अमेरिकी सेना की ओर से वेनेजुएला में सीधे सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने दुनिया को हिला दिया है. यह सिर्फ एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विशेषज्ञों के मुताबिक यह कदम चीन को रणनीतिक संदेश देने के लिए उठाया गया है. संदेश साफ है- पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका अपने प्रभाव को चुनौती देने वाली किसी भी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा. वेनेजुएला लंबे समय से चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के लिए लैटिन अमेरिका में एक अहम रणनीतिक ठिकाना रहा है. मादुरो सरकार को चीन का खुला समर्थन मिला, जिसने अरबों डॉलर के कर्ज के बदले तेल खरीद की है. अब उसी शासन को हटाकर अमेरिका ने चीन को यह जता दिया है कि उसका ‘बैकयार्ड’ किसी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी के लिए खुला नहीं है.
चीन को क्या चेतावनी दे रहा अमेरिका?
यह कार्रवाई सिर्फ मादुरो को हटाने तक सीमित नहीं है. यह चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उसकी बेल्ट एंड रोड रणनीति पर सीधा प्रहार है. वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा वामपंथी और चीन समर्थक शासन था. उसे गिराकर अमेरिका ने पूरे क्षेत्र में चीन के राजनीतिक नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश की है. अमेरिका के हमले से कुछ घंटे पहले ही चीन के दूत निकोलस मादुरो से मिले थे.
वेनेजुएला पर राज करेगा अमेरिका?
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘अमेरिका वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक सुरक्षित संक्रमण नहीं हो जाता’. ट्रंप का यह बयान इस बात का संकेत है कि यह केवल सैन्य ऑपरेशन या तख्तापलट नहीं बल्कि लंबे समय के लिए यहां नियंत्रण की योजना है. कई रणनीतिक विश्लेषकों ने इसे खुले तौर पर ‘नग्न साम्राज्यवाद’ करार दिया है. हालांकि अमेरिका के पूर्व राजदूत चार्ल्स शापिरो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से वेनेजुएला को खुद चलाने की बात करना और उसे जमीन पर लागू करना बेहद जटिल होगा. उनका कहना है कि अभी भी देश में लगभग 20 फीसदी आबादी ऐसी है जो मादुरो का समर्थन करती है.
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश है और चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है. बीजिंग ने दशकों में लगभग 60 अरब डॉलर का कर्ज दिया, जिसकी भरपाई तेल से होनी थी. अब जब अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला की तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को दोबारा खड़ा करने का अधिकार मिलने की बात हो रही है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा सीधे अमेरिकी नियंत्रण के दायरे में आ सकती है. हालांकि ट्रंप ने शनिवार को ही कहा कि चीन को तेल आपूर्ति जारी रहेगी, लेकिन विशेषज्ञ इसे स्थायी समाधान नहीं मानते. यह आपूर्ति अब ‘अमेरिका की कृपा’ पर निर्भर होगी, जिसे भविष्य में दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे चीन को ईरान, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों की ओर झुकना पड़ेगा, जिससे लागत और रणनीतिक जोखिम दोनों बढ़ेंगे.
निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर क्या बोला चीन?
चीन ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की है. चीन का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और लैटिन अमेरिका की स्थिरता को खतरे में डालता है. चीन ने अमेरिका से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है. रूस, ईरान, क्यूबा और ब्राजील जैसे देशों ने भी अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक और अवैध बताया है, जबकि कुछ पश्चिमी देशों ने मादुरो शासन के अंत को सकारात्मक बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर चिंता भी जताई. उत्तर कोरिया ने तो मिसाइल टेस्ट करके इशारों ही इशारों में अमेरिका को कड़ा मैसेज दिया है.
आगे क्या होगा?
अमेरिका की ओर से यह पहली बार नहीं है, जब किसी देश पर हमला हुआ हो. इराक और अफगानिस्तान में पहले भी वह दखल दे चुका है. अफगानिस्तान में तो लगभग 20 साल तक अमेरिकी सेना रही. ट्रंप ने कहा है कि सेना भी वेनेजुएला में भेजा जा सकता है. अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाई को लेकर विरोध तेज हो रहा है और इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं.







