बिहार में भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर में बड़ी कार्रवाई हुई है। उस पर गोली चलाने वाले बिहार एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया है। भरत तिवारी का एनकाउंटर 17 जून को हुआ था। उसकी मां आशा देवी ने अक्षय कुमार पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने आरोपी जवान को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोप है कि आत्मसमर्पण करने के बाद भरत तिवारी को सबसे पहली गोली अक्षय कुमार ने मारी थी। इसके बाद मौके पर उसे चार और गोलियां मारी गईं। एनकाउंटर की जांच के दौरान अक्षय कुमार कई बार बुलाने के बाद भी पूछताछ के लिए नहीं आया। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के आधार पर उसे पकड़ा है।
बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के परिजनों को पटना बुलाकर मुलाकात की थी. इसके साथ ही सीएम सम्राट ने जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ और एसडीएम पर बड़ा एक्शन भी लिया था. उन्होंने भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को वापस पुलिस मुख्यालय भेज दिया. हाल ही में उन्हें सरकार ने मद्य निषेध विभाग में डीएसपी बनाया था. सम्राट चौधरी ने जगदीशपुर के एसडीओ संजीत कुमार को भी वहां से हटा दिया. संजीत अब सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान दे रहे हैं. इनकी भूमिका भी भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में संदिग्ध बताई जा रही थी.
भरत तिवारी एनकाउंटर केस ने बिहार सरकार को हिलाकर रख दिया है. विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ खुद बीजेपी के भी कई नेता ‘एनकाउंटर न्याय’ पर सवाल उठा रहे थे. बिहार से लेकर अन्य राज्यों के लोग भी सोशल मीडिया पर गुस्सा जाहिर कर रहे थे और भरत तिवारी के लिए सरकार से न्याय मांग रहे थे.
मां ने कहा- STF जवान ने पहली गोली चलाई थी
भरत एनकाउंटर में पहली गिरफ्तारी पर आशा देवी ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि पुलिस ने कार्रवाई की है। आगे भी एक्शन होना चाहिए। एसडीएम, डीएसपी की भी गिरफ्तारी होनी चाहिए, भरत ने उनका नाम लिया था। दरोगा भी शामिल था। उसे भी गिरफ्तार करना चाहिए। सीएम ने इंसाफ दिलाने की बात कही है, मुझे उन पर भरोसा है।’
भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा, बहुत खुशी की बात है। सीएम सम्राट चौधरी ने जो कहा था वो सच होता दिख रहा है। जिसकी गिरफ्तारी हुई है, उसने ही पहली गोली मारी थी। अब सारे भेद वही खोलेगा। अब एसडीएम, फिर एसडीपीओ की गिरफ्तारी होगी। इसी तरह और लोगों की भी गिरफ्तारी होगी। सीएम ने कहा था किसी को छोड़ेंगे नहीं। जो कहे थे वो वादा निभा रहे हैं।
जदयू प्रवक्ता चंदन सिंह ने कहा कि भरत तिवारी की मां ने जिस STF सिपाही पर उनके बेटे पर गोली चलाने का आरोप लगाया था, उसी STF जवान की गिरफ्तारी हुई है।
CM से मुलाकात के बाद 2 अफसर हटे
24 जुलाई को भरत भूषण तिवारी के परिजनों ने पटना में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने भावुक परिजनों से साफ कहा कि सरकार उनके साथ है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
परिजनों से मुलाकात के तुरंत बाद सरकार ने दो बड़ी कार्रवाई की। पहली, जगदीशपुर के एसडीओ सुजीत कुमार को उनके पद से हटाया गया। भरत के परिजनों ने सुजीत कुमार पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। फिलहाल उन्हें कोई नया पद नहीं दिया गया है और वे सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान देंगे।
दूसरी कार्रवाई आरोपी एसडीपीओ राजेश कुमार पर हुई है। एनकाउंटर के बाद राजेश कुमार को मद्य निषेध विभाग में तैनात किया गया था, जिसे लेकर परिजनों में आक्रोश था। अब उन्हें वहां से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। राजेश कुमार अब अगले पदस्थापन की प्रतीक्षा में मुख्यालय में रहेंगे।
परिजनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की
परिजनों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए मामले में शामिल अन्य जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।
अब एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी से यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। माना जा रहा है कि आगे की जांच में एनकाउंटर से जुड़े कई और सच सामने आ सकते हैं।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सरकार पर उठे सवाल, 3 कारण
कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं: 28 साल का भरत भूषण तिवारी कोई पेशेवर अपराधी, शूटर या किसी गैंग का सरगना नहीं था। उस पर पहले से हत्या, लूट या डकैती का कोई गंभीर मामला दर्ज नहीं था। वह बाढ़, कटाव और विस्थापन जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वाला सोशल एक्टिविस्ट था। अफसरों के सामने वंचित और गरीब लोगों की मांगों को पुरजोर तरीके से उठा रहा था।
फेसबुक लाइव और सरेंडर का वीडियो: पुलिस की यह थ्योरी कि ‘भरत ने पुलिस पर 10-12 राउंड फायरिंग की, इसलिए आत्मरक्षार्थ गोली चलानी पड़ी’ तब पूरी तरह ध्वस्त हो गई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। मौत से ठीक पहले भरत फेसबुक लाइव कर रहा था, जिसमें साफ दिखा कि उसने अपनी पिस्टल दूर फेंक दी थी और आत्मसमर्पण कर चुका था। निहत्थे होने के बाद भी पुलिस ने गोली मारी।
पुलिस की थ्योरी गलत: पुलिस ने पहले बयान दिया था कि भरत ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त’ है। घटना के वक्त पुलिस और भरत के बीच करीब 200 मीटर की दूरी थी, जबकि भरत के हाथ में मौजूद अवैध पिस्टल की मारक क्षमता मात्र 30 मीटर थी। ऐसे में पुलिस के ‘आत्मरक्षा में गोली चलाने’ के दावे पर गंभीर प्रशासनिक और कानूनी सवाल खड़े हो गए।
अब भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की कहानी जानिए
भरत भूषण तिवारी की ओर से 17 जून को फेसबुक लाइव वीडियो में दिख रहा है कि वो सुनसान इलाके में खड़ा है। उसके सामने पुलिस और एसटीएफ की टीम खड़ी है। भरत के दोनों ओर बुलेट प्रूफ जैकेट पहने भोजपुर पुलिस के जवान हथियार लेकर खड़े हैं। खुद भरत इस बात का जिक्र करता है। वो खुद को निर्दोष बताते हुए कहता है कि मैं कोई मुजरिम नहीं हूं, इसके बावजूद एसटीएफ के साथ भोजपुर पुलिस टीम मुझे पकड़ने आई है।
वीडियो के आखिर में भरत भूषण पुलिस की ओर हथियार फेंकता है और खुद को सरेंडर कर फेसबुक लाइव बंद कर देता है। पुलिस का दावा है कि इसके बाद उसने दोबारा पिस्टल उठाकर फायरिंग की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में उसके पैरों में गोली मारी गई।







