अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति एवं रिपब्लिकन पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप पर पेनसिल्वेनिया में एक चुनावी रैली के दौरान हमला किया गया। ट्रंप फायरिंग की इस घटना में घायल जरूर हुए हैं लेकिन वह पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमलावर को मार गिराया गया है। ट्रंप पर हुए इस जानलेवा हमले के बाद दुनिया भर से रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं। इस बीच आपको बता दें कि दुनिया के किसी चर्चित नेता पर होने वाला यह कोई पहला हमला नहीं है। इससे पहले भी अलग-अलग देशों के बड़े नेताओं यहां तक की प्रधानमंत्री पर भी जानलेवा हमला हो चुका है। तो चलिए आपको ऐसे ही कुछ नेताओं के नाम बताते हैं जिनपर जानलेवा हमले हुए हैं।
जॉन एफ कैनेडी की हत्या
जानलेवा हमला अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुआ तो बात सबसे पहले अमेरिका की ही करते हैं। अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति रहे जॉन एफ कैनेडी की 22 नवंबर 1963 को हत्या कर दी गई थी। जिस समय कैनेडी पर हमला हुआ था उस दौरान वह अपनी ओपन कार में बैठकर कहीं जा रहे थे। इसी दौरान हमलावर ने उन पर कई राउंड की फायरिंग की थी जिसमें उनकी मौत हो गई थी।

हमले में हुई थी जापान के PM की मौत
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे पर 8 जुलाई 2022 को जानलेवा हुआ था। इस हमले में आबे की मौत हो गई थी। आबे को हमलावर ने उस वक्त अपना निशाना बनाया था जब वो नारा शहर में एक रैली को संबोधित कर रहे थे।

स्लोवाकिया के PM पर हुआ था जानलेवा हमला
इसी साल मई में स्लोवाकिया के पीएम रॉबर्ट फिको पर जानलेवा हमला हुआ था। हमलावर ने फिको पर कई राउंड की फायरिंग की थी जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। फिको पर यह हमला उस वक्त हुआ जब वह एक सांस्कृतिक सामुदायिक केंद्र में सरकारी बैठक खत्म करने के बाद लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

पाकिस्तान में हुई थी बेनजीर भुट्टो की भी हत्या
पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की भी 27 दिसंबर 2007 को हत्या कर दी गई थी। भुट्टो पर हमला उस वक्त हुआ था जब वो पाकिस्तान के रावलपिंडी में चुनावी प्रचार कर रही थीं। इसी दौरान हमलावर उनके पास आया और उन्हें गोली मार दी।

इंदिरा गांधी की हत्या
भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या उनके ही बॉडी गार्ड्स ने 31 अक्टूबर 1984 को कर दी थी। हत्याकांड को अंजाम देने वाले हमलावर ऑपरेशन ब्लू स्टार से नाराज थे।
अब्राहम लिंकन- जान देकर चुकाई गुलामों को आजाद कराने कीमत
तारीख- 14 अप्रैल 1865, जगह- वाशिंगटन। अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन फोर्ड थियेटर में ‘अवर अमेरिकन कजिन’ नाटक देख रहे थे। घटना के समय बालकनी में बैठे लिंकन के सुरक्षागार्ड ‘जॉन पार्कर’ उस वक्त उनके साथ नहीं थे। वो इंटरवल में ही थिएटर से बाहर निकल गए थे। रात सवा दस बजे मौका देखकर हमलावर जॉन वाइक्स बूथ ने लिंकन को सिर पर पीछे से गोली मार दी।
लिंकन को अस्पताल ले जाया गया, जहां अगली सुबह, यानी 15 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। गोली मारने वाला जॉन वाइक्स बूथ पेशेवर थिएटर आर्टिस्ट था। लिंकन को गोली मारने वाले जॉन वाइक्स बूथ की 10 दिन बाद वर्जीनिया में अमेरिकी सैनिकों से मुठभेड़ हुई। जहां वह मारा गया।
वजह
अमेरिका में उनसवीं सदी में गुलाम प्रथा का चलन था। इसमें ‘काले’ लोगों को खरीदा-बेचा जाता था। गोरे लोग उनसे गुलामी करवाते थे। उनकी आजादी पर गोरों का अधिकार था। उनकी जिंदगी जानवरों से भी बदतर थी।
अब्राहम लिंकन इस गुलाम प्रथा के विरोधी थे। उन्होंने इसके खिलाफ अभियान चलाना शुरू कर दिया था। वे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाते थे और अश्वेत लोगों की आजादी के लिए भाषण देते थे। राष्ट्रपति बनने के बाद साल 1863 के दिन उन्होंने दासप्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया।
दक्षिणी राज्यों में लोग इस गुलामी प्रथा को जारी रखना चाहते थे, इस फैसले से नाराज हो गए जिससे देश में गृहयुद्ध छिड़ गया। लिंकन फिर भी अपने इरादों पर डटे रहे। हालांकि उनके इस फैसले से जॉन वाइक्स बूथ इतना नाराज हो गया कि उसने लिंकन की हत्या कर दी।

