मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने की मांग उठायी। शिक्षक दिवस पर मंगलवार को पटना विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस समय देश में सात विश्वविद्यालय थे‚ उस समय पटना विश्वविद्यालय उनमें से एक था।
उन्होंने कहा कि पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की हमारी मांग शुरू से है। पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में जब प्रधानमंत्री वर्ष २०१७ में आये थे‚ तो उनसे भी पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने का आग्रह हमने किया था‚ मगर उन्होंने स्वीकार नहीं किया। पटना विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए जो कुछ भी संभव होगा‚ हमलोग उसके लिए काम करते रहेंगे। देश का सातवां विश्वविद्यालय होने का गौरव पटना विश्वविद्यालय को प्राप्त है इसलिए इसको भी केंद्रीय स्तर की मान्यता दी जानी चाहिए। सीएम ने कहा कि राज्यपाल महोदय को चलकर देखना चाहिये कि पटना विश्वविद्यालय में कितना बेहतर काम किया गया है। हमारा उनसे आग्रह है कि पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिला‚ किन्तु हमारे प्रयास से इंजीनियरिंग कॉलेज को एनआईटी का दर्जा मिल गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी शिक्षकों से मैं आग्रह करता हूं कि छात्र–छात्राओं को अच्छे ढंग से पढायें। छात्र–छात्राएं भी बेहतर ढंग से पढाई करें। आपलोग पढने के साथ–साथ खेल–कूद में भी रुचि लें। आपस में सभी छात्र–छात्राएं प्रेम और भाईचारे के साथ रहें। हमने गंगा किनारे भी घूमने लायक बना दिया है। पढने लिखने के बाद गंगा किनारे भी घूमें। जब तक हम जीवित हैं हमारा लगाव पटना विश्वविद्यालय से बना रहेगा।
इससे पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने नव सौंदर्यीत व्हीलर सीनेट हॉल का शिलाप^ अनावरण कर लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में और मुख्यमंत्री ने पटना विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पत्रिका रिफ्लेक्शन का विमोचन किया। पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गिरीश कुमार चौधरी ने राज्यपाल राजेंद्र विवनाथ आर्लेकर एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अंग वस्त्र‚ पौधा‚ एवं पीएसएलवी का सांकेतिक स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।
राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने मंगलवार को शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में उनके अधिकार घटाये जाने पर नाराजगी व्यक्त की। आर्लेकर ने शिक्षक दिवस के अवसर पर यहां एक समारोह में इस आशय की टिप्पणी की जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद थे। राज्यपाल ने पूछा‚ ‘मुख्यमंत्री ने कुछ समय पहले मुझसे एक कुलपति को सेवा विस्तार देने पर विचार करने का अनुरोध किया था। मेरा भी मानना है कि वह इसके हकदार हैं‚ लेकिन अगर शिक्षा विभाग टकराव का रुख अपनाएगा तो चीजें कैसे सुचारू रूप से चल सकती हैं।’
यह टिप्पणी पिछले महीने एक कुलपति का वेतन रोकने के विभाग के आदेश पर राजभवन द्वारा कड़़ी आपत्ति जताने की पृष्ठभूमि में आई है। इन कुलपति के विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण किया गया था और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने इसे असंतोषजनक पाया था। राज्यपाल ने आईएएस अधिकारी और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक का नाम लिए बिना कहा‚ ‘शिक्षा विभाग के एक सचिव हमसे पूछते हैं कि आपकी ‘औकात’ क्या है। मुझे आश्चर्य है कि किसके कहने पर उनमें ऐसा करने का दुस्साहस आया।’ शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच का विवाद हाल के दिनों में काफी सुर्खियों में रहा था और मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात के बाद ही स्थिति संभली थी। आर्लेकर ने अपने भाषण में नीतीश के सौहार्दपूर्ण रवैये की सराहना करते हुए कहा‚ ‘मुख्यमंत्री और मेरे बीच कोई तनाव नहीं है। हम दोनों एक साथ बैठकर बात कर सकते हैं और सभी समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं।’ पटना विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने कहा‚ ‘यह चिंता का कारण नहीं है। अलग–अलग राय हो सकती हैं। लेकिन हमें समन्वय के लिए प्रयास करना चाहिए और संघर्ष से बचना चाहिए।’







