प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज शनिवार को दिन में करीब 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वामित्व योजना के तहत 65 लाख से अधिक संपत्ति कार्डों का वितरण करेंगे। संपत्ति कार्ड हासिल करने वालों में 10 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों के 230 से अधिक जिलों के 50 हजार से अधिक गांवों के संपत्ति मालिक हैं। पीआईबी के मुताबिक सर्वेक्षण के लिए नवीनतम ड्रोन तकनीक के माध्यम से गांवों में रहने वाले क्षेत्रों में घरों के मालिक परिवारों को ‘अधिकारों का रिकॉर्ड’ प्रदान करके ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को बढ़ाने की दृष्टि से प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना शुरू की थी।
अब तक 3.17 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा
पीआईबी के मुताबिक 3.17 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण हो चुका है। यह कार्य लक्षित गांवों में से 92 प्रतिशत में पूरा हो चुका है। वहीं अब तक 1.53 लाख से अधिक गांवों के लिए लगभग 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। यह योजना पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में पूरी तरीके से लागू हो गई है।वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ कई केंद्र शासित प्रदेशों में भी ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।
संपत्ति संबंधी विवादों से मिलेगा छुटकारा
यह योजना संपत्तियों के मुद्रीकरण एवं बैंक ऋण के माध्यम से संस्थागत ऋण यानी बैंक से लोन लेने में आसानी होगी। इसका अहम मकसद संपत्ति विवादों को कम करना भी है। इस योजना का बड़ा फायदा यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों व संपत्ति कर का बेहतर आकलन संभव हो सका है।
दुनिया के सामने होगा सफलता का शोकेस
20 देशों के अधिकारी कार्यशाला में होंगे शामिल
पंचायतीराज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि मंत्रालय वैश्विक मंचों पर स्वामित्व योजना की सफलता को प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है। मार्च, 2025 में विदेश मंत्रालय के सहयोग से भारत में भूमि प्रशासन पर एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना क्या है?
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से तैयार किया जाता है। इसमें लोगों को जमीन के मालिकाना हक का अधिकार दिया जाता है, जिससे भूमि विवादों को कम किया जा सके। साथ ही योजना का उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक को स्पष्ट करना है, जिससे किसानों को आसानी से लोन मिल सके। इस योजना में ड्रोन सर्वे, GIS और दूसरी आधुनिक तकनीक का यूज करके मालिकाना हक स्पष्ट किया जाता है। इस योजना में सर्वे के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
क्या हैं योजना के फायदे?
इस योजना से भूमि के स्वामित्व का स्पष्ट प्रमाण मिल जाता है। इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी। जमीन का स्वामित्व स्पष्ट होने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य भी तेजी से होंगे। वहीं, किसानों को लोन मिलने में भी सहूलियत होगी। किसान आसानी से अपनी जमीन पर आधारित लोन ले सकते हैं। इस तरह यह योजना ग्रामीण भारत के लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मदद कर रही है।
3.17 लाख से अधिक गांवों में हुआ ड्रोन सर्वे
प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.17 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो गया है। इस तरह जितने गांवों का लक्ष्य रखा गया था, उसके 92 फीसदी गांवों का सर्वे हो गया है। वहीं, 1.53 लाख गांवों के लिए करीब 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार कर लिये गए हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य?
- केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य रूरल प्लानिंग तैयार करना और जमीनों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना है. इसके अलावा संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी लाना है.
- ग्रामीण भारत में नागरिकों को लोन और अन्य वित्तीय लाभ लेने के लिए अपनी संपत्ति को फाइनेंसियल एसेट के रूप में उपयोग करने में सक्षम बनाकर वित्तीय स्थिरता लाना है.
- इस योजना से जो प्रॉपर्टी टैक्स हासिल होगा उसका लाभ सीधे ग्राम पंचायतों को मिलेगा. या फिर टैक्स राज्य के खजाने में जाएगे. इससे राज्यों को भी आर्थिक लाभ होगा.
- इस योजना के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर का सर्वे किया जाएगा और जीआईएस मैपिंग भी की जाएगी. इनका इस्तेमाल विभागों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है.
- इस योजना का उद्देश्य जीआईएस मैपिंग का उपयोग करके बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) तैयार करने में सहायता करना है.
स्वामित्व योजना के फायदे?
केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना के फायदे की बात करें तो इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी. जमीन का मालिक कौन है, उसका मुखिया कौन है, अगर यह सब चीजें क्लीयर रहेंगी तो फिर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य में भी तेजी आएगी. इसके अलावा किसानों आसानी से लोन भी मिल सकता है. किसान आसानी से अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं.
स्वामित्व योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को मिलेगा जिनके पास अपनी जमीन या घर से जुड़े कागजात नहीं है. उन्होंने जमीन पर घर तो बना लिया है, लेकिन उनके पास कोई कागज नहीं है. ऐसी स्थिति में सरकार इलाके का सर्वे कराकर उनको एक कार्ड मुहैया कराएगी जिसे संपत्ति कार्ड कहा जा रहा है. एक बार कार्ड जारी होने के बाद उस जमीन और संपत्ति से जुड़ा विवाद भी खत्म हो जाएगा क्योंकि आधिकारिक रूप से जमीन के मालिक को मालिकाना हक मिल जाएगा.
3 लाख से अधिक गांवों में सर्वे का काम पूरा
योजना को लेकर बता दें कि इसके अमल के लिए अब तक 3 लाख 11 हजार 282 गांवों में ड्रोन का सर्वे पुरा हो गया है. इसमें से 2 लाख 68 हजार 10 गांवों के मैप राज्य सरकार को हैंडओवर कर दिए गए हैं. इसमें से 1 लाख 79 हजार 152 गांवों के मैप को इन्वायरी के लिए भेज दिया गया है. 1 लाख 44 हजार 543 कार्ड भी बन चुके हैं. इसमें 1 लाख 13 हजार 806 कार्डों का वितरण भी कर दिया गया है.
स्वामित्व स्कीम के लिए जरूरी कागजात
अगर आप इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं या फिर किसी जमीन या संपत्ति के लिए संपत्ति कार्ड बनवाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए https://svamitva.nic.in/svamitva/ वेबसाइट पर जाकर आपको रजिस्टर कराना होगा. रजिस्टेशन फॉर्म को भरते समय नाम, पता, मोबाइल, आधार कार्ड, ईमेल आईडी और जमीन से जुड़ी जानकारी दर्ज करनी पड़ेगी. आवेदन भरने के बाद आवासीय भूमि को ड्रोन के जरिए मापा जाएगा और गांव की सीमा के भीतर आने वाली हर प्रॉपर्टी का डिजिटल नक्शा तैयार करेगा.
अगर आप पहले से रजिस्टर्ड हैं और आपका कार्ड भी बना चुका है. आप उसे डाउनलोड करना चाह रहे हैं तो इसके लिए आपको मोबाइल पर एक लिंग मिलेगा जिसके जरिए कार्ड की सॉफ्ट कॉपी अपने पास सेव कर सकते हैं.
इन राज्यों में ले सकते हैं योजना का लाभ
यह योजना पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में पूरी तरह से लागू हो चुकी है.यह योजना पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, त्रिपुरा, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा में पूर्ण संतृप्ति तक पहुंच गई है. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के साथ-साथ कई केंद्र शासित प्रदेशों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है.







