कबीर कहते हैं- तिनका कबहुं ना निन्दिए, जो पांवन तर होय, कबहुं उड़ी आंखिन पड़े, तो पीर घनेरी होए. अर्थात, एक छोटे से तिनके की भी निंदा मत करो जो तुम्हारे पांव के नीचे दब जाता है. ये उड़कर आंख में गिर जाए तो गजब की पीड़ा होती है. यहां तो डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से छीन कर तिनका अपनी आंखों में रख लिया. शांति का नोबल नहीं मिलने से उबल गए थे ट्रंप. वेनेजुएला में हुई आसानी ने हिम्मत और बढ़ा दी. उधर 40 साल से इसी इंतजार में बैठा था इजरायल. कब मौका मिले और अमेरिका को घसीटें. पिछले साल 12 दिनों में काम नहीं बन सका. तो बेंजामिन नेतन्याहू ने दोबारा ट्राई किया. ट्रंप को अहसास कराया गया कि ईरान दो तीन हफ्ते में परमाणु बम बनाकर इजरायल पर पटक देगा. डेथ टू अमेरिका कहने वाले ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने निकल पड़े. लोकतंत्र की बहाली के नाम पर 70 से ज्यादा देशों की सरकार गिराने का रिकॉर्ड है अमेरिका के पास. इस बार पश्चिमी एशिया के राजाओं की रक्षा करनी थी. तो कूद पड़े.
रिजीम चेंज न हो पाएगा ये तो शुरुआती 10 दिनों में ही पता चल गया. अयातुल्ला अली खामेनेई, अली लारीजानी जैसे नेताओं के मारे जाने के बाद IRGC ने 30 से ज्यादा लेयर वाले मिलिट्री सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया. ट्रंप और नेतन्याहू हाथ जोड़ कर ईरानियों से सड़क पर निकलने की गुहार लगाते रहे लेकिन उन युवाओं का मूड स्विंग हो चुका था जो महीने भर पहले पेजेश्कियन के खिलाफ उग्र हो गए थे. उधर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नस दबा ईरान ने ट्रंप को ग्लोबल विलन बना दिया. हम जैसे सैलरी वाले भी तो कोस रहे थे. पोर्टफोलियो लाल ही हाल. झूलन लाल से ट्रंप को दुरूस्त करने की विनती करते. जब थाड, पैट्रियट, टॉमहॉक गोदान से दनादन कम होने लगे और अमेरिका हांफने लगा तो त्राहिमाम की धमकी और फिर मोहलत देने की नीति. दरअसल ये मोहलत दे नहीं रहे थे ले रहे थे.अमेरिका हर दिन एलान करता कि ईरान के सारे एयर डिफेंस सिस्टम, नेवी, एयर फोर्स, मिसाइल लॉंचर खत्म हो गए. कुछ ही घंटे में ईरान इसका जवाब देता जिससे ट्रंप चिढ़ गए. एक महीने बाद जब कुछ घंटों में ही अमेरिका के F-15 और A-10 मार गिराए गए तब असली कहानी सामने आई. एक फाइटर पायलट को बचाने के चक्कर में अमेरिका ने दो सी-130, दो ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टर और तबाह करवा लिए. पायलट बच गया लेकिन 60 करोड़ डॉलर के खर्च के बाद.
उधर होर्मुज पर ईरान टस से मस नहीं और अमेरिका की हिम्मत नहीं कि त्रिपोली, अब्राहम लिंकन या 82 वीं एयरबोर्न बटालियन को उस तरफ भेजने की जहमत उठाए. खीझ निकालनी थी तो ट्रंप ने नाटो पर बिल फाड़ दिया. उधर तेल फिसलता हुआ 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. अमेरिका में चूल्हा बंद होने की नौबत. पूरी दुनिया में पॉलीथिन से लेकर दवाई तक महंगी हो गई और तेल तो खैर इकॉनमी का ईंधन ही है.नाटो के यूरोपीय देशों ने भी तय कर लिया बहुत हुआ मजाक. शुरुआत की स्पेन के पेड्रो सांचेज ने और फिर स्टार्मर, मेलोनी और मैक्रों भी जमकर सुनाने लगे. सबने कहा जंग तुमने शुरू किया फिर होर्मुज खुलवाने हमें क्यों बुला रहे. खोल लो खुद ही. ट्रंप की पहली कैजुअल्टी तो नाटो ही बना.
फिर ईरान ने जब सऊदी अरब के अरामको से लेकर कुवैत, बहरीन , यूएई के अमेरिकी सैन्य अड्डों, तेल रिफाइनरी और बड़ी कंपनियों को मिसाइलों से दागना शुरू किया तो हड़कंप मच गया. कतर के रास लफान सिटी में इतनी लपटें उठी कि प्रोडक्शन लेवल पर लाने में पांच सल लग जाएंगे. सऊदी से पटती नहीं है फिर भी वो परेशान.कुल मिलाकर 150 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान जो इस इलाके के सभी देशों की जीडीपी का 5 से 8 परसेंट है. कतर में तो मांग उठने लगी है कि अमेरिकी बेस हटाओ. रक्षा करने आए ट्रंप ने इतना नुकसान कर दिया है कि अरब देशों का अमेरिका से मोह भंग होना तय है. इजरायल से तो वो पहले से परेशान हैं.अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यही है.
