो उनका नाम लिया जा रहा है। उन्होंने स्थिति का वर्णन करने के लिए एक उर्दू शायरी का इस्तेमाल किया‚ ‘हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम। वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती।’ तिवारी के करीबी सूत्रों ने बताया कि पिछले साल अगस्त में जब नेताओं के समूह ने पार्टी की बेहतरी के लिए पत्र लिखा तो उन्हें देशद्रोही कहा गया‚ लेकिन अब सिद्धू के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
आपसी गुटबाजी से कांग्रेस में हालात इतने मुश्किल हो गए हैं कि पार्टी के पंजाब के प्रभारी महासचिव हरीश रावत ने शुक्रवार सोनिया गांधी से मिलकर उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने तक की गुहार लगाई है। हालांकि फिलहाल उन्होंने प्रभारी पद से हटने की बात से इनकार किया है और शनिवार को राहुल गांधी से मिलने के बाद बताया है कि वह अगले दो–तीन दिन में पंजाब जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि हरीश रावत चरम पर पहुंच चुकी कलह से तंग आकर पार्टी के पंजाब प्रभारी के पद से मुक्त होकर उत्तराखंड़ विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।







