टैरिफ के मुद्दे पर दुनिया की दो सबसे बड़ी ताक़तों अमेरिका और चीन के बीच ज़बरदस्त व्यापार युद्ध शुरू हो गया है। चीन ने अमेरिका पर टैरिफ़ को बढ़ाकर 125 प्रतिशत कर दिया। अब अमेरिका चीन से आने वाली वस्तुओं पर 145 प्रतिशत टैरिफ वसूल रहा है। चीन ने दुनिया के बाक़ी देशों से अपील की कि वो ट्रंप की दादागीरी से मुक़ाबला करने के लिए उसके साथ आ जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और अमेरिका का टैरिफ युद्ध भारत के लिए अच्छा मौक़ा है। भारत के पास इतनी क्षमता है कि वह अमेरिका को कुछ सामानों की सप्लाई करने में चीन की जगह ले सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, गारमेंट और खिलौनों के सेक्टर में जगह बनाने का ये भारत के लिए ये सुनहरा अवसर है। टैरिफ वॉर से बड़ी बड़ी कंपनियां कितनी परेशान हैं, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि ट्रंप का टैरिफ प्लान लागू होने से पहले एपल ने 600 टन iphone, यानी लगभग 15 लाख मोबाइल फोन के सेट,भारत से अमेरिका भेजे। इसके लिए स्पेशल कार्गो प्लेन भारत भेजा। सरकार से सिर्फ छह घंटे में कस्टम क्लियरेंस की अनुमति ली ताकि, टैरिफ लागू होने से पहले ज़्यादा से ज़्यादा सामान अमेरिका भेजा जा सके। एपल अमेरिका में जितने फ़ोन बेचता है, उसके 20 परसेंट फोन भारत में बनते हैं, बाक़ी के 80 परसेंट चीन से आते हैं। एपल ने भारत में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी 20 परसेंट बढ़ा दी है और भारत में बने ज़्यादा से ज़्यादा फ़ोन अमेरिका ले जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अमेरिका के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौता कर लेना चाहिए ताकि भारत से होने वाले निर्यात को रफ़्तार मिल सके, हालांकि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ़ किया कि भारत बंदूक की नोंक पर किसी से व्यापार समझौता नहीं करता, जब तक भारतीय कारोबारियों के हित सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक व्यापार समझौता नहीं होगा। सवाल ये है कि टैरिफ पर ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच जो जंग जारी है, क्या इसका फायदा भारत को होगा? क्या भारत में स्मार्टफोन, AC, TV, फ्रिज सस्ते हो जाएंगे? ट्रेड एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका के दबाव की वजह से भारत को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट एक्सपोर्ट करने वाली चीनी कंपनियां अपनी कीमतें 5 परसेंट तक कम करने के लिए मजबूर हो जाएंगी। भारत में इस्तेमाल होने वाले 75 प्रतिशत इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट्स चीन में बनते हैं, इन दोनों बातों को जोड़कर देखा जाए तो साफ है कि भारत में स्मार्टफोन, AC, TV, फ्रिज जैसी सारी इलेक्ट्रॉनिक चीजों के दाम कम होंगे जो हमारे देश के उपभोक्ताओं के लिए फायदे का सौदा है।
Apple भारत से iPhone क्यों भेज रहा है?
जानकारों का कहना है कि अमेरिका में iPhone की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि Apple अभी तक चीन से बहुत ज्यादा माल मंगवाता है। और चीन से आने वाले माल पर ट्रंप सरकार ने 125% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत से आने वाले iPhones पर सिर्फ 26% टैरिफ है। टैरिफ में इतने बड़े अंतर का असर वहां के प्रोडक्ट पर भी पड़ेगा। ऐसे में भारत से सामान लेना चीन के मुकाबले ज्यादा किफायती है। फिलहाल ट्रंप ने चीन को छोड़कर भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ लागू किए जाने पर 90 दिन की रोक लगाई है।
सरकार भी कर रही है ऐपल की मदद?
रिपोर्ट्स की मानें तो ऐपल ने भारत में प्रोडक्शन बढ़ा दिया है ताकि अमेरिका में स्टॉक जमा किया जा सके। ऐसा ट्रंप के टैरिफ से बचने के लिए किया गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ऐपल ने चेन्नई एयरपोर्ट पर कस्टम क्लियरेंस में लगने वाला समय 30 घंटे से घटाकर 6 घंटे करने की मांग की थी और भारत सरकार ने अधिकारियों से ऐपल कंपनी की मदद करने को कहा है।
Apple भारत से iPhone क्यों भेज रहा है?
जानकारों का कहना है कि अमेरिका में iPhone की कीमतें बढ़ सकती हैं क्योंकि Apple अभी तक चीन से बहुत ज्यादा माल मंगवाता है। और चीन से आने वाले माल पर ट्रंप सरकार ने 125% टैरिफ लगाया है, जबकि भारत से आने वाले iPhones पर सिर्फ 26% टैरिफ है। टैरिफ में इतने बड़े अंतर का असर वहां के प्रोडक्ट पर भी पड़ेगा। ऐसे में भारत से सामान लेना चीन के मुकाबले ज्यादा किफायती है। फिलहाल ट्रंप ने चीन को छोड़कर भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ लागू किए जाने पर 90 दिन की रोक लगाई है।
सरकार भी कर रही है ऐपल की मदद?
रिपोर्ट्स की मानें तो ऐपल ने भारत में प्रोडक्शन बढ़ा दिया है ताकि अमेरिका में स्टॉक जमा किया जा सके। ऐसा ट्रंप के टैरिफ से बचने के लिए किया गया है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ऐपल ने चेन्नई एयरपोर्ट पर कस्टम क्लियरेंस में लगने वाला समय 30 घंटे से घटाकर 6 घंटे करने की मांग की थी और भारत सरकार ने अधिकारियों से ऐपल कंपनी की मदद करने को कहा है।