जेम्स गार्फील्ड- राष्ट्रपति ने राजनयिक नहीं बनाया तो हत्या कर दी
तारीख 2 जुलाई 1881, जगह- वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के 20 वें राष्ट्रपति जेम्स गार्फील्ड को पद संभाले सिर्फ 4 महीने ही हुए थे। वे वाशिंगटन डीसी के बाल्मोर स्टेशन पर थे। उन्हें न्यू इंग्लैंड जाने वाली ट्रेन पकड़नी थी। वे विलियम कॉलेज जा रहे थे जहां उनकी पढ़ाई हुई थी। यहां वे लोगों के बीच अपने दोनों बेटों को इंट्रोड्यूस कराने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही चार्ल्स गुइटो नाम के एक शख्स ने उन्हें गोली मार दी।
गोली उनके सीने में धंस गई। डॉक्टरों ने गोली निकालने की कई दिनों तक कोशिश की मगर सफल नहीं हो पाए। टेलीफोन के आविष्कारक ग्राहम बेल ने इसके लिए एक विशेष मशीन बनाई ताकि वे सीने में धंसी गोली निकाल सकें, मगर वे भी कामयाब नहीं हो पाए। ढाई महीने के बाद 19 सितंबर को उनकी मौत हो गई। 39 साल के गुइटो को गार्फील्ड की हत्या का दोषी ठहराया गया।

वजह
गुइटो कई पेशे में फेल होने के बाद राजनीति से जुड़ गया था। उसे लगता था कि उसे अब तक वो जगह नहीं मिली है जिसका वो हकदार है। राष्ट्रपति चुनाव के वक्त गुएटो अपने विचारों को कागज पर छपवाकर बांटने लगा।
जब गार्फील्ड चुनाव जीत गए तो उसे लगा कि उसके छपाए भाषणों को पढ़कर ही गार्फील्ड को ये सफलता मिली है, इसलिए पुरस्कार के रूप में उसे राजनयिक जिम्मेदारी तो मिलनी ही चाहिए। इसके बाद गुएटो ने यूरोप के कई दूतावासों में राजनयिक बनने की कोशिश की मगर वह इसमें कामयाब नहीं हुआ।
गुइटो सर्दियों में न्यूयॉर्क शहर में रिपब्लिकन ऑफिस के चक्कर लगाता रहा। अपने भाषण के लिए किसी पुरस्कार का जुगाड़ लगाता रहा मगर कोई फायदा नहीं हुआ। इससे उसके मन में गार्फील्ड के लिए नफरत भर गई। उसने राष्ट्रपति की हत्या के लिए कई महीनों तक प्लानिंग की और मौका देखकर अपना काम कर दिया।
राष्ट्रपति गार्फील्ड की मौत के दिन ही गुइटो ने नए राष्ट्रपति चेस्टर आर्थर को चिट्ठी लिखी। उसने लिखा- मैंने ईश्वर के आदेश पर ये काम किया। मैं जानता हूं कि मन ही मन आप मेरे काम की तारीफ करते होंगे। आप इसे हत्या के रूप में न देखें ये तो भगवान का एक काम था जिसका जरिया मैं बना हूं। गार्फील्ड अपनी मौत के खुद जिम्मेदार थे।
गोलीबारी के एक साल बाद गुइटो को फांसी पर लटका दिया गया।

