नीतीश कुमार आगामी चुनावी वैतरणी पार करने को फिर एक बार आधी आबादी की गोद में हैं। नीतीश कुमार की चुनावी जीत और उनके यूएसपी बढ़ाने में आधी आबादी सहायक रही है। खास कर पंचायत चुनाव में आरक्षण और शराबबंदी नीतीश कुमार के ऐसे दो ट्रंप कार्ड रहे, जिस पर जातीय रंग बहुत ज्यादा नहीं चढ़े। सो, इस बार फिर नीतीश कुमार ने आधी आबादी पर दांव खेला है और उनकी दरबार में जाने की योजना भी बनाई है। आइए जानते हैं क्या है नीतीश कुमार की प्लानिंग और कैसे आधी आबादी को रंगेंगे चुनावी रंग में।
महिला संवाद के जरिए चुनावी अलख
मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘महिला संवाद’ अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी। पटना से सीएम नीतीश कुमार ने 50 प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रथ के जरिए महिला उन्मुखी कार्यक्रमों के बदौलत नीतीश नीत सरकार से जोड़ने की कवायद शुरू की जाएगी। कार्यक्रम का मूल ये रहा कि पहले दिन ही राज्य के 600 स्थानों पर महिला संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। अगले 60 दिनों में इस अभियान के तहत पूरे बिहार में 70,000 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
नीतीश के टारगेट पर ये महिलाएं
‘महिला संवाद’ अभियान के माध्यम से लगभग 2 करोड़ महिलाओं तक पहुंचने का लक्ष्य है। सीएम नीतीश का निशाना जीविका समूह की 1.35 लाख से अधिक महिलाएं हैं, जिसे अक्सर लोग नीतीश कुमार का चुनावी दूत मानते हैं। दरअसल, नीतीश सरकार का निशाना पूरी आधी आबादी है, जिसे चुनावी रूप से सक्रिय करना है। इसके लिए जरूरी है कि महिलाओं को राज्य सरकार की वैसी योजनाओं के बारे में याद दिलाया जाएगा, जिससे वे सीधे लाभांवित हुई हैं। मसलन, शराबबंदी, पंचायत चुनाव और नौकरी में आरक्षण, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, छात्रा पोशाक योजना, साइकिल योजना, जीविका जैसी कई योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
कुछ ऐतिहासिक फैसले पर नजर
- 73वें संविधान संशोधन (1992) ने पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। मगर, बिहार सरकार ने 2006 में बढ़ाकर 50% कर दिया। पंचायती राज और निकाय के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना। महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में भी सहायक साबित हुआ।
- नीतीश कुमार का दूसरा बड़ा ऐतिहासिक फैसला था सरकारी नौकरी में आरक्षण देने का। नीतीश कुमार ने सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण देकर इतिहास रच डाला।
- शराबबंदी का निर्णय नीतीश कुमार ने यात्राओं, सभाओं या जन संपर्क के दौरान मिली महिलाओं के कहने पर लगाया। जब इस शराबबंदी की काफी आलोचना हुई, तब भी नीतीश कुमार ने महिलाओं की राय ली और शराबबंदी लगे रहने दिया।
- नीतीश कुमार की साइकिल योजना तो शिक्षा जगत में क्रांति ही ला दी थी। स्कूल जाने वाली लड़कियों को मुफ्त साइकिल देने की योजना के साथ-साथ स्नातक करने वाली बालिकाओं को 50 हजार रुपए देने वाली योजनाओं ने कई लड़कियों का भविष्य संवार दिया।
- इन सबों के लिए नीतीश कुमार एक व्यक्तित्व के रूप में उभरे। वर्तमान सरकार इस महिला संवाद से लाभान्वित महिलाओं को प्रेरित करना चाहती है और विकास की सरकार का पैरोकार भी बनाना चाहती है ताकि जनता के बीच वर्तमान सरकार की छवि दुरुस्त हो।
वहीँ महिला संवाद Vs महिला की बात पर कांग्रेस और सत्ताधारी जेडीयू में टक्कर दिख रही है। कांग्रेस ने बिहार में महिलाओं से संपर्क साधने और उनकी चिंताओं को साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल करने के लिए ‘महिला की बात, कांग्रेस के साथ’ अभियान शुरू किया। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस प्रमुख अलका लांबा ने कहा कि ये अभियान मई के अंत तक चलेगा। महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ग्रामीण इलाकों का दौरा करेंगी, महिलाओं से संवाद करेंगी और उन्हें प्रभावित करने वाले मुद्दों पर उनसे बातचीत करेंगी। उनके सुझावों को पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल किया जाएगा।
‘महिला की बात, कांग्रेस के साथ’ अभियान शुरू
कांग्रेस पार्टी ने यहां महिला कार्यकर्ताओं के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र भी शुरू किया है, जिन्हें अभियान का प्रसार करने के लिए लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों, प्रखंडों और जिलों में तैनात किया जाएगा। अलका लांबा ने कहा कि पूरे बिहार में महिलाएं केंद्र और राज्य की राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) सरकारों से निराश हैं। इस बार, वे आगामी चुनावों में राजग की करारी हार सुनिश्चित करेंगी। इस अभियान को सोशल मीडिया पर भी विभिन्न हैशटैग के माध्यम से प्रचारित किया जाएगा।
अलका लांबा ने कहा कि इसमें कोई शक-शुबहा नहीं है कि हम बिहार में सरकार बना रहे हैं। महागठबंधन को कोई नहीं रोक सकता। अलका लांबा ने महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और महिला सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों की अनदेखी करने के लिए राजग की आलोचना करते हुए कहा कि राजग नेताओं को आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुख्य मुद्दों की जरा भी परवाह नहीं है।
बिहार में महिला संवाद Vs महिला की बात
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘महिला संवाद’ अभियान पर अलका लांबा ने कहा कि महिलाएं करीब एक दशक से इस तरह के संवाद का इंतजार कर रही थीं। जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो उन्हें अचानक महिला मतदाताओं की याद आ गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘महिला संवाद’ अभियान भी शुक्रवार को ही शुरू हुआ। अलका लांबा ने कहा कि जब राज्य में महागठबंधन की सरकार बनेगी तो हम जीविका दीदियों का मानदेय बढ़ाएंगे, उनकी सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाएंगे और उन्हें पेंशन भी देंगे।
अलका लांबा ने कहा कि गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मासिक धर्म के दौरान सैनेटरी पैड की जगह कपड़े का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं, जिससे वे कई बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। बिहार की शराबबंदी नीति पर उन्होंने कहा कि यह केवल कागजों पर ही है। नकली शराब अब भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध है और इसकी वजह से कई लोगों की जान गई है।







