भागलपुर का कृषि विश्वविद्यालय देश में नया प्रयोग कर रहा है. यहां लगातार कुछ नया लोगों को सिखाया जाता है. अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर से देशभर के वैज्ञानिक आईसीटी के गुर सीखेंगे और अपने राज्यों में जाकर अमल में लाएंगे. विषयों पर प्रशिक्षण लेंगे. यह जानकारी विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ राजेश कुमार ने दी. उन्होंने बताया कि इससे कृषि के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा. आईसीएआर पोषित काफ्ट यानि करियर एडवांसमेंट फैकल्टी ट्रेनिंग कार्यक्रम के अंतर्गत आइसीएआर से सम्बद्ध संस्थाएं जैसे केंद्रीय क़ृषि विश्वविद्यालय, राजकीय क़ृषि विश्वविद्यालय, क़ृषि विज्ञान केंद्र और भारतीय क़ृषि अनुसन्धान परिषद के अन्य इकइयों से वैज्ञानिक किसी खास विषयों पर बेहतर कार्य करने वाली संस्थाओं मे प्रशिक्षण के लिए आते है.
बीएयू के कुलपति डॉ.डीआर सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए बीएयू को काफ्ट ट्रेनिंग कार्यक्रम मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि ‘क़ृषि प्रसार के क्षेत्र मे हम आइसीटी के सबसे उन्नत मॉडल का प्रयोग करते है. देश के अन्य संस्थाओं के वैज्ञानिक आइसीटी के हमारे मॉडल से सीखकर अपनी संस्थाओं मे अमल मे लाएंगे. इस प्रशिक्षण का विषय है “कृषि विस्तार और अनुसंधान के लिए आईसीटी में नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग. यह बहुत ही शानदार पहल है.
सोशल मीडिया के हो रहे प्रयोग पर प्रशिक्षण
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आरके सोहाने ने कहा कि देश के अन्य राज्यों के वैज्ञानिक बिहार कृषि विश्वविद्यालय के आईसीटी के मॉडल जैसे सामुदायिक रेडियो स्टेशन, डिजिटल स्टोरी टेलिंग और कृषि प्रसार के लिए सोशल मीडिया के हो रहे प्रयोग पर प्रशिक्षण लेंगे. यह प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा आगामी 1 फरवरी से 24 फ़रवरी 2024 तक आयोजित किया जायेगा. जिसमें आगन्तुक वैज्ञानिक डिजिटल स्टोरी टेलिंग, फोटोग्राफी, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फ़िल्म प्रोडक्शन, स्क्रिप्ट राइटिंग, ई-मार्किट प्लेस और रेडियो प्रसारण इत्यादि शामिल है.







