अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित बहुत से देशों को भारी राहत देते हुए अगले 90 दिनों के लिए जवाबी (reciprocal) टैरिफ पर रोक लगा दी लेकिन उसके साथ ही चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। लक्ष्य था, चीन को दूसरे देशों से अलग-थलग करना। इसके फौरन बाद अमेरिकी और एशियाई शेयर बाज़ारों में उछाल आया। ट्रंप ने X सोशल मीजिया हैंडल पर लिखा, ‘मुझे उम्मीद है कि निकट भविष्य में चीन को इस बात का अहसास हो जाएगा कि अमेरिका और दूसरे देशों को लूटने की नीति न तो अब स्वीकार्य होगी और न ही ये टिकाऊ होगी।’ ट्रंप की नीयत और नीति दोनों को समझने में कोई परेशानी नहीं है। ट्रंप पक्के बिजनेसमैन हैं, डील मेकर हैं। वो सिर्फ अमेरिका का फायदा देख रहे हैं। ट्रंप मानते हैं कि बरसों तक चीन ने अमेरिका को लूटा, अब उनकी बारी है और वो हिसाब बराबर करेंगे। यूरोप और दुनिया के बाकी देश ट्रंप से टकराना नहीं चाहते, उनकी अमेरिका पर काफी निर्भरता है। इसीलिए वो बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहते हैं, लेकिन ट्रंप ने उनका मजाक उड़ाने में भी देर नहीं लगाई। लेकिन ये ट्रंप का स्वभाव है, इसीलिए किसी को आश्चर्य नहीं होता। जहां तक भारत का सवाल है, हमारी सरकार ने अमेरिका से ट्रेड और टैरिफ को लेकर बहुत पहले बात शुरू कर दी थी। ट्रंप के टैरिफ का अंदाजा पहले ही लगा लिया था। इसीलिए बाकी देशों के मुकाबले भारत बेहतर स्थिति में है। चीन से अमेरिका के टकराव का फायदा भी भारत को होगा। इसके अलावा बांग्लादेश, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों पर ट्रंप ने भारत के मुकाबले ज्यादा टैरिफ लगाया है। इसका फायदा भी भारत की अर्थव्यवस्था को हो सकता है।
अमेरिका और चीन के बीच एक बड़ा झगड़ा शुरू हो गया है. यह झगड़ा व्यापार युद्ध है. अमेरिका ने चीन से आने वाली चीजों पर बहुत बड़ा टैक्स लगा दिया है. इसे टैरिफ कहते हैं. यह टैरिफ 145% का है. इसका मतलब है कि अगर कोई चीज चीन से अमेरिका में 100 रुपये की आती है, तो उस पर 145 रुपये का टैक्स लगेगा. यानी वह चीज अब 245 रुपये की हो जाएगी. यह बहुत बड़ा टैक्स है. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने यह फैसला लिया. वह कहते हैं कि चीन गलत तरीके से व्यापार कर रहा है. इसलिए यह टैक्स लगाया गया है. यह टैक्स 9 अप्रैल से शुरू हो गया है.
अमेरिका ने क्यों लगाया टैक्स?
अमेरिका का कहना है कि चीन सही तरीके से व्यापार नहीं कर रहा. अमेरिका कहता है कि चीन अपनी मुद्रा (पैसे) को कमजोर करता है, दूसरों की चीजें चुराता है, और अपनी कंपनियों को गलत तरीके से मदद देता है. इससे अमेरिका को नुकसान हो रहा है. इसलिए अमेरिका ने यह टैक्स लगाया. यह टैक्स कई चीजों पर है जैसे टीवी, कपड़े, मशीनें, गाड़ियों के पार्ट्स और घर की चीजें. अमेरिका चाहता है कि चीन अपने तरीके बदले. ट्रंप कहते हैं, ‘हम चीन के फोन का इंतजार कर रहे हैं.’ यानी वह चाहते हैं कि चीन बात करे और कोई समझौता करे.
चीन ने क्या कहा?
