बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियों जोरों है। इस बीच खबर है कि महागठबंधन ने सीट बंटवारे को लेकर बड़ी सहमति बना ली है। राजद और कांग्रेस ने तय किया है कि एनडीए से मुकाबला करने के लिए दोनों पार्टियां कुछ सीटों का त्याग करेंगी, ताकि नए साथियों को भी चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिल सके। बता दें, बीते दिनों तेजस्वी यादव के आवास पर महागठबंधन की बैठक हुई थी।
महागठबंधन में सीट बंटवारे का क्या होगा फॉर्मूला?
सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे में सबसे बड़ा हिस्सा राजद को मिलने वाला है। अनुमान है कि उसे करीब 135-136 सीटें मिलेंगी। इनमें से लगभग 10-11 सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा और रालोजपा (पारस गुट) को दी जाएंगी। कांग्रेस को 50-52 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, तीन वामदलों को मिलाकर लगभग 34 सीटें दिए जाने की चर्चा है। मुकेश सहनी की VIP पार्टी को 18-20 सीटें मिलने की संभावना है। हालांकि, सहनी पहले 60 सीटों की मांग कर चुके हैं लेकिन अब वे महागठबंधन की जीत के लिए समझौते पर तैयार बताए जा रहे हैं।
महागठबंधन के दलों में कैसे बनी सहमति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर पहले काफी खींचतान चली। कांग्रेस और वीआईपी जैसे दल मंचों से बड़ी हिस्सेदारी की मांग करते रहे थे। लेकिन आपसी तालमेल से ही महागठबंधन, भाजपा और एनडीए के मजबूत नेटवर्क और वोट बैंक का मुकाबला कर पाएगा। ये बात भी महागठबंधन के दल समझत हैं। यही वजह है कि महागठबंधन ने सीट बंटवारे में समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
आधिकारिक घोषणा 15 सितंबर के बाद
सूत्रों के मुताबिक, सीटों की आधिकारिक घोषणा 15 सितंबर के बाद हो सकती है। अगर इससे पहले महागठबंधन में कोई विवाद नहीं उभरता है तो।







