पटना से सटे बाढ़ अनुमंडल के मोकामा प्रखंड के नौरंगा-जलालपुर गांव में मोकामा अनंत सिंह समर्थक और सोनू-मोनू गैंग में जमकर फायरिंग मामले में देर रात 3 केस दर्ज किया गया है. जानकारी के अनुसार एक केस पुलिस ने अनंत सिंह और सोनू मोनू और दोनों के समर्थकों पर किया है. वहीं दूसरा केस सोनू-मोनू की मां ने अनंत सिंह और उसके समर्थक पर किया है. इसके तीसरा केस मुकेश ने सोनू-मोनू और उसके समर्थकों पर किया है. ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग के अनुसार ये तीनों केस पंचमाला थाना में किए गए हैं.
बता दें, मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह बुधवार को नौरंगा जलालपुर के दौरे पर थे. इस दौरान उनके समर्थकों और सोनू-मोनू गैंग के बीच फायरिंग की घटना हुई. बताया जाता है कि करीब 60 से 70 राउंड फायरिंग हुई. घटना के बाद नौरंगा गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है. बाढ़ डीएसपी मौके पर कैंप कर रहे हैं. बताया जाता है नौरंगा जलालपुर गांव में एक दबंग के द्वारा एक घर में ताला लगा दिया गया था. इसी को लेकर पूर्व विधायक अनत सिंह गांव पहुचे थे.
फायरिंग के बाद पूर्व विधायक ने कहा, ‘मेरे आदमी सिर्फ सोनू-मोनू से पूछने गए थे कि विधायक जी आए हैं, चलिए बताइए कि आप लोग ऐसा क्यों करते हैं। इतनी बात पर ही उन लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। जो बचाने गए उन लोगों ने जवाबी फायरिंग की।’
उन्होंने अपने सोशल मीडिया X हैंडल पर लिखा है, ‘जिनके साथ हो महाकाल, उसका क्या बिगाड़ेगा काल?’
अनंत, सोनू-मोनू और उनके समर्थकों पर 3 अलग-अलग केस दर्ज
पंचमहला थाना में पहला केस पुलिस की ओर से दर्ज कराया गया है जिसमें अनंत सिंह, सोनू-मोनू और उनके समर्थकों को आरोपी बनाया गया है। दूसरा केस सोनू-मोनू की मां द्वारा अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर दर्ज कराया गया है। तीसरा केस मुकेश ने सोनू-मोनू और उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज कराया है।
इस घटना में एक व्यक्ति को गोली लगने की भी जानकारी मिली है. वहीं फायरिंग की घटना पर मोकामा विधायक अनंत सिंह की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आ गयी है. अनंत सिंह ने कहा कि जब कोई फायरिंग करेगा तो बचाव में जवाब तो देना होगा न. फिलहाल गांव में भारी तनाव है. बाढ़ डीएसपी राकेश कुमार ने सोनू- मोनू के घर पर ही फायरिंग की बात स्वीकार की. पुलिस ने मौके से तीन खोखा भी बरामद किया है. इस गोलीबारी में छोटे सरकार भी बाल बाल बच गए हैं.
दोनों पक्षों के बीच बना हुआ तनाव
गोलीबारी की घटना से कुछ समय तक मौके पर अफरा तफरी का माहौल हो गया था. फायरिंग करने का आरोप सोनू मोनू गिरोह पर लगा है. घटना के बाद मौके पर पांच थानों की पुलिस पहुंची और मामले को नियंत्रण में किया. जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक गांव के लोगों के शिकायतों के निराकरण के लिए पहुंचे थे. वहां वह लोगों की बात सुन रहे थे, तभी अपराधियों ने उन पर फायरिंग कर दी. बताया जा रहा है कि विधायक के काफिले पर गोलीबारी की गई थी. दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है.
