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ईरान-इजराइल जंग के 28 दिन बाद अब हूती विद्रोही भी इसमें शामिल , क्या सऊदी प्रिंस ईरान युद्ध को और खतरनाक बनाना चाहते हैं !

UB India News by UB India News
March 29, 2026
in अन्तर्राष्ट्रीय
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पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक, 400 की मौत, 250 घायल ,  गुस्से में भारत, बोला- ‘बर्दाश्त नहीं अमानवीय कृत्य ………
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ईरान-इजराइल जंग के 28 दिन बाद अब हूती विद्रोही भी इसमें शामिल हो गए हैं। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक यमन में मौजूद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने करीब 2000 किलोमीटर दूर इजराइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा और आसपास के इलाकों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी।

इजराइली सेना के मुताबिक, मिसाइल लॉन्च का पता चलते ही एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव किया गया और खतरे को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। इस हमले में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। मौजूदा जंग के दौरान यमन से इजराइल पर यह पहला हमला माना जा रहा है।

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खामेनेई के जनाजे में शामिल होने भारत-पाकिस्तान से कौन-कौन पहुंचा………

हूती ने इससे पहले गाजा जंग शुरू होने के बाद नवंबर 2023 में इजराइल और समुद्री जहाजों पर हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में इजराइल ने भी उन पर जवाबी हमले किए थे। हालांकि अक्टूबर 2025 में हमास और इजराइल के बीच सीजफायर होने के बाद से हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर हमले रोक दिए थे।

वहीं, UAE में इंटरसेप्ट की गई बैलिस्टिक मिसाइलों के मलबे गिरने से पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। इनमें 2 की हालत गंभीर बताई गई है।

ईरान के अपार्टमेंट पर इजराइली हमला, मलबे में दबने से कई लोगों की मौत

ईरान की राजधानी तेहरान में एक अपार्टमेंट अमेरिकी-इजराइली हमले के बाद तबाह तो गया। मलबे में दबने से कई लोगों की मौत हो गई।

ईरान से बातचीत को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने जानकारी देने से इनकार किया

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इनडायरेक्ट बातचीत को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी देने से इनकार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह पारंपरिक कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें देश अपनी स्थिति और शर्तों को सार्वजनिक नहीं करते, ताकि बातचीत प्रभावित न हो और समझौते की संभावना बनी रहे।

सऊदी अरब ने अमेरिका से ईरान के खिलाफ सैन्य हमले तेज करने और युद्ध जारी रखने का आग्रह किया है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आजकल कभी ईरान को धमकाते हैं तो कभी समझौता करने पर आतुर दिखते हैं. ईरान यु्द्ध शुरू होने के बाद से भारत सहित कई देशों में मुस्लिम ब्रदरहुड का सपोर्ट भी नजर आया, मगर इस बीच एक खबर ने सनसनी मचा दी है. सऊदी अरब ने अमेरिका से ईरान पर हमले तेज करने का आग्रह किया है. एक सऊदी खुफिया सूत्र ने इसकी पुष्टि की है. वहीं, सऊदी अरब इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या वह सीधे तौर पर इस लड़ाई में शामिल होगा.

क्या चाहते हैं सऊदी प्रिंस

सऊदी सूत्र ने न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी उस रिपोर्ट की पुष्टि की है, जिसमें कहा गया था कि सऊदी अरब के वास्तविक नेता क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध को न रोकने का आग्रह किया है और कहा है कि अमेरिका-इजरायल का अभियान मध्य पूर्व को नया रूप देने का एक “ऐतिहासिक अवसर” है. खुफिया सूत्र ने बताया कि रियाद न केवल सैन्य अभियान को जारी रखने की मांग कर रहा है, बल्कि उसे और तेज करने की भी बात कर रहा है. ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए क्राउन प्रिंस की भूमिका के बारे में रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा, “हां, वह एक योद्धा हैं. वह हमारे साथ लड़ रहे हैं.”

भारत के लिए पेट्रोलियम लेकर जा रहे दो और जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं। ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इन जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के वॉरशिप स्टैंडबाय पर रखे गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद दी जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में ऐसे और जहाज भी इस मार्ग से गुजरने वाले हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।

मुस्लिम ब्रदरहुड का क्या होगा

इस रिपोर्ट से ये बात साफ हो जाती है कि ईरान को पूरी तरह बर्बाद करने के लिए सऊदी अरब इजरायल की लाइन पर है. संयुक्त अरब अमीरात के तो पहले से ही इजरायल से अच्छे संबंध हैं. इस तरह से कह सकते हैं कि अरब मुल्क अब इस लड़ाई में पूरी तरह इजरायल के साथ हैं और पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश अमेरिका को खुश करने के लिए मध्यस्थ बन गए हैं. वो वही कर रहे हैं, जो अमेरिका चाहता है. वो ईरान को अमेरिका के सामने घुटने टेकने के लिए एक तरह से मजबूर कर रहे हैं. ऐसे में दुनिया भर में मुस्लिम ब्रदरहुड के नाम पर ईरान का समर्थन करने वाले लोगों को पहले अपने मुस्लिम हुक्मरानों से पूछना चाहिए कि आखिर वो किसके साथ हैं?