विलियम मैककिन्ले- नौकरी छूटने से नाराज शख्स ने की हत्या
तारीख- 6 सितंबर 1901, जगह- बफेलो। अमेरिका के 25वें राष्ट्रपति विलियम मैककिन्ले का दूसरा कार्यकाल चल रहा था। उनसे पहले दो अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मौत हो गई थी मगर वे अपने आसपास कड़ी सुरक्षा नहीं चाहते थे। दरअसल, मैककिन्ले को लोगों से मिलना जुलना अच्छा लगता था।
राष्ट्रपति को बफेलो में एक इवेंट में जाना था। उनके सचिव को डर था कि उनकी हत्या हो सकती है, इसलिए उन्होंने उस इवेंट को दो बार कैंसिल करा दिया मगर दोनों बार राष्ट्रपति मैककिन्ले ने उसे बहाल करवा दिया। मैककिन्ले इवेंट में शामिल हुए।
इवेंट में शामिल होने के बाद मैककिन्ले लोगों से हाथ मिलाने लगे, तभी लियोन जोलगोज नाम के शख्स उनके करीब आया और उन पर दो गोलियां दाग दीं। एक गोली उनके शरीर को छूकर निकल गई। दूसरी गोली उनके पेट में जा घुसी। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर वे गोली नहीं निकाल पाए जिससे पेट में घाव हो गया। 8 दिन बाद 14 सितम्बर को उनकी मौत हो गई।
वजह
राष्ट्रपति पर गोली चलाने वाले लियोन जोलगोज ने की नौकरी 1893 के इकोनॉमिक क्राइसिस में जा चुकी थी। उसे लगता था कि देश के इस हालात की वजह ये नेता हैं। वह सत्ता विरोधी हो गया था। वह मैककिन्ले को देश की इस हालत का जिम्मेदार मानने लगा।
जोलगोज को लगने लगा कि वह जबतक राष्ट्रपति की हत्या नहीं कर देता देश की हालत नहीं सुधर सकती। राष्ट्रपति की हत्या के मुकदमे में उसे दोषी पाया गया और 29 अक्टूबर, 1901 को बिजली की कुर्सी पर मौत की सजा दी गई।

जॉन एफ कैनेडी- आज तक पता नहीं चला क्यों हुई हत्या?
तारीख- 22 नवंबर 1963, जगह- डलास। अमेरिकी के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की तैयारियों में जुटे हुए थे। उन्हें भरोसा था कि एक बार फिर से वो अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाएंगे। इस बीच उन्होंने टेक्सास का दौरा करने का फैसला किया। यहां पर उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेताओं के बीच आपसी विवाद था।
चुनाव से पहले कैनेडी हर हाल में इस विवाद को खत्म करना चाहते थे। वे 21 नवंबर को टेक्सास पहुंचे चहां उन्होंने कुछ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके अलगे दिन वे डलास पहुंचे। उन्हें देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई थी। कैनेडी अपने एयरफोर्स वन विमान से निकलकर पत्नी जैकलीन के साथ वहां खड़ी एक ओपन लिमोजिन कार में बैठ गए।
रैली स्थल पर सड़क के दोनों तरफ जमा भीड़ उनके नारे लगा रही थी। राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी लोगों का उत्साह देखकर काफी खुश थे। इस दौरान भीड़ के बीच से दो गोलियां चलीं। एक गोली सीधे कैनेडी के सिर में और दूसरी उनकी गर्दन में लगी।
कुछ देर पहले तक मुस्कुराकर हाथ हिलाते हुए लोगों का अभिवादन स्वीकार करते कैनेडी, अब अपनी पत्नी ओनासिस के गोद में गिरे हुए थे। लिमोजिन कार में खून के छींटें और मांस के लोथड़े पड़े हुए थे। राष्ट्रपति की सुरक्षा में लगे जवान उनको लेकर पार्कलैंड मेमोरियल अस्पताल पहुंचे। लेकिन डॉक्टरों ने दोपहर के 1 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस हमले में कैनेडी की गाड़ी में सवार गवर्नर कोनली भी घायल हुए थे, लेकिन वो जल्द ही ठीक हो गए। कैनेडी पर गोली चलाने के आरोप में सेना से निकाले गए एक पूर्व सैनिक ओसवाल्ड को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, 2 दिन बाद कैनेडी के एक समर्थक ने उसकी हत्या कर दी।

रहस्य
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या को लेकर कई तरह की थ्योरी सामने आई, लेकिन असली हत्यारे पर आज भी रहस्य बरकरार है…
पहली थ्योरी: हत्या के वक्त आराम से खड़ी थी महिला, बाद में कभी नहीं मिली
जब अमेरिकी एजेंसी FBI राष्ट्रपति कैनेडी के हत्यारे का पता कर रही थी, तभी उसके हाथ एक तस्वीर लगी। इस तस्वीर में सिर से पांव तक ढकी एक महिला नजर आ रही थी। जब कैनेडी की हत्या हुई और लोग भाग रहे थे, तब वह महिला आराम से वहां तस्वीरें खींच रही थी।
माना जाता रहा कि कैनेडी की हत्या उस महिला के कैमरे रूपी पिस्तौल से हुई, पर उस महिला की कभी पहचान नहीं हो पाई और न ही उस कैमरे या पिस्तौल का कुछ पता चला। बाद में एक महिला ने दावा किया कि वही उस समय वहां थी, पर वो साबित नहीं कर पाई।
इसके बाद से ही ये चर्चा होने लगी कि किसी एक ने कैनेडी की हत्या की है या उसके साथ वो महिला भी थी। इस महिला को द बाबुश्का लेडी का नाम दिया गया। रूसी भाषा में इसका अर्थ रहस्यमयी महिला होता है।