ऐसा नहीं है कि अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर ये पहला जानलेवा हमला है। 90 के दशक में भी अनंत सिंह पर फायरिंग हुई थी, उन्हें दो गोलियां लगी थी। इसका जिक्र पूर्व विधायक कई बार मीडिया को दिए इंटरव्यू में कर चुके हैं। वे अक्सर सीने और हाथ में लगी गोलियों के निशान भी दिखाते हैं।90 के दशक की बात है। वह रोज की तरह सुबह-सुबह अपने अहाते में बैठे थे। तभी अचानक इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। गोलियां उनके घर के पीछे से चल रहीं थीं। अनंत सिंह जब तक संभल पाते, तब तक उन्हें दो गोली लग चुकी थी। बेटे अनंत को गोली लगने की बात सुनकर पिता चंद्रदीप सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
2004 का इनाम 2005 में मिला, विधानसभा पहुंच गए
2004 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ से नीतीश कुमार चुनाव लड़ रहे थे। उनके खिलाफ RJD-LJP ने बाहुबली सूरजभान सिंह को उतारा था। तब नीतीश कुमार ने अनंत सिंह की मदद ली। एक जनसभा के दौरान अनंत सिंह ने नीतीश को चांदी के सिक्कों से तौला था। इसके बाद से ही दोनों करीबी बन गए।
2004 में नीतीश कुमार की मदद का इनाम अनंत सिंह को 2005 के विधानसभा चुनाव में मिला। इस चुनाव में जेडीयू ने अनंत सिंह को मोकामा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने लोजपा के नलिनी रंजन शर्मा उर्फ ललन सिंह को हराकर राजनीति में एंट्री की।
साल 2010 में भी अनंत सिंह ने जेडीयू के टिकट पर जीत हासिल की। इस बीच नीतीश के साथ अनंत सिंह का कद भी बढ़ता चला गया। स्थिति ये थी कि नीतीश कुमार भी अनंत सिंह के सामने हाथ जोड़ते थे।
सवाल पूछने पर पत्रकार को पीटा
2007 में महिला से दुष्कर्म और हत्या केस में अनंत सिंह का नाम सामने आया था। जब इसके बारे में पत्रकार उनका पक्ष जानने पहुंचा तो उनके समर्थकों ने पिटाई कर दी। 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखा। कैमरा भी छीन लिया था। इस मुद्दे पर जमकर बवाल हुआ। इस मामले में अनंत सिंह ने 6 साल बाद कोर्ट में सरेंडर किया था। हालांकि, बाद में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

साधु बनने गए थे, भाई की हत्या के बाद क्राइम में एंट्री की
एक कहानी ये भी है कि वह जवानी के दिनों में साधु बनने की चाहत रखते थे। इसके लिए वे शांति की तलाश में अपना घर-परिवार छोड़ हरिद्वार भाग गए थे। लेकिन साधुओं के साथ ही उनकी मुठभेड़ हो गई।
खुद से ज्यादा साधुओं की आपसी लड़ाई देखकर उनका मन वैराग्य की दुनिया से उचट ही रहा था, तभी उनके सबसे बड़े भाई बिरंची सिंह की हत्या की खबर मिली। ये सुनते ही सब कुछ छोड़कर वे वापस अपने गांव लौट गए। अब वैरागी बनने गए अनंत सिंह के सिर पर अपने भाई की हत्या का बदला लेने का भूत सवार था। वह दिन-रात भाई के हत्यारे की तालाश में जुट गए।
एक दिन उन्हें जानकारी मिली कि हत्यारा गंगा नदी के उस पार बैठा है। अनंत सिंह ने तैर कर नदी पार की और ईंट-पत्थरों से कूच कर उसे मार डाला। यहां से शुरू अनंत सिंह के क्रिमिनल बनने की कहानी शुरू हुई। इस घटना के बाद अनंत सिंह क्राइम की दुनिया में घुसते चले गए। एक के बाद एक घटनाओं को अंजाम देते गए।
अनंत सिंह पर 39 से अधिक केस
15 साल में हत्या, रंगदारी, अपहरण के 39 केस दर्ज हुए। अनंत सिंह ने 2005 के अपने चुनावी हलफनामे में मात्र एक केस का जिक्र किया था।
हत्या, अपहरण, रेप और रंगदारी जैसे 39 मामले बिहार के विभिन्न थानों में अनंत सिंह के खिलाफ पुलिस के फाइलों में दर्ज है। 2020 में दायर हलफनामे के मुताबिक उन पर हत्या की कोशिश के 11 और जान से मारने की धमकी के 9 केस दर्ज हैं।







