राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर नेताओं की जुबानी जंग जारी है. इसी बीच उदयपुर शहर विधानसभा के कांग्रेस प्रत्याशी और राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के उदयपुर एंट्री पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा.
चुनाव प्रभारी को लिखे पत्र में गौरव वल्लभ ने कहा, गुलाबचंद कटारिया बीजेपी प्रत्याशी ताराचंद जैन के समर्थन में संवैधानिक पद पर होते हुए भी मीटिंग कर रहे हैं. गौरव वल्लभ ने तर्क दिया कि सवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होकर राजनीति नहीं कर सकते, यह आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है.
गौरतलब है राजस्थान के पूर्व गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया वर्तमान में असम के राज्यपाल हैं. उदयपुर निवासी कटारिया राजस्थान में भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी हैं. बता दें, राजस्थान में आगामी 25 नवंबर को मतदान होने हैं और 3 दिसंबर को चुनाव के परिणाम आएंगे.
कटारिया के दौरे को बताया आचार संहिता का सीधा उल्लंघन
राजस्थान में विधानसभा चुनाव के बीच असम के राज्यपाल की उदयपुर में एंट्री को लेकर अब सियासत गर्म हो चुकी है। इसको लेकर गौरव वल्लभ ने चुनाव आयोग को शिकायत की। इसमें उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन बताया है। चुनाव आयोग को की गई शिकायत में बल्लभ ने बताया कि असम के राज्यपाल संवैधानिक पद पर है। ऐसे व्यक्तियों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए। गौरव वल्लभ ने कहा कि राज्यपाल कटारिया उदयपुर के भाजपा प्रत्याशी ताराचंद जैन के समर्थन में मीटिंग लेने के लिए उदयपुर आ रहे हैं। जो आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है।
उपराष्ट्रपति धनखड़ के दौरे पर भी कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
बता दें कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बीते दिनों राजस्थान के कई दौरे पर रहे। इसको लेकर CM अशोक गहलोत ने सवालिया निशान उठा कर उन्हें कटघरे में खड़े कर दिया। गहलोत ने आरोपों में कहा कि संवैधानिक पद पर होने के बाद उपराष्ट्रपति को पार्टी गतिविधियों में लिप्त नहीं होना चाहिए। गहलोत ने धनखड़ को निशाना बनाते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति अगर राष्ट्रपति बनेंगे तो, भी हम स्वागत करेंगे। लेकिन अभी मेहरबानी रखें। बार-बार सुबह शाम आ रहे हैं। दौरे कर रहे हैं। इसका कोई तुक नहीं है। चुनाव चल रहे हैं राजस्थान में। आप बार-बार आएंगे तो, क्या समझेंगे। यह संवैधानिक संस्थाएं हैं। इनका मान सम्मान रखना चाहिए।
राज्यपाल कलराज मिश्र को भी घेर चुके हैं गहलोत
कांग्रेस की ओर से राज्यपालों को घेरने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले सीएम अशोक गहलोत राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को भी घेर चुके हैं। गहलोत और पायलट के बीच चले सियासी संकट के दौरान गहलोत ने दो बार राजस्थान कैबिनेट की विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। लेकिन राज्यपाल ने इसे टेक्निकल आधार पर खारिज कर दिया था। इसको लेकर गहलोत ने कलराज मिश्रा को जमकर निशाने पर लिया। इस दौरान गहलोत ने यह तस्वीर पेश करने की कोशिश की। जिसमें बीजेपी और राज्यपाल जनता की चुनी सरकार को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।







