सांसद पप्पू यादव के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है. जिससे यह तय होगा कि उन्हें बेल मिलेगी या जेल में ही रहना पड़ेगा. स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते पीएमसीएच (PMCH) में करीब 14 घंटे तक चले इलाज के बाद, रविवार दोपहर को डॉक्टरों ने उन्हें जरूरी दवाओं के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी थी. इसके तुरंत बाद पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें पटना के बेउर जेल शिफ्ट कर दिया गया, जहां कारागार प्रशासन द्वारा दोबारा उनका हेल्थ चेकअप कराया गया. अब सभी की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं कि क्या उन्हें राहत मिलती है या कानूनी प्रक्रिया के तहत सलाखों के पीछे ही रहना होगा.
शुक्रवार देर रात हुई थी गिरफ्तारी
पप्पू यादव को वर्ष 1995 के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद शनिवार को पटना की एक अदालत ने दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ सांसद/विधायक अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत दर्ज मामले में वारंट जारी किया गया था
पप्पू यादव को वर्ष 1995 के एक मामले में गिरफ्तारी के बाद शनिवार को पटना की एक अदालत ने दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात पटना के मंदिरी स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. उनके खिलाफ सांसद/विधायक अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) के तहत दर्ज मामले में वारंट जारी किया गया था
क्या है पूरा मामला?
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक धोखाधड़ी और संपत्ति विवाद के मामले में गिरफ्तार किया है. यह मामला वर्ष 1995 का है, जिसमें उन पर आरोप है कि उन्होंने पटना के गर्दनीबाग (पुनाईचक) इलाके में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति का मकान धोखे से किराए पर लिया और बाद में उसे खाली करने के बजाय उस पर कब्जा कर अपना राजनीतिक कार्यालय बना लिया. लंबे समय तक कोर्ट में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और संपत्ति कुर्की का आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद उन्हें शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) की रात उनके मंदिरी स्थित आवास से हिरासत में लिया गया. फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं और आज उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने 31 साल पुराने एक धोखाधड़ी और संपत्ति विवाद के मामले में गिरफ्तार किया है. यह मामला वर्ष 1995 का है, जिसमें उन पर आरोप है कि उन्होंने पटना के गर्दनीबाग (पुनाईचक) इलाके में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति का मकान धोखे से किराए पर लिया और बाद में उसे खाली करने के बजाय उस पर कब्जा कर अपना राजनीतिक कार्यालय बना लिया. लंबे समय तक कोर्ट में पेश न होने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और संपत्ति कुर्की का आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद उन्हें शुक्रवार (6 फरवरी, 2026) की रात उनके मंदिरी स्थित आवास से हिरासत में लिया गया. फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं और आज उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है.