दूसरी थ्योरी: रूसी खुफिया एजेंसी KGB पर शक
इस हत्या के वक्त अमेरिका और रूस के बीच कोल्ड वॉर चल रहा था। एक साल पहले ही रूस ने अमेरिका के पड़ोसी देश क्यूबा में न्यूक्लियर मिसाइलें तैनात कर दी थीं। दुनिया में तीसरा विश्वयुद्ध बस छिड़ने ही वाला था। लेकिन कैनेडी ने समझदारी दिखाते हुए रूस के साथ एक समझौता किया और इस संकट को दूर किया।
इससे अमेरिका ही नहीं रूस में भी कैनेडी की खूब तारीफ हुई। कहा जाने लगा कि इसी से चिढ़कर रूस के नेता ख्रुश्चेव ने खुफिया एजेंसी KGB से मिलकर कैनेडी की हत्या करवा दी। हालांकि, इस आरोप को लेकर कुछ भी पुख्ता तौर पर सामने नहीं आ सका।
तीसरी थ्योरी: अमेरिकी माफिया ने राष्ट्रपति को मरवाया
कैनेडी की हत्या का शक अमेरिका के कई माफिया सरगनाओं पर भी गया। कहा गया कि अमेरिकी माफियाओं ने खूब सारा पैसा क्यूबा में लगा रखा था। क्यूबा के साथ अमेरिका के संबंध में जो कड़वाहट आई, इससे उनको काफी नुकसान हुआ था। ॉ
इस वजह से अमेरिका और क्यूबा के माफियाओं ने मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति के हत्या की सुपारी दी थी। हालांकि, इस मामले में भी अमेरिकी एजेंसियों को जांच में कुछ खास हाथ नहीं लगा।

रोनाल्ड रीगन- हीरोइन को इम्प्रेस करने के लिए राष्ट्रपति पर चलाई गोली
तारीख- 30 मार्च सन 1981, जगह- वाशिंगटन डीसी। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन वाशिंगटन डीसी में, एक समारोह में हिस्सा लेने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच कार में बैठने जा रहे थे। उनके चारों तरफ मीडिया और लोगों की भीड़ थी। अचानक उसी भीड़ से निकलकर एक शख्स ने रीगन पर फायरिंग शुरू कर दी।
रीगन पर पांच गोलियां दागी गईं लेकिन वे हर गोली से बच गए। छठी गोली से भी वे बच ही गए थे लेकिन वह बुलेटप्रूफ कार के शीशे से टकराकर फिर से रीगन के पास लौटी और उनके सीने में जा धंसी। रीगन जमीन पर गिर गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने उनके सीने से गोली समय पर निकाल ली जिससे उनकी जान बच गई। इस घटना में रीगन के 3 सहयोगियों को भी गोली लगी लेकिन वे भी रीगन की तरह बच गए। गोली चलाने वाले जॉन हिंक्ली को मौके पर ही पकड़ लिया गया।


वजह
कोर्ट में हिंक्ली के वकील ने दलील दी कि उसका मुवक्किल मानसिक रूप से बीमार है। उसने जोडी फोस्टर की ‘टैक्सी ड्राइवर’ फिल्म 18 बार देखी थी। इस फिल्म को देखने के बाद हिंकले इसके एक किरदार से प्रभावित हो गया था जो कि एक भ्रष्ट नेता को मार देता है।
हिंक्ली को लगा कि यदि वह राष्ट्रपति की हत्या कर देगा तो जरूर वह जोडी फोस्टर की नजरों में आ जाएगा। वकील ने कोर्ट में अपनी दलीलों से यह साबित कर दिया कि हिंक्ली मानसिक रूप से कमजोर है और राष्ट्रपति पर हमला करने का दोषी सिर्फ हिंकली नही, वह फिल्म भी है।
इसके बाद कोर्ट ने हिंक्ली को एक मानसिक अस्पताल भेज दिया। यहां पर वह 35 सालों तक रहा। उसे 2016 में रिहा कर दिया गया। रीगन पर गोली चलाने के 41 साल बाद जून 2022 में अदालत ने हिंक्ली को पूरी तरह से बरी कर दिया।