मुस्लिमों को बरगलाने वाले आतंकवादी संगठन क्यों चुप 

सबसे हैरानी की बात है कि कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं करने वाले और मुस्लिमों का रहनुमा बनने वाले लश्कर ए तैयबा चीफ हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद चीफ मसूद अजहर जैसे लोग ईरान पर हमले के बाद से कहां छिपे हैं, ये पता तक नहीं चल रहा. उनका मुस्लिम प्रेम ईरान को लेकर नहीं जाग रहा. अब तक उनकी तरफ से दो शब्द भी इस युद्ध पर नहीं बोले गए. मुस्लिम युवकों को अपनी फंडिंग के लिए बरगला कर कश्मीर में खूनखराबा कराने वाले इन दो आतंकवादियों को अब मुसलमानों की चिंता नहीं है. मगर आम मुसलमान फिर भी ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है. ऐसे में ये साबित हो जाता है कि मुस्लिम ब्रदरहुड की बातें तभी याद आती हैं, जब कोई ‘मौका’ दिखे. ये ‘मौका’ राजनीति चमकाने से लेकर डॉलर में फंड लेने तक का हो सकता है.

भारत कर रहा अपनी तैयारी

यही कारण है कि भारत अपनी तैयारी खुद कर रहा है. आर्थिक से लेकर सैन्य हर तरह की तैयारी में स्वदेशी को अपनाया जा रहा है. भारत की खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट और पीएम मोदी व विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपने समकक्षों से मुलाकात और फोन पर बात से साफ तौर पर समझ आ गया है कि ईरान युद्ध का हाल-फिलहाल समाप्त होना बेहद मुश्किल है. हां, स्थिति और खतरनाक जरूर हो सकती है. यही कारण है कि भारत सरकार अपने राज्यों की सरकार के साथ साझा टीम बनाकर काम करने पर बल दे रही है. पीएम मोदी खुद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं. भारत ईरान युद्ध के लंबा खिंचने पर खुद को बचाए रखने के लिए अब तैयारी में जुट गया है.

अमेरिका-इस्राइल के हमले में ईरान के कितने बड़े चेहरे खत्म?

ईरान में जारी युद्ध अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां हमले सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के कई बड़े राजनीतिक और सैन्य नेता मारे गए हैं। इन हमलों ने सिर्फ सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि ईरान के पूरे सत्ता ढांचे को हिला दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि अब रणनीति नेतृत्व को खत्म कर सिस्टम को कमजोर करने की है।

इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। 28 फरवरी को उनके ठिकाने पर हुए हमले में उनकी जान गई। वह 1989 से सत्ता में थे और उन्होंने सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर ईरान को क्षेत्रीय ताकत बनाया। लेकिन उनके दौर में अमेरिका और इस्राइल के साथ टकराव भी लगातार बढ़ता रहा।

क्या ईरान की सबसे बड़ी ताकत थे खामेनेई?

खामेनेई ईरान के सबसे शक्तिशाली नेता थे। सेना, खुफिया एजेंसियों और विदेश नीति पर उनका पूरा नियंत्रण था। उनके फैसले ही देश की दिशा तय करते थे। उनकी मौत से सत्ता के केंद्र में बड़ा खालीपन पैदा हो गया है और नेतृत्व की कमान कमजोर पड़ी है।

अली लारीजानी भी थे अहम
अली लारीजानी 17 मार्च को मारे गए। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख थे और परमाणु वार्ता में अहम भूमिका निभाते थे। वह खामेनेई के करीबी सलाहकार भी थे और ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति तय करने में उनका बड़ा योगदान था।

खुफिया तंत्र के मुखिया इस्माइल खातिब
इस्माइल खातिब 18 मार्च को इस्राइली हमले में मारे गए। वह ईरान के खुफिया मंत्री थे और देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जानकारी जुटाने का काम देखते थे। वह खामेनेई के भरोसेमंद माने जाते थे और खुफिया नेटवर्क के प्रमुख चेहरे थे।

सुरक्षा नीति के अहम खिलाड़ी अली शामखानी
अली शामखानी 28 फरवरी को तेहरान में हुए हमले में मारे गए। वह ईरान की सुरक्षा और परमाणु नीति के बड़े फैसलों में शामिल थे। इससे पहले भी उन पर हमला हुआ था, लेकिन इस बार वह बच नहीं सके।

सैन्य ताकत के प्रमुख थे मोहम्मद पकपुर
मोहम्मद पकपुर आईआरजीसी के प्रमुख थे और 28 फरवरी को हमले में मारे गए। आईआरजीसी ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है। पकपुर देश की सैन्य रणनीति और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे।

रक्षा नीति के केंद्र में थे अजीज नसीरजादेह
अजीज नसीरजादेह, जो ईरान के रक्षा मंत्री थे, भी उसी हमले में मारे गए। वह सैन्य योजना और रक्षा नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाते थे और वायुसेना से जुड़े अनुभव रखते थे।

सेना की कमान संभाल रहे थे अब्दोलरहीम मौसवी
अब्दोलरहीम मौसवी सेना प्रमुख थे और सभी सैन्य शाखाओं के बीच तालमेल बनाते थे। 28 फरवरी को हुए हमले में उनकी मौत हो गई, जिससे सेना की कमान पर सीधा असर पड़ा।

आंतरिक सुरक्षा के जिम्मेदार गोलामरेजा सोलेमानी 
गोलामरेजा सोलेमानी बसीज फोर्स के प्रमुख थे और 17 मार्च को मारे गए। यह फोर्स देश के अंदर कानून व्यवस्था और सरकार की पकड़ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

खुफिया नेटवर्क के धुरंधर रेजाई
बेहनाम रेजाई 26 मार्च को बंदर अब्बास में मारे गए। वह नौसेना खुफिया प्रमुख थे और क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखते थे। उनकी मौत से ईरान की समुद्री सुरक्षा और जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई है।

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