बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद को लेकर जारी खींचतान के बीच शिवसेना और भाजपा के बीच आज अहम बातचीत होने जा रही है. इस बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि महायुति गठबंधन जनादेश का सम्मान करेगा और मुंबई समेत जहां-जहां दोनों दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा है, वहां मेयर भी महायुति का ही होगा. डिप्टी सीएम शिंदे ने कहा कि बीएमसी में मेयर महायुति से ही बनेगा और भाजपा के साथ किसी तरह का विवाद नहीं है. पार्टी सूत्रों ने बताया कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी समारोह की शुरुआत से पहले गतिरोध सुलझाने के लिए शिंदे दिल्ली भी जा सकते हैं. इसी क्रम में शिवसेना और भाजपा नेताओं के बीच मंगलवार 20 जनवरी 2026 को बैठक प्रस्तावित है, जो बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद दोनों दलों की पहली औपचारिक बातचीत होगी. इस बैठक में शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले, भाजपा मुंबई अध्यक्ष आमित सताम, भाजपा पार्षद प्रभाकर शिंदे और शिवसेना नेता शीतल म्हात्रे के शामिल होने की संभावना है. उधर, भाजपा विधायक निरंजन दावखरे ने ठाणे महानगरपालिका में मेयर पद दो वर्षों तक भाजपा के पास रहने की जोरदार मांग की है, जिससे माहौल और गर्मा गया है. इसी दिन राज्य सरकार ने मेयर आरक्षण की लॉटरी को लेकर अधिसूचना जारी की, जो 22 जनवरी को शहरी विकास विभाग द्वारा कराई जाएगी. सूत्रों के मुताबिक, मेयर चुनाव 31 जनवरी को होने की संभावना है.
एकनाथ शिंदे का क्या है पक्ष?
एकनाथ शिंदे ने नई राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि 2019 की तरह जनादेश का अपमान कर सरकार बनाने का रास्ता नहीं अपनाया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हम जनता के फैसले का सम्मान करते हैं. लोकसभा, विधानसभा और नगर निकाय चुनाव बालासाहेब ठाकरे के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लड़े गए हैं. जहां-जहां महायुति ने साथ चुनाव लड़ा है, वहां मेयर भी महायुति का ही होगा. हमारी लड़ाई कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि मुंबई के विकास के लिए है.’ शिंदे ने शिवसेना पार्षदों के होटल में ठहरने को लेकर कहा कि यह नियमित बैठक थी, जिसमें उन्हें आगामी पांच वर्षों की रणनीति और जिम्मेदारियों के बारे में मार्गदर्शन दिया गया. उन्होंने दोहराया कि शिवसेना और भाजपा ने बीएमसी चुनाव साथ मिलकर लड़े हैं और ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर जैसे नगर निकायों में भी महायुति का ही मेयर बनेगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर कार्यकर्ताओं की यह भावना हो सकती है कि मेयर शिवसेना से बने, जिस पर चर्चा की जाएगी. इस बीच शिवसेना (उद्धव ठाकरे), कांग्रेस और अन्य दलों द्वारा भी बुधवार को अपने-अपने गुट पंजीकृत कराने की संभावना है. ऐसे में आने वाले दिनों में मुंबई और अन्य नगर निगमों में सत्ता संतुलन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने की उम्मीद है.
…तो मामला हो जाएगा और पेचीदा
यदि कोटा ड्रॉ के बाद मेयर का पद एसटी (अनुसूचित जनजाति) के लिए आरक्षित होता है, तो यह एक अजीब स्थिति पैदा कर सकता है. नई सदन में केवल शिवसेना (यूबीटी) के पास ही एसटी आरक्षित वार्डों से चुने गए पार्षद हैं. दो वार्ड (नंबर 53 और नंबर 121) एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे और दोनों में यूबीटी सेना ने जीत दर्ज की. वार्ड 53 से जितेंद्र वाल्वी ने शिंदे नेतृत्व वाली सेना के अशोक खांडवे को हराया, जबकि वार्ड 121 में प्रियदर्शिनी ठाकरे ने शिंदे सेना की प्रतिमा खोपड़े को पराजित किया. हालांकि, नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि स्थिति इतनी अस्पष्ट नहीं है. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिसूचना के मुताबिक यदि किसी उम्मीदवार के पास वैध एसटी प्रमाणपत्र हो, तो वह आरक्षित वार्ड से निर्वाचित न होने के बावजूद मेयर चुनाव लड़ सकता है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा के पास ऐसा कोई पार्षद है या नहीं.







