राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि भारत में शांति हो। समाज में कलह फैलाने की कोशिश हो रही है। मणिपुर में जो हो रहा, करवाया जा रहा है। सांस्कृतिक मार्क्सवादी समाज में अराजकता फैला रहे हैं।
भागवत नागपुर के संघ मुख्यालय में दशहरा पर आयोजित शस्त्र पूजा कार्यक्रम में शामिल होने के बाद रेशिमबाग मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में मणिपुर हिंसा, लोकसभा चुनाव, अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन पर भी बात की।
देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में फैली हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है. सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त कमांडो की तैनाती की गई है और इंटरनेट सेवा भी बैन है. इस बीच राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) चीफ मोहन भागवत का अहम बयान सामने आया है. जिसमें उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि मणिपुर जैसे शांत राज्य में ये हिंसा की आग फैलाई किसने?
नागपुर में दशहरे के मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मणिपुर शांत था, अचानक आपसी फूट की आग कैसे लग गई? मणिपुर हिंसा के पीछे सीमा पार के आतंकवादी थे? मैतेई और कुकी समाज को किसने एक-दूसरे के सामने खड़ा किया? सीमावर्ती क्षेत्र है, वहां झगड़े हों, इसका किसको फायदा है? मणिपुर में झगड़ा निर्माण करने वाले बाहरी ताकत है क्या?”
‘मणिपुर हिंसा हुई नहीं करवाई गई’
आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा, “गृह मंत्री, अन्य मंत्री वहां जाकर बैठे, शांति की प्रक्रिया चलते हुए हिंसा भड़काने वाले कौन थे?? देखने पर पता चलता है, यह हुआ नहीं, करवाया गया है.” उन्होंने आरएसएस कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा, “स्वयं को उकसाने वाली परिस्थिति पर काम करने वाले संघ के कार्यकरताओं को मैं सलाम करता हूं. हमें एकता की ओर बढ़ना पड़ेगा. मणिपुर में संघ के स्वंयसेवक काम कर रहे हैं, हमें उन पर गर्व है. वहां विश्वास टूट गया है, पुनः विश्वास निर्माण करने के लिए लंबे समय तक काम करना पड़ेगा.”
RSS के शस्त्र पूजन कार्यक्रम की तस्वीरें…


भागवत के स्पीच की 5 बातें सिलसिलेवार पढ़ें…
1. मणिपुर हिंसा हुई नहीं, करवाई गई
RSS चीफ ने दावा किया कि मणिपुर में हो रही हिंसा सोची-समझी साजिश है। उन्होंने कहा- मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय सालों से एक साथ रहते हैं। इनके बीच सांप्रदायिक आग कैसे लगी? क्या हिंसा करने वाले लोगों में सीमा पार के कट्टरपंथी भी थे?
वहां सालों से सबकी सेवा करने में वाले संघ जैसे संगठन को बिना कारण इसमें घसीटा गया। मणिपुर में अशांति और अस्थिरता से विदेशी सत्ताओं को फायदा हो सकता है। देश में मजबूत सरकार के होते हुए भी यह हिंसा किनके बलबूते इतने दिनों से चल रही है? इससे साफ है कि यह हो नहीं रहा है, करवाया जा रहा है।
2. लोकसभा चुनाव में भावनाएं भड़काकर वोट नहीं मांगना चाहिए
भागवत ने कहा- 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। लोगों की भावनाएं भड़काकर वोट मांगने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, लेकिन ये फिर भी होता है। ये समाज की एकता को चोट पहुंचाती हैं। वोट डालना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। देश की एकता, अखंडता, अस्मिता और विकास जैसे अहम मुद्दों को ध्यान में रखकर अपना वोट डालें।
3. समाज में कलह फैलाने की कोशिश हो रही
सामाजिक अराजकता पर भागवत ने कहा- समाज विरोधी कुछ लोग खुद को सांस्कृतिक मार्क्सवादी कहते हैं, लेकिन उन्होंने मार्क्स को 1920 दशक से भुला रखा है। वे दुनिया की सभी शुभ चीजों, संस्कृति का विरोध करते हैं। वे लोग अराजकता का प्रचार-प्रसार करते हैं।
यह चिंता का विषय है। झगड़े को छोड़कर सुलह पर चलना ही श्रेष्ठता है। हम सब एक ही पूर्वजों के वंशज हैं। एक मातृभूमि की संतानें हैं। हमें इसी आधार पर फिर से एकजुट होना है। एक राष्ट्र तभी समृद्ध होता है जब समाज एकजुट और सतर्क रहता है।







