चीन एक बार फिर से अपनी चालबाजी कर रहा है. इस बार उसने बांग्लादेश को जाल में फंसाया है. चीन भारत के बेहद संवेदनशील क्षेत्र चिकन नेक के स्थित लालमोनिरहाट में बांग्लादेश के द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एयर बेस पर बुरी नजर डालकर बैठ गया है. यह एयरबेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास है. चिकन नेक पश्चिम बंगाल में 20 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है, जो कि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है.
चीन की द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एयर बेस पर बुरी नजर भारत के लिए चिंता का सबब बन सकती है. चीन ने 2018 की शुरुआत में लीलमोनिरहाट एयरबेस को लेकर दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने खुलकर बड़े पैमाने पर चीन का विरोध किया था. यह मामला तब कुछ समय के लिए थम गया था, हालांकि अब चीन एक बार फिर से नजर गड़ाए बैठा है.
शेख हसीना ने ठुकरा दिया था चीन का प्रस्ताव
शेख हसीना ने 2019 में बांग्लादेश के पहले विमानन विश्वविद्यालय के स्थापना की घोषणा की थी. उनका बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान एविएशन एंड एयरोस्पेस यूनिवर्सिटी का स्थाई परिसर लालमोनिरहाट में बनाना प्लान था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से काम धीमा पड़ गया था. इस मामले में चीन ने एंट्री मारी थी. उसने कर्ज के आधार पर वित्तीय मदद देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन कथित तौर पर शेख हसीना ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था.
भारत की चिंता बढ़ा सकती है चीन-बांग्लादेश की नजदीकी
चीन अब फिर से टांग अड़ाने की फिराक में है. मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली नई अंतरिम सरकार ने अपना रवैया बदल लिया है. यूनुस ने पद संभालते ही चीन का दौरा किया था और दोनों देशों के संबंध को मजबूत करने को लेकर चर्चा की थी. बांग्लादेश की चीन के साथ बढ़ती नजदीकी भारत की चिंता बढ़ा सकती है.







