भाजपा विधानमंडल दल के नेता विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जदयू के लिए भाजपा का दरवाजा बंद हो जाने के बाद राजद ने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए दबाब बढाना शुरू कर दिया है। अगस्त २०२२में जदयू ने राजद के साथ जो डील किया था उसमें दिसम्बर २२ या जनवरी २३ में तेजस्वी यादव को नेतृत्व सौंपना था लेकिन जदयू नेतृत्व द्वारा भ्रमित करने वाला बयान देकर राजद को डराया जाने लगा। भाजपा के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व द्वारा जदयू के लिए दरवाजा बंद होने की सार्वजनिक घोषणा की गई। फिर भी जदयू सुनियोजित ढंग से भाजपा से एकतरफा नजदीकी दिखाने का नाटक करता रहा। अब १४ महीने बाद राजद को समझ में आ गया कि भाजपा जदयू को अपने साथ नहीं जोडेगी तब उन्होंने तेजस्वी यादव को नेतृत्व देने के लिए दावा और दबाब बढा दिया। श्री सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद के दवाब में सफाई दी है कि तेजस्वी बच्चा है‚ यही सब कुछ है। उन्हें स्मरण होगा कि इसी बच्चे के पिता और परिवार द्वारा बिहार में अपराधियों‚ भ्रष्टाचारियों और माफिया का शासन स्थापित कर १९९० से २००५ तक राज्य में जंगलराज कायम किया था। श्री सिन्हा ने कहा कि महागठबंधन के तीसरा बडे दल कांग्रेस के अध्यक्ष ने भी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री स्वीकार करने की बात कही है।
राजद ने खुलेआम राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार वताया है। कांग्रेस राजद का नेतृत्व बिहार में स्वीकार कर रही है। अब नीतीश जी घबराहट में हैं। अपनी कुर्सी पर खतरा मंडराते देख तुरंत लालू की वंदना में लग गए। लालू भी इनके ५–७ विधायक को तोडने की फिराक में हैं। ऐसा होने पर नीतीश मुख्यमंत्री भी नहीं रह पाएंगे।
श्री सिन्हा ने कहा कि जदयू नेताओं को अब अपना भविष्य तलाशना होगा। कुछ वरीय जदयू नेताओं को लग रहा था कि नीतीश उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना सकते हैं लेकिन अब स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिहार को फिर से जंगलराजवालों को सोंपने की अपनी तैयारी पूरी कर ली है।







