मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई है. इम्फाल पश्चिम जिले में भीड़ ने 15 घरों में आग लगा दी और जमकर उत्पात मचाया. हिंसा के दौरान एक 45 वर्षीय व्यक्ति को गोली मार दी गई. उसकी जांघ पर गोली लगी है. उसे तुरंत क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में भर्ती कराया गया है. फिलहाल, युवक की हालत से खतरे से बाहर है.
यह घटना शनिवार शाम लैंगोल खेल गांव में हुई है. सूचना मिलने पर सुरक्षाबल के जवान पहुंचे और भीड़ को हालात पर काबू पाने के लिए मोर्चा संभाला. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने कई राउंड आंसू गैस के गोले दागे. रविवार सुबह स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन प्रतिबंध जारी हैं.
मणिपुर में कुकी-मैतेई समुदाय के बीच हिंसा रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सेंट्रल फोर्स की 10 और कंपनियां तैनात करने का फैसला लिया है। CRPF की 5, BSF की 3, ITBP और SSB की एक-एक अतिरिक्त कंपनी तैनात करने का आदेश जारी किया गया।
सरकार ने यह फैसला 3 अगस्त को भीड़ की तरफ से सेना के हथियार लूटने के बाद लिया। इस दिन भीड़ ने मोइरंग और नारानसेना थाने पर हमला कर 685 हथियार और लगभग 20 हजार से ज्यादा कारतूस लूट लिए थे।
लूटे गए हथियारों में AK-47, इंसास राइफल्स, हैंड गन, मोर्टार, कार्बाइन, हैंडग्रेनेड और बम शामिल हैं। पुलिस कंट्रोल रूम ने शनिवार को बताया कि राज्य में सिर्फ घाटी के पुलिस स्टेशन से नहीं, बल्कि पहाड़ी जिलों से भी लूटे गए थे।
सुरक्षा बल इन हथियारों को रिकवर करने के लिए लगातार पहाड़ी और घाटी इलाकों में तलाशी कर रहे हैं। अब तक पहाड़ी जिलों से 138 हथियार और 121 गोला-बारूद बरामद हुए हैं। जबकि घाटी के जिलों से 1057 हथियार और 14,201 गोला-बारूद बरामद हुए हैं।
3 अगस्त की घटना के बाद क्या हुआ…
4 अगस्त : पुलिस ने सात अवैध बंकरों को नष्ट किया
हथियार लूटने की घटना के बाद पुलिस और सुरक्षाबल एक्शन में दिखे। 4 अगस्त को कौट्रुक हिल रेंज में पुलिस ने ऑपरेशन चलाकर सात अवैध बंकरों को नष्ट कर दिया। ये बंकर किस समुदाय के हैं। इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई।
5 अगस्त : झड़प में तीन लोगों की मौत हुई
पांच अगस्त को पुलिस और भीड़ के बीच टेराखोंगसांगबी कांगवे और थोरबुंग में हिंसक झड़प हुई। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। यह इलाका कुकी-मैतेई के बीच का बॉर्डर है, जो बफर जोन कहलाता है।
मृतकों की पहचान युमनम जितेन मैतेई (46), युमनम पिशाक मैतेई (67) और युमनम प्रेमकुमार मैतेई (39) के रूप में की गई है, जो सभी क्वाक्टा लामल्हाई के रहने वाले हैं। हमलावर बफर जोन क्रॉस करने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षाबलों ने जब रोका तो इनके बीच झड़प हो गई। इस दौरान फायरिंग भी की गई। सुरक्षाबलों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।
मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।
नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इम्फाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।
सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।
निर्वस्त्र घुमाया, गैंगरेप किया: पीड़िता की मां बोलीं- CM का फोन तक नहीं आया
‘मेरे पति को मार दिया। बेटे को मार दिया। बेटी के कपड़े उतारकर घुमाया, उसे पीटा और गैंगरेप किया। आज तक न तो CM, न ही किसी मंत्री का फोन आया।’ ये कहते हुए मणिपुर में निर्वस्त्र घुमाई गई पीड़िता की मां जोर-जोर से रोने लगती हैं। करीब आधे घंटे तक लगातार रोती जाती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
‘वो हमारे कपड़े उतरवा रहे थे, पुलिस चुपचाप खड़ी थी’:वायरल वीडियो की FIR लिखने वाले SHO बोले- हां, गैंगरेप हुआ
‘हम पुलिस की गाड़ी में थे। लगा था, वो हमें बचा लेंगे। मैतेई लड़कों की भीड़ ने गाड़ी को घेर लिया। हमें उतारकर इधर-उधर छूने लगे। उन्होंने कहा- जिंदा रहना है, तो कपड़े उतारो। हमने मदद के लिए पुलिसवालों की तरफ देखा, उन्होंने मुंह फेर लिया। फिर हमने कपड़े उतार दिए….’। ये कहना है मणिपुर में निर्वस्त्र की गई 21 साल की पीड़ित का।
मणिपुर में हिंसा शुरू हुए ढाई महीने से ज्यादा हो चुके हैं। जल चुके 120 से ज्यादा गांव, 3,500 घर, 220 चर्च और 15 मंदिर हिंसा की निशानी के तौर पर खड़े हैं। इस तबाही में खाली स्कूल और खेत भी जुड़ चुके हैं। अब स्कूलों के खुलने का वक्त है और खेतों में बुआई का।







