भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली. ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम होने के संकेतों से बाजार में फिर से खरीदारी बढ़ी है. 25 मार्च को सेंसेक्स 1.63% की बढ़त के साथ 75,273.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.72% चढ़कर 23,306.45 के लेवल पर पहुंच गया. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही ईरान के साथ सीजफायर का ऐलान कर सकते हैं, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई है.
भारत के लिए यह खबर राहत की है. तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और आम चीजों के दाम बढ़ सकते थे. अगर सीजफायर होता है तो अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड करीब 6% गिरकर $98.31 प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि WTI क्रूड 5% फिसलकर $87.65 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान (ईरान) के बीच बातचीत चल रही है और ईरान शांति समझौता चाहता है.
किस लेवल तक जा सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, जेमस्टोन इक्विटी रिसर्च एंड एडवाइजरी सर्विसेज के CMT और फाउंडर मिलन वैष्णव का मानना है कि Nifty 50 में चल रही मौजूदा काउंटर-ट्रेंड रैली में अभी भी कुछ दम बाकी है. उन्होंने कहा कि अगर कोई नई खराब खबर नहीं आती है तो यह राहत रैली 24,000 के स्तर तक कायम रह रह सकती है. उन्हें उम्मीद है कि भले ही बाज़ार में कंसोलिडेशन हो, निफ्टी 23,000 का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहेगा.
बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के मुताबिक, Choice Equity Broking के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक, 30 शेयरों वाला इंडेक्स (सेंसेक्स) लगातार बेहतर प्राइस स्ट्रक्चर दिखा रहा है. इसमें higher highs और higher lows बन रहे हैं, जो शॉर्ट टर्म में मजबूती और हालिया गिरावट के बाद रिकवरी के संकेत देते हैं. उन्होंने कहा कि टेक्निकल तौर पर 74,500–74,700 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा, जहां गिरावट पर खरीदारी आ सकती है. वहीं, 75,800–76,000 के आसपास रेजिस्टेंस देखा जा रहा है, जहां बाजार को मुनाफावसूली का दबाव झेलना पड़ सकता है.
एशियाई शेयर बाजारों का हाल
गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में स्पष्ट दिशा नहीं दिखी, जबकि डॉलर मजबूत बना रहा. मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलती घटनाओं के बीच निवेशक सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं. ईरान ने संकेत दिया है कि वह खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है. बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को झटका दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, महंगाई की चिंता गहरा गई है और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें प्रभावित हुई हैं.
शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा. जापान का निक्केई 0.6% की बढ़त में रहा, जबकि दक्षिण कोरिया के शेयर 1.2% तक फिसल गए. वहीं, जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI इंडेक्स 0.23% गिरा, जिससे इस महीने करीब 8.7% की गिरावट की आशंका है, जो अक्टूबर 2022 के बाद सबसे बड़ी मंथली गिरावट हो सकती है. भारतीय शेयर बाजार आज गुरुवार को रामनवमी के कारण बंद है. ऐसे में अगर शनिवार को इजराइल और ईरान के बीच अगर सीजफायर हो जाता है तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है.







