आज सावन की तीसरी सोमवारी है। सोमवारी और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग बना है। कहा जाता है कि इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
शिव मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतार लगी है। बाबा धाम में तीसरी सोमवारी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा राह है। कांवरियों की कतार नंदन पहाड़ से आगे बढ़कर कुमैठा तक पहुंच गई। यह रूट लाइन करीब 9 से 10 किलोमीटर लंबी रही।
सावन की तीसरी सोमवारी पर बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए रविवार दोपहर से ही कांवरियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। जलाभिषेक के लिए करीब 2 किलोमीटर लंबी लाइन है। आज करीब 3 लाख शिवभक्तों के पहुंचने की संभावना है। हर-हर महादेव और बोलबम के जयकारों से मंदिर परिसर समेत पूरा शहर गूंज रहा है।
पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर कांवरियां पैदल पहुंच रहे हैं। बाबा गरीबनाथ मंदिर से हरिसभा चौक, आमगोला से अघोरिया बाजार और रामदयालु से पहलेजा तक सड़कें भगवा रंग में रंगी नजर आई। सड़कों पर कांवरियों की कतार, हाथों में कांवर और जुबां पर बोलबम के जयकारे शहर को पूरी तरह शिवमय करते रहे।
सावन के कृष्ण, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित
गरुड़ पुराण के हवाले से बताया कि सावन के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नाग देवता को समर्पित है। नागों के प्रजातियो में अनंत, वासुकि, शेष, पद्मनाभ, कंबल, कर्कोटक, अश्व, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालीय तथा तक्षक प्रमुख है।
देवी भागवत में प्रमुख नागों का नित्य स्मरण किया गया है। ऋषि-मुनियों ने नागोपासना में अनेक व्रत-पूजन का विधान बताएं है। नाग पंचमी का पर्व नागों के साथ जीव के प्रति सम्मान, उनके संवर्धन एवं संरक्षण की प्रेरणा देता है। यह बल, पौरुष, ज्ञान, वृद्धि एवं तर्क शक्ति के परीक्षण का पर्व है।
नाग पूजन से मिलेगी कालसर्प से मुक्ति
आज मिट्टी या आटे का सर्प बनाकर उन्हें विभिन्न रंगों से सजाकर फूल, खीर, दूध, लावा, धुप, दीप आदि से उनकी पूजा होगी। आज के दिन सर्प के प्रकोप से बचने के लिए नाग पंचमी की पूजा की जाती हैं। जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है उन्हें आज नाग देवता की पूजा करनी चाहिए। नाग पूजा के बाद “ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्” मंत्र से इनकी प्रार्थना करने से सर्पदोष एवं कालसर्प दोष के मुक्ति मिलती है।
नागों की देवी मनसा की पूजा
उत्तरी भारत में नाग पंचमी के दिन मनसा देवी की भी पूजा की जाती है। देवी मनसा को नागों की देवी माना गया है। इसलिए बंगाल, उड़ीसा और अन्य क्षेत्रों में मनसा देवी के दर्शन व उपासना का विधान है। नागपंचमी पर रुद्राभिषेक का भी अत्यंत महत्व है। पुराणों के अनुसार पृथ्वी का भार शेषनाग ने अपने सिर पर उठाया हुआ है इसलिए उनकी पूजा का विशेष महत्व है। ये दिन गरुड़ पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है और नाग देवता के साथ इस दिन गरुड़ की भी पूजा की जाती है।
आज की सोमवारी कुंवारों के लिए खास
आज तीसरी सोमवारी कुंवारों के लिए खास संयोग है। शिव की सच्चे मन से पूजा करने से उनके विवाह के योग शीघ्र बनेंगे। जलाभिषेक, रुद्री पाठ तथा ॐ नमः शिवाय का जाप करने से शिव जी मनचाहा वरदान भी देंगे। जो विवाहित है उन्हें सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा। इस सोमवारी पर रुद्राभिषेक, शिवसहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न, रुद्राष्टक, शिव कवच तथा शिव तांडव स्त्रोत्र का 108 बार पाठ करने से दरिद्रता का ह्रास और शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
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सावन की तीसरी सोमवारी पर बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए रविवार दोपहर से ही कांवरियों की भीड़ उमड़ पड़ी है। रात 10 बजे तक हजारों कांवरियों ने गर्भगृह में पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव और बोलबम के जयकारों से मंदिर परिसर समेत शहर का बड़ा हिस्सा गूंजता रहा।







