बिहार के ग्रामीण इलाकों में टैक्स वसूली की अनिवार्य शर्त को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ तौर पर कहा कि हर घर से सालाना 1200 रुपये टैक्स वसूलने की शर्त को शिथिल या समाप्त किया जाना चाहिए। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी इस शर्त को हटाने की पुरजोर मांग की है।
बिहार को मिलेंगे 52 हजार करोड़
16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मिलनी है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य को 6,670 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। हालांकि, नीति के मुताबिक पूरी राशि प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को कुल फंड का 20 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 1,300 करोड़ रुपये) खुद आंतरिक संसाधनों या टैक्स के जरिए जुटाना होगा।
प्रदर्शन के आधार पर तय होगा फंड
इस योजना के तहत मिलने वाली कुल धनराशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर काम और सुधारों से जुड़ा हुआ है। आयोग ने फंड जारी करने के लिए परफॉर्मेंस को मुख्य आधार बनाया है।
- कुल आवंटित राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार और पंचायती राज संस्थाओं के प्रदर्शन को देखकर ही जारी किया जाएगा।
- मंत्री दीपक प्रकाश ने भरोसा दिया कि आयोग से मिलने वाली राशि का उपयोग ग्रामीणों के हित में पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाएगा।
- इस फंड से ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को प्रशासनिक और वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
- राशि का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता और स्थानीय विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करना है।
यूपी-छत्तीसगढ़ से मिला बिहार को समर्थन
ग्रामीणों पर टैक्स का बोझ बढ़ाने वाली इस नीति का विरोध केवल बिहार तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने भी स्पष्ट किया कि 1200 रुपये कर वसूली की यह शर्त व्यावहारिक नहीं है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
कार्यशाला में देश भर के दिग्गजों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला में देश भर के राज्यों के पंचायती राज मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बिहार की ओर से पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार और अपर सचिव डॉ आदित्य प्रकाश सहित कई वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने राज्य का पक्ष मजबूती से कार्यशाला के समक्ष रखा।







