भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर विजय कुमार मल्होत्रा का मंगलवार को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे 94 साल के थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1931 को लाहौर शहर में हुआ था। वीके मल्होत्रा दिल्ली के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद और सांसद रह चुके हैं। कुछ दिनों से वह एम्स में भर्ती थे। जहां उनका इलाज चल रहा था और आज सुबह लगभग 6 बजे उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। पीएम मोदी ने उनके घर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने दी जानकारी
इस मौके पर दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि अत्यंत दुख के साथ यह बताना पड़ रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली भाजपा के प्रथम अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा जी का आज प्रातः आकस्मिक निधन हो गया है। वह 94वें वर्ष के थे।
PM बोले- दिल्ली में भाजपा को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका
मोदी ने X पर कहा, ‘विजय कुमार मल्होत्रा एक महान नेता थे जिन्हें जन मुद्दों की गहरी समझ थी। उन्होंने दिल्ली में हमारी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें संसदीय मामलों में उनके हस्तक्षेप के लिए भी याद किया जाता है। उनका निधन बहुत दुखद है।’
मल्होत्रा 2008 में शीला दीक्षित के खिलाफ CM दावेदार थे विजय कुमार मल्होत्रा 2004 के लोकसभा चुनावों में, दिल्ली की संसदीय सीट जीतने वाले एकमात्र भाजपा उम्मीदवार थे, जबकि कांग्रेस ने बाकी छह सीटों पर जीत हासिल की थी।
2008 के चुनाव में उन्हें पार्टी के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में भी पेश किया गया था। हालांकि, उस साल शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा था।
इसके बाद मल्होत्रा दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। मल्होत्रा को दिल्ली में भाजपा का अस्तित्व बचाए रखने का श्रेय दिया जाता है। लगभग 45 साल के राजनीतिक जीवन में वे अपने बेदाग छवि के लिए जाने जाते थे।
आगे कहा कि प्रो. विजय मल्होत्रा जी का जीवन सादगी एवं जन सेवा को समर्पण की मिसाल रहा, उन्होने दिल्ली में संघ की विचारधारा के विस्तार के लिए जनसंघ काल से बहुत काम किया। उनका जीवन हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को सदैव प्रेरणा देता रहा है और देता रहेगा। वीके मल्होत्रा के निधन पर पीएम मोदी, सीएम रेखा से लेकर कई भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया।
वाजपेयी-आडवाणी की साथ
मल्होत्रा जी की राजनीतिक शुरुआत 1960 के दशक में भारतीय जनसंघ से हुई, जब उन्होंने दिल्ली में संघ की विचारधारा को जमीनी स्तर पर फैलाया। वे वह आरएसएस छोड़कर जनसंघ में शामिल हुए, जहां वाजपेयी की काव्यात्मक दृष्टि और आडवाणी की संगठनात्मक कुशलता के बीच एक मजबूत स्तंभ बने।
एक यादगार घटना 1960-70 के दशक की है, जब दिल्ली मेट्रोपोलिटन कौंसिल से जुड़े मल्होत्रा जी के सरकारी बंगले में आडवाणी जी फ्रंट ऑफिस में बैठते थे। उनके घर पर हुई एक महत्वपूर्ण मीटिंग में केदारनाथ साहनी और मदनलाल खुराना के साथ डीएमसी एल्डरमैन की लिस्ट तैयार की गई, जिसने आडवाणी के राजनीतिक उदय की नींव रखी।
1980 में भाजपा के गठन में वे संस्थापक सदस्य थे और दिल्ली इकाई के पहले अध्यक्ष बने। राम जन्मभूमि आंदोलन में आडवाणी के नेतृत्व में सक्रिय योगदान दिया, जबकि वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय एकता और विकास योजनाओं में सहयोग किया।
युवा अवस्था में तीनों ने घंटों चर्चा, फिल्म देखना, चाट खाना और होली मनाने जैसे सामाजिक पल साझा किए। लोकसभा में उपनेता के रूप में उन्होंने भाजपा की विपक्षी भूमिका को प्रभावी बनाया, विशेषकर 2004 के बाद, जहां सार्वजनिक लेखा समिति के अध्यक्ष भी रहे।
जीवन के अन्य बहुआयामी पहलू
राजनीति के अतिरिक्त, मल्होत्रा जी हिंदी साहित्य में पीएचडी धारक थे और दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़कर युवाओं को प्रेरित किया। खेल प्रशासन में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में 1974 के एशियाई खेलों में भारतीय दल का नेतृत्व किया, तथा आर्चरी और चेस फेडरेशन को मजबूत बनाया।
सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल को बढ़ावा दिया, जिससे लाखों युवाओं को दिशा मिली।
प्रो. मल्होत्रा जी का निधन हमें याद दिलाता है कि सच्ची विरासत संगठन निर्माण, वैचारिक संघर्ष और सामाजिक दायित्वों में निहित होती है। वाजपेयी-आडवाणी की त्रयी में वे एक अनमोल कड़ी थे, जिनकी सादगी और समर्पण की मिसाल दी जाती रहेगी।







