बिहार विधान सभा व विधान परिषद की कार्यवाही मंगलवार 11 बजे तक के लिए स्थगित की गई है. एक ओर विपक्ष जहां बजट सत्र के दौरान बीते 23 मार्च को विधायकों के साथ दुर्व्यवहार का मामला उठाने की तैयारी में है वहीं, भाजपा की ओर से धर्मांतरण का मुद्दा उठाया जा सकता है. माना जा रहा है कि मंगलवार को दोनों सदनों में यह मुद्दा जोर पकड़ेगा. खास तौर पर विधानसभा में कल धर्मांतरण का मुद्दा भी उछल सकता है और इस मसले पर एनडीए की सहयोगी भाजपा नीतीश सरकार (Nitish Government) को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर सकती है. बीजेपी विधायक हरि भूषण ठाकुर बचौल (BJP MLA Hari Bhushan Thakur Bachaul) ने कहा है कि बिहार में लोभ लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा है, वे इस मुद्दे को उठाएंगे विधान सभा में उठाएंगे.
वहीं, भाजपा के विधायक संजय सरावगी (Sanjay Saraogi) ने भी इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि सीएम नीतीश हमारे सम्मानित नेता हैं, लेकिन उनकी पार्टी अलग है और उनकी पार्टी की विचारधारा भी अलग है. बिहार के गया समेत कई जिलों में लोगों का धर्मांतरण कराया जा रहा है. सरकार को इस मुद्दे पर गंभीर होना चाहिए. अन्य राज्यों में इसके लिए जिस तरीके से कानून बनाने की बात है वैसे बिहार में भी बनाया जाए.
कांग्रेस विधायक ने कही ये बात
इस बीच कांग्रेस विधायक शकील अहमद ने जबरन धर्मांतरण को गलत बताया है. शकील अहमद ने कहा कि जबरन धर्मांतरण कराना गलत है, लेकिन जो अपने मन से धर्मांतरण कर रहे हैं उस पर कार्रवाई नहीं हो सकती. बिहार में धर्मांतरण से बड़ा मुद्दा बेरोजगारी भुखमरी और गरीबी का है.
बता दें कि एनडीए सरकार में सहयोगी जीतन राम मांझी ने हाल में गया के उन 135 महादलित परिवार का समर्थन किया, जिन्होंने अपना धर्मपरिवर्तन करते हुए ईसाई धर्म अपना लिया है. मांझी ने कहा कि महादलितों के (हिंदू) धर्मपरिवर्तन में कुछ गलत नहीं है. अगर उन्हें दूसरे धर्म में अपना विकास और अच्छा महसूस होता है तो वो जाएंगे. मांझी ने कहा कि इस पर विचार करें कि महादलितों ने ईसाई धर्म क्यों अपनाया है? क्योंकि उनकी अपने धर्म में उपेक्षा की गई. जिससे उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है. उन्हें अपने ही घर में सम्मान नहीं मिलता है, ऐसे में बदलाव स्वाभाविक है.
जीतन राम मांझी ने कहा कि महादलितों पर धर्मपरिवर्तन करने का किसी ने कोई दबाव नहीं डाला. बिहार के पूर्व सीएम ने धर्म परिवर्तन को खतरा नहीं बताते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है. हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर धर्म का समान रूप से सम्मान किया जाता है.







