स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड यानी शिक्षा लोन ने बिहार के गरीब छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा की राह आसान बना दी। मगर राज्य सरकार ने बिहार के छात्रों के लिए इसे ब्याज मुक्त कर दिया, जिनसे इनको बड़ी राहत मिली है।
साथ ही मूलधन चुकाने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है। इससे वर्तमान में शिक्षा लोन लेने वाले चार लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को तत्काल फायदा मिल गया है।
राज्य सरकार ने विधानसभा चुनाव आचार संहिता लागू होने के पहले अक्तूबर में शिक्षा ऋण को ब्याज मुक्त करने का निर्णय लिया था। इसके बाद बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मार्गदर्शिका में संशोधन किया गया है। संशोधन के बाद चार लाख रुपये तक शिक्षा ऋण अब सभी आवेदकों के लिए ब्याज मुक्त हो गया है।
जिन आवेदकों ने पहले से शिक्षा ऋण लिया है या वर्तमान में चुका रहे हैं, उनका शेष ऋण (बकाया राशि) भी ब्याज मुक्त हो जाएगा। शिक्षा ऋण लेने वाले छात्र की मृत्यु कोर्स अवधि में होने पर ऋण (मूलधन और ब्याज सहित) माफ हो जाएगा।
शिक्षा ऋण को ब्याज मुक्त करने से पहले चार लाख तक के शिक्षा लोन पर छात्रों को चार प्रतिशत ब्याज देना पड़ता था। महिला, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर आवेदकों को यह लोन एक प्रतिशत ब्याज पर दिया जाता था। मगर अब वर्तमान व्यवस्था के तहत सभी वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा लोन ब्याज मुक्त हो गया है।
दो लाख का लोन 84 महीने में चुकाना होगा
नई व्यवस्था के तहत शिक्षा लोन को ब्याज मुक्त करने के बाद एक और सुविधा भी विद्यार्थियों को मिली है। इसके तहत अब दो लाख रुपये तक का लोन अधिकतम 84 मासिक किस्तों यानी सात वर्षों में चुकाया जाएगा।
पहले 60 किस्त तय थी। दो लाख से अधिक का लोन अधिकतम 120 मासिक किस्तों यानी 10 वर्षों में चुकाया जाएगा। पहले यह सीमा 84 किस्त थी।
एक अप्रैल 2018 से बिहार राज्य शैक्षिक वित्त निगम के माध्यम से सरकार खुद शिक्षा लोन दे रही है। मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी संस्थानों में नामांकित बिहार के छात्र-छात्राओं को कॉलेज फीस के लिए शिक्षा लोन दिया जाता है। शिक्षण शुल्क, लैपटॉप और हॉस्टल में रहने का खर्च सहित अधिकतम चार लाख रुपये लोन देने का प्रावधान है।
छात्राओं से अधिक लोन ले रहे छात्र
अब तक इस योजना का चार लाख 30 हजार विद्यार्थियों ने लाभ लिया है। इनमें तीन लाख छात्र हैं, जबकि एक लाख 29 हजार छात्राएं हैं। इसी प्रकार कुल लाभुकों में एक लाख 74 हजार पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी हैं। इनमें छात्राओं की संख्या 53 हजार हैं, जबकि छात्र एक लाख 20 हजार हैं। सामान्य वर्ग के कुल एक लाख 17 हजार विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या 35 हजार और छात्रों की संख्या 81 हजार है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लाभुकों की कुल संख्या 76 हजार है। इनमें छात्रों की संख्या 52 हजार, छात्राओं की संख्या 23 हजार है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेने में अनुसूचित जाति के विद्यार्थी पीछे हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के 43 हजार विद्यार्थियों में 30 हजार छात्र और 13 हजार छात्राएं हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग के कुल 3978 विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिला है। इनमें छात्रों की संख्या 2773, जबकि 1119 छात्राएं हैं। इस योजना के लिए चार लाख 30 हजार 941 छात्र-छात्राओं के लिए 13 हजार 67 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इनमें आठ हजार 47 करोड़ की राशि दी जा चुकी है।







