सरकार जनता की भलाई के लिए कई योजनाएं बनाती है लेकिन उन योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी नौकरशाहों पर होती है. योजनाओं की सफलता इस बात पर ही निर्भर करती है कि सरकरी अमला कैसे उन योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में कितनी दिलचस्पी रखता है. सीएम नीतीश कुमार के फिर से शुरु हुए जनता दरबार से प्रशासनिक लापरवाही उजागर होने लगी है. योजनाएं तो बनी हैं, लेकिन आम जनता तक सही तरीके से ये पहुंच नहीं पा रही हैं. इसी को लेकर सीएम अधिकारियों को फटकार भी लगाते रहे हैं. पिछले जनता दरबार में सीएम ने लोक शिकायत निवारण अधिनियम के कार्यान्वयन में सामने आयी लापरवाही को लेकर आला अधिकारियों तक को सख्त निर्देश दिये. लोक सेवा का अधिकार और लोक शिकायत निवारण का अधिकार अधिनियम प्रारंभ से ही सीएम की प्राथमिकता में रहे हैं. ये दोनों कानून लोगों को सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने का सशक्त जरिया है.
क्या है RTPS एक्ट और RTPGR एक्ट?
बिहार सरकार ने आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से और निर्बाध रूप से मिलते रहने के लिए बिहार लोक सेवा का अधिकार (RTPS) कानून को 15 अगस्त, 2011 और बिहार लोक शिकायत निवारण का अधिकार (RTPGR) कानून को 16 जुलाई, 2016 से लागू किया है. बिहार लोक सेवा का अधिकार एक्ट का उद्देश्य यह है कि आम जनता को जरूरी सेवाएं तय समय के अंदर मुहैया करा दी जाएं. चाहे आय प्रमाण पत्र बनाना हो या जाति प्रमाण पत्र, पेयजल की सुविधा लेनी हो, बिजली का कनेक्शन लेना हो या फिर अन्य कोई सेवा, निश्चित समय सीमा के अंदर उन्हें उपलब्ध करा दी जाएं. समाज के अंतिम तबके के रोजमर्रा की कठिनाइयों एवं जरूरत की सेवाओं को इसमें शामिल किया गया है वहीं बिहार लोक शिकायत निवारण का अधिकार (RTPGR) एक्ट का उद्देश्य यह है कि अगर जनता को तय समय सीमा के अंदर सेवाएं उपलब्ध नहीं होती है तो इसकी शिकायत सक्षम प्राधिकार के पास की जा सकती है. सक्षम प्राधिकार सुनवाई कर के संंबंंधित अधिकारी को आदेश पारित करता है जिसका पालन करना आवश्यक है.
कहां हो रही है दिक्कत?
RTPS एक्ट और RTPGR एक्ट के बारे में अभी भी लोगों को जानकारी नहीं है. इसके कारण लोग दलालों के चंगुल में फंस जा रहे है. सरकारी अधिकारियों की जानबूझ कर मामले को लटकाने की आदत जरूरतमंदों को परेशान कर रही है. सक्षम क्रियान्वयन और निगरानी तंत्र के अभाव में ऐसे लापरवाह अधिकारियों को डर नहीं रहता है. वे बचाव के रास्ते तलाश लेते हैं. अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं में उलझा कर लोगों की समस्याओं को दूर करने में समय लगाते हैं, ताकि परेशान होकर लोग उनकी नाजायज मांग पूरी कर दें. लोक सेवाओं का दायरा बहुत बड़ा है और वे विभिन्न विभागों से जुड़े है. एक काम को कराने के लिए लोगों को कई विभागों का चक्कर काटना पड़ता है. इसके साथ ही देखा जा रहा है कि RTPGR एक्ट के तहत अपील का निपटारा होने में अधिक समय लग जा रहा है. अधिकारियों की कमी के कारण भी समस्या पैदा हो रही है.
कैसे होगा सुधार?
जानकारों के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को और उत्तरदायी बनाने की आवश्यकता है. साथ ही समय सीमा के अंदर काम पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों को दंडित करने की भी निश्चित व्यवस्था होनी चाहिए. प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी जरूरत है. अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को समाप्त कर लालफीताशाही पर अंकुश लगाया जा सकता है. आम जनता से सीधे जुड़े विभिन्न विभागों में समन्वय को बेहतर बना कर समस्याओं का निपटारा किया जा सकता है. इससे कम समय में प्रभावी सेवाएं उपलब्ध करायी जा सकेेंगी. सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रशिक्षण की भी उचित व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि सरकारी कामकाज को आम जनता की आवश्यकता के अनुसार ढ़ाला जा सके.
अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए सरकार के कदम
पिछले दिनों बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम और बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई निर्देश अधिकारियों को दिये थे. उन्होंने अधिनियम के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश अधिकारियों को दिया साथ ही इसके प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सके. सीएम ने सभी विभागों की लोक सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने का निर्देश दिया जिससे सेवाओं को प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जा सके. सरकार ने वैसे मामले को बहुत गंभीरता से लिया है जिसमें लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत आदेश पारित कर दिये गये हैं लेकिन उसका पालन नहीं किया गया है. जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सीएम ने खुद अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत ऐसे मामले, जिनमें फैसला हो गया है लेकिन आदेश को लागू नहीं किया जा रहा है, उनके आंकड़े मंगाए जाए. यह आदेश समझने को काफी है कि मुख्यमंत्री आम जनता को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए कितने सजग व गंभीर हैं.
बिहार में अब तक 25 करोड़ से अधिक लोगों ने आवेदन देकर इस अधिनियम के जरिए सेवाएं ली हैं. लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत भूमि संबंधी समस्या, बिजली,बिल, सड़क, पुल के रखरखाव जैसे कई विषयों को शामिल किया गया है. अगर सड़क-पुल का रख रखाव सही तरीके से नहीं हो रहा है तो लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसका फायदा यह होगा कि सड़क पुल की मेंटनेंस तो होगी ही, जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी।शासन में जनता की भागीदारी को बढ़ाने वाला यह एक महत्वपूर्ण अधिनियम है, लिहाजा इसे और प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है.







