काबुल में कल हुए धमाकों के तार पाकिस्तान से जुड़ते दिख रहे हैं। अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने काबुल अटैक को लेकर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा किया है। सालेह ने ट्वीट कर लिखा है कि तालिबान ने सबकुछ अपने मास्टर यानी पाकिस्तान से ही सीखा है। सालेह ने लिखा कि एयरपोर्ट पर हमला करने वाले आतंकी संगठन आईएस-खुरासन की जड़ें तालिबान और हक्कानी नेटवर्क से जुडी़ हैं। ये पूरी दुनिया जानती है कि हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का संरक्षण हासिल है। आईएस और खुरासन काबुल से ऑपरेट कर रहे हैं।
अमरुल्लाह सालेह ने ये भी लिखा कि तालिबान आईएस से अपने जुड़ाव की खबरों को खारिज कर रहा है लेकिन तालिबान ये सब अपने मास्टर यानी पाकिस्तान के इशारे पर कर रहा है। कहने का मतलब ये है कि कल काबुल में जो कुछ हुआ उसके पीछे कहीं न कहीं पाकिस्तान की साजिश सामने आ रही है।
बता दें कि काबुल हवाई अड्डे के बाहर कल हुए बम धमाकों में अमेरिकी सैनिकों समेत 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सौ से ज्यादा लोग घायल हैं जिनमें से कई की हालत बेहद गंभीर है। इसी बीच धमाकों के बाद व्हाइट हाउस फुल एक्शन में है। तीन ब्लास्ट में अमेरिका के 13 सैनिकों की मौत हुई है जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन ने ISIS को धमकी दी है। बाइडेन ने कहा है कि जिन लोगों ने भी इन हमलों को अंजाम दिया है, उन्हें ढूंढकर उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेनेवाला ISIS-K क्या है? तालिबान से क्या है नाता?
क्या है ISIS-K?
यह आतंकवादी समूह ISIS का एक सहयोगी संगठन है. इस संगठन की स्थापना 2015 में हुई थी. ISIS से अलग हुआ ये समूह ज्यादातर पूर्वी अफगानिस्तान, जो खुरासान प्रांत के रूप में जाना जाता है, में फैला है. इसी वजह से इसका नाम भी ISIS-K यानी ;ISIS-खुरासान पड़ा है. खुरासान शब्द एक प्राचीन इलाके के नाम पर आधारित है, जिसमें कभी उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईराक का हिस्सा शामिल था. फिलहाल यह अफगानिस्तान और सीरिया के बीच का हिस्सा है. ISIS-K ने एक बार उत्तरी सीरिया और इराक में बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था.
अमेरिकी सैनिकों पर कर चुका है कई हमले
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, ISIS-K ने 2015 से 2017 के बीच अफगानिस्तान और पाकिस्तान में नागरिकों पर 100 से ज्यादा हमले किए हैं. इसी अवधि के दौरान उसने अमेरिकी, पाकिस्तानी और अफगान सैनिकों पर लगभग 250 हमले किए हैं; अब ये संख्या बढ़ने की आशंका है.
2017 में अमेरिका ने चेतावनी देते हुए ISIS-K के प्रभुत्व वाले इलाके में एक बड़ा बम (जिसे सभी बमों की मां के रूप में जाना जाता है) गिराया था लेकिन इसके मंसूबे कम नहीं हुए. ISIS-K के पास करीब 2200 लड़ाके हैं, अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है.
तालिबान से क्या रिश्ता?
ISIS-K और तालिबान के बीच कट्टर दुश्मनी का रिश्ता है. पिछले ही हफ्ते तालिबान ने ISIS-K के एक कमांडर, जिसे जेल में बंद रखा गया था, को काबुल में ढेर कर दिया है. इस समूह के बारे में कहा जाता है कि यह तालिबान की तरह कट्टरपंथी नहीं है. दोनों विद्रोही समूह अफगानिस्तान में इलाके को कब्जा करने के दौरान कई बार आपस में भिड़ चुके हैं.
इस संगठन में जुड़े लोग आतंकी संगठन अलकायदा की विचारधारी रखते हैं. इसे सीरिया से संचालित किया जाता है. तालिबान को सबसे ज्यादा खतरा ISIS-K से ही है. IS-K तालिबान को खदेड़कर अफगानिस्तान पर अपना प्रभुत्व चाहता है. काबुल में धमाका कर वह तालिबान का डर भी खत्म करने का संदेश देना चाहता है, ताकि उसका प्रसार हो सके.






