‘सृजन घोटाले का जिन्न’ एक बार फिर से बिहार की सियासत में कुलांचे मारने को तैयार है। तेजस्वी यादव ने सृजन घोटाला के जिन्न को जनमत के सामने रखने की कोशिश की है। बिहार सरकार को घेरने का बिगुल फूंक दिया। इस खास समय में जब तेजस्वी यादव राजनीतिक गलियारों में आलोचना के शिकार हो रहे थे। लगातार उन पर ‘रण छोड़’ जैसे आरोप लगाए जा रहे थे। उन आरोपों से निकल कर अपनी जोरदार वापसी की।
तेजस्वी यादव ने संगठन की सारी इकाइयों को भंग कर दिया। अब सृजन घोटाला का शंख फूंक कर एक तीर से तीन-तीन शिकार कर डाले। सबसे पहले जाने कि क्या है सृजन घोटाला और क्यों तेजस्वी यादव को ये सृजन घोटाला नंबर दिलाने वाला लग रहा है।
क्या है सृजन घोटाला?
सृजन घोटाला बिहार के भागलपुर जिले में घटित एक चर्चित वित्तीय गबन का मामला है। इस घोटले में सरकारी योजनाओं के लगभग 1000 करोड़ रुपये अवैध रूप से एक एनजीओ (सृजन महिला विकास सहयोग समिति) के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे। ये पूरा खेल जिला अधिकारियों, बैंक कर्मियों और एनजीओ के कर्मचारियों की मिलीभगत से चलता था।
सरकारी खातों के असली बैंक स्टेटमेंट और पासबुक छिपाकर फर्जी स्टेटमेंट तैयार किए जाते थे ताकि विभागों को लगे कि उनका पैसा सुरक्षित है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच सरकारी विभागों (विशेषकर भू-अर्जन और कल्याण योजनाओं) के बैंक खातों से भारी-भरकम राशि धोखाधड़ी कर इस एनजीओ के खातों में ट्रांसफर की जाने लगी। और यहीं से शुरू हुआ धोखाधड़ी का अनूठा खेल।
क्या है जांच की स्थित?
लगभग 1000 करोड़ रुपये (या अधिक) का घोटाला भागलपुर स्थित ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड’ नाम के एनजीओ के जरिए सरकारी फंड की अवैध निकासी को लेकर सीबीआई की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। नवंबर 2025 में पटना की विशेष सीबीआई अदालत ने इस बहुचर्चित घोटाले में अपना पहला फैसला सुनाया, जिसके तहत तत्कालीन नाजिर अमरेंद्र कुमार यादव और बैंककर्मी अजय कुमार पांडे को 4-4 साल और बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन मैनेजर राकेश कुमार को 3 साल की सजा सुनाई गई थी।
सीबीआई ने मुख्य आरोपी रजनी प्रिया को पहले ही गाजियाबाद से गिरफ्तार किया था और घोटाले से जुड़े अन्य फरार आरोपियों (जैसे सतीश कुमार झा) की धर-पकड़ व रिमांड पर पूछताछ की कार्रवाई समय-समय पर जारी है। अभी सीबीआई की फाइनल जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
तेजस्वी के निशाने पर कौन कौन?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने यूं ही नहीं सृजन घोटाले के जिन्न निकाला है। दरअसल, इन्होंने एक साथ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, बिहार में सम्राट चौधरी सरकार और सुशासन/विकास पुरुष नीतीश कुमार पर निशाना साधा हैं। सृजन घोटाले जांच के 9 वर्ष बाद भी इस घोटाले के मुख्य अभियुक्त कौन है, इसका खुलासा सीबीआई क्यों नहीं कर रही है? इस घोटाले के मामूली किरदार को आरोपी कर सलाखों के पीछे पहुंचाकर वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार किसे बचाने का प्रयास कर रही है?
इन सारे सवालों के साथ तेजस्वी यादव सुशासन की सरकार को जनता के कठघरे में खड़ा करना चाहते हैं। सीबीआई की धीमी चाल और मुख्य अभियुक्त तक को अभी तक नहीं ढूंढ पाने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को जिम्मेदार बताकर तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं। साथ ही विपक्ष की राजनीति को धार भी देना चाहते हैं। ये घोटाला नीतीश सरकार के ऊपर लगा एक बड़ा दाग है, इसलिए तेजस्वी यादव नीतीश कुमार को भी जनता के न्यायालय में खड़ा करना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव ने ‘सृजन’ पर क्या कहा?
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘आज से ठीक 9 वर्ष पूर्व बिहार में 5500 करोड़ रुपए के सृजन घोटाले का पर्दाफाश हुआ था, सरकारी खजाने के 5500 करोड़ रुपए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के चहेते नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों ने अपने नजदीकियों के निजी खातों में ट्रांसफर किए थे। कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के घोटालेबाजों के साथ लेनदेन और घनिष्ठता के स्पष्ट साक्ष्य मिले थे लेकिन जांच एजेंसियों ने सब पर मिट्टी डाल दी।
9 साल बाद भी लूटे गए 55,00 करोड़ का कोई हिसाब-किताब नहीं, लेखा-जोखा नहीं। बीजेपी की भ्रष्टाचारी रूपी गंगोत्री में डुबकी लगाकर पापियों के सब पाप धुल जाते है। बोलो जय सियाराम। 5500 करोड़ लूट सृजन के दुर्जन कर रहे आराम!’
सुशासन की सरकार पर निशाना: बागी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के द्वारा सृजन घोटाला के मसले को उठाना अप्रासंगिक भी नहीं मानते हैं। वैसे भी सृजन घोटाला परिणति तक नहीं पहुंची है। कुछ लोगों पर आरोप गठित हुए। कुछ लोग जेल गए। मगर, जब तक सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट नहीं देती तब तक मुख्य अभियुक्त के बारे में पता नहीं चलेगा। तेजस्वी यादव इसी को टारगेट कर रहे हैं। ऐसा कर तेजस्वी एक साथ केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साध रहे हैं।