चीन को यह टैक्स बिल्कुल पसंद नहीं आया. चीन की सरकार ने कहा कि यह गलत है. चीन ने कहा, ‘अमेरिका बहुत दबाव बना रहा है. यह धमकी देने जैसा है. हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे.’ चीन ने कहा कि वह भी जवाब देगा. यानी चीन भी अमेरिका से आने वाली चीजों पर टैक्स लगा सकता है. चीन का कहना है, ‘हम अपने हक के लिए लड़ेंगे. कोई भी हमारा विकास रोक नहीं सकता.’ चीन ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका बात करना चाहता है, तो उसे बराबरी और सम्मान दिखाना होगा. नहीं तो यह युद्ध चलता रहेगा.
दुनिया पर क्या असर होगा?
यह व्यापार युद्ध सिर्फ अमेरिका और चीन तक नहीं है. इससे पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा. जब चीन की चीजें अमेरिका में महंगी होंगी, तो वहाँ के लोगों को ज्यादा पैसे देने होंगे. अमेरिका की कंपनियों को भी नुकसान होगा क्योंकि उन्हें चीजें बनाने के लिए चीन से सामान चाहिए. अगर सामान महंगा होगा, तो चीजें बनाना भी महंगा हो जाएगा. इससे दुनिया की सप्लाई चेन (सामान की सप्लाई करने का तरीका) खराब हो सकती है. बाजार में भी डर फैल गया है.अमेरिका का शेयर बाजार (डाउ जोन्स) नीचे चला गया जब यह खबर आई.
जापान ने क्या कहा?
जापान ने भी इस बारे में बात की. जापान कहता है कि चीन उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती है. जापान को लगता है कि चीन समुद्र में (ईस्ट और साउथ चाइना सी) गलत कर रहा है. जापान को यह भी डर है कि चीन और रूस मिलकर सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं. जापान अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है जो चीन में हैं. लेकिन जापान यह भी चाहता है कि चीन के साथ उसके रिश्ते अच्छे रहें. चीन ने जापान की इन बातों को गलत बताया. चीन ने कहा,’जापान हमें बदनाम कर रहा है. हम ऐसा नहीं चाहते. हमारे रिश्ते अच्छे होने चाहिए.’
यूक्रेन के बारे में चीन की बात
कुछ लोग कहते हैं कि चीन के लोग यूक्रेन में रूस की सेना के साथ लड़ रहे हैं. चीन ने कहा, “हम इसकी जांच कर रहे हैं. हम अपने लोगों से कहते हैं कि जंग वाली जगहों से दूर रहें. हम किसी जंग में हिस्सा नहीं लेना चाहते.” चीन का कहना है कि वह यूक्रेन की समस्या को बातचीत से सुलझाना चाहता है.
अमेरिका का चीन पर इल्जाम
अमेरिका ने कहा कि चीन गलत तरीके से उसके लोगों को अपने यहां काम पर रख रहा है. अमेरिका का कहना है कि चीन जासूसी कर रहा है. अमेरिका ने यह भी कहा कि चीन पनामा नहर पर कब्जा करना चाहता है. चीन ने इन बातों को गलत बताया. चीन ने कहा, “अमेरिका हमें बदनाम कर रहा है. यह उसकी दादागिरी है.
भारत के लिए क्या मतलब?
यह युद्ध भारत के लिए अच्छा और बुरा दोनों हो सकता है. अच्छा यह कि भारत अब अमेरिका को ज्यादा चीजें बेच सकता है. जैसे कपड़े, दवाइयाँ और इलेक्ट्रॉनिक सामान. चीन की चीजें महंगी होंगी, तो भारत की चीजें सस्ती लगेंगी. इससे भारत को फायदा होगा. लेकिन मुश्किल यह है कि भारत को कुछ सामान चीन से लेना पड़ता है. अगर वह महंगा होगा, तो भारत में चीजें बनाना भी महंगा हो जाएगा. सप्लाई चेन में दिक्कत भी हो सकती है. फिर भी, कुछ कंपनियाँ अब चीन की जगह भारत में फैक्ट्री लगा सकती हैं. इससे भारत को पैसा मिलेगा.
अमेरिका और चीन का यह व्यापार युद्ध बहुत बड़ा है. इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा. चीन ने कहा कि वह हार नहीं मानेगा और जवाब देगा. इससे यह युद्ध लंबा चल सकता है. भारत जैसे देशों के लिए यह मौका है कि वह अपनी चीजें बेचे और पैसा कमाए. लेकिन सप्लाई चेन की दिक्कत भी होगी. जापान और यूक्रेन की बातें भी इसे और मुश्किल बना रही हैं.