खुद अमेरिका के 40 अरब डॉलर से ज्यादा स्वाहा हो गए. पेंटागन को 200 अरब डॉलर का एक्स्ट्रा बजट मांगना पड़ा. ये पैसा दलाल बन बैठे पाकिस्तान की जीडीपी का 12 से 15 परसेंट है. तीन अरब डॉलर के लिए यूएई से जलील हुए शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सोच रहे होंगे इतना हमें ही दे देते तो काम बन जाता.
ईरान जंग में ट्रंप की दुर्गति
जंग में दुर्गति देख ट्रंप खिसकने का इंतजाम खोजने लगे. वैसे भी TACO निक नेम है- Trump Again Chickens Out. गाली गलौज की भाषा पर आ गए. ईरान को हरामजादा तक कह डाला और पूरी सभ्यता को मिटाने की कसमें खाने लगे. डेडालइन तय हो गई. जवाब में ईरान के दूतावासों ने जो मौज ली है वो जंग के माहौल में भी गुदगुदाने वाला रहा. तुर्किए में ईरानी दूतावास ने लिखा – सिकंदर ने जला डाला. मंगोलों ने लूट लिया. इतिहास ने हमारा इम्तहान लिया और ईरान यहीं है. किसी सनकी की चेतावनी से वो सभ्यता नहीं मिट सकती जिसे समय भी नहीं मिटा सका.
ईरान की शर्तों पर ट्रंप का सीजफायर ऐलान
हमें भी लगा आठ अप्रैल की सुबह भारत के मुताबिक 5.30 बजते ही ईरान दुनिया के मानचित्र पर रहेगा या नहीं. ऑफिस आने की तैयारी थी लेकिन नींद खुलते ही व्हाट्सऐप पर देखा ट्रंप ने अपना इंतजाम कर लिया था. ईरान की शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार हो गए. पाकिस्तान बदनाम हो चुका था. शहबाज का ड्राफ्ट ट्वीट सामने आ गया जिसे किसी और ने भेजा था. आप समझ गए होंगे कहां से आया होगा. मतलब सीजफायर स्क्रिप्टेड थी या इसकी योजना ट्रंप ने बनाई थी वो इसे भी गुप्त नहीं रख पाए. उधर जीत के बाद सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीटर हेगसेथ जब पोडियम पर चढ़े तो अधोवायु निकल आई. जीतने वाले की अधोवायु निकल जाए, ऐसा विरले ही देखने को मिलता है.
हमें भी लगा आठ अप्रैल की सुबह भारत के मुताबिक 5.30 बजते ही ईरान दुनिया के मानचित्र पर रहेगा या नहीं. ऑफिस आने की तैयारी थी लेकिन नींद खुलते ही व्हाट्सऐप पर देखा ट्रंप ने अपना इंतजाम कर लिया था. ईरान की शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार हो गए. पाकिस्तान बदनाम हो चुका था. शहबाज का ड्राफ्ट ट्वीट सामने आ गया जिसे किसी और ने भेजा था. आप समझ गए होंगे कहां से आया होगा. मतलब सीजफायर स्क्रिप्टेड थी या इसकी योजना ट्रंप ने बनाई थी वो इसे भी गुप्त नहीं रख पाए. उधर जीत के बाद सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीटर हेगसेथ जब पोडियम पर चढ़े तो अधोवायु निकल आई. जीतने वाले की अधोवायु निकल जाए, ऐसा विरले ही देखने को मिलता है.
अमेरिका में ट्रंप को सब कोस रहे
उधर कमला हैरिस से लेकर मागा कैंप के लोग भी ट्रंप को कोस रहे हैं. उनकी हालत ऐसी खस्ता हुई है कि भविष्य में फिर किसी ऐसे दुस्साहस से पहले वो एक ड्राफ्ट मोड तैयार करेंगे. अभी तो इसी सदमे से उबरने में टाइम लगेगा. ईरान ने जो शर्तें रखी हैं उससे कहीं बेहतर डील तो ओबामा ने की थी जिसे ट्रंप ने 2018 में तोड़ डाला. हो सकता है एक ड्राफ्ट वो बना भी रहे हों. इसके आधार पर कुछ कैबिनेट मंत्रियों और सलाहकारों को फायर कर सकते हैं. ये कहते हुए कि वॉर पर गलत सलाह दे दी थी. कुछ भी हो हमारे गांव घर को वो कहावत ट्रंप पर सटीक बैठती है. जातो गंवाए, भातो न खाए. इसका अर्थ होता है समाज में किसी के घर भोज हो तो न्यौता ठुकरा देना फिर इसके लिए समाज से दंड भी भोगना और भोज तो नसीब नहीं ही हुआ. वही ट्रंप के साथ हुआ. मकसद भी पूरा नहीं हुआ और पूरी दुनिया में जलील भी हो रहे हैं







