महाराष्ट्र की सियासत का आज बेहद अहम दिन रहा . अजित पवार गुट की मीटिंग में एक बड़ा फैसला लिया गया है. इसमें शरद पवार की जगह अजित पवार को NCP का अध्यक्ष बनाने का फैसला हुआ है. बताया गया है कि कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने आज राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक बुलाई थी. इसमें प्रस्ताव पास किया गया है कि पार्टी लोगों के कल्याण के उद्देश्य से दूर जा रही है, ऐसे में शरद पवार की जगह अजित पवार को अध्यक्ष चुना जाता है. चुनाव आयोग में भी अजित गुट ने अर्जी दायर की है. इसमें कहा गया है कि 30 जून को मुंबई में हुई कार्यकारिणी की बैठक में अजित पवार को NCP का अध्यक्ष चुना गया है.
मुंबई में आज अजित पवार और शरद पवार द्वारा अहम बैठक बुलाई गयी थी। एक तरफ जहां अजित पवार ने शरद पवार पर जमकर निशाना साधा। उनकी उम्र से लेकर राजनीतिक महत्वाकांक्षा और रिटायरमेंट तक की बात की। वहीं समर्थन में जुटे सभी 32 विधायकों को मुंबई के ताज होटल में ले जाकर एक साथ सुरक्षित रखवा दिया है। दूसरी तरफ अजित पवार के चाचा शरद पवार ने भी वाईबी चव्हाण सेंटर से वहां मौजूद तमाम समर्थकों को संबोधित किया। शरद पवार ने कहा महाराष्ट्र में फ़िलहाल जो कुछ भी हो रहा है। उसे पूरा देश देख रहा है। शरद पवार ने कहा कि आज की बैठक एक प्रकार से ऐतिहासिक बैठक है। जिसकी पूरे देश में चर्चा है। 23 साल पहले अस्तित्व में आई एनसीपी राज्य के कोने कोने तक पहुंची है। हमने नए नेता तैयार किये, मन में यही ध्यान था कि महाराष्ट्र की हालत कैसे सूधरे और राज्य का विकास हो। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में दो-फाड़ के कुछ दिन बाद अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुट ने बुधवार को पार्टी और पार्टी के घड़ी चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा-एकनाथ शिंदे सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार ने पोल पैनल से संपर्क किया है।
‘अजित पवार खोटा सिक्का निकला’
शरद पवार ने भतीजे अजित पवार पर बरसते हुए कहा कि एनसीपी का चुनाव चिह्न हमारे साथ है, इसे नहीं जाने दूंगा। लोग और पार्टी कार्यकर्ता हमारे साथ है जो हमें सत्ता तक लेकर आए। मेरी तस्वीर क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं। अजित पवार खोटा सिक्का निकला। कुछ लोग देवता कहते हैं, कुछ कहते हैं कि अन्याय किया।
एनसीपी भ्रष्ट है तो सरकार में क्यों शामिल किया’
शरद पवार ने बीजेपी को घेरा। शरद पवार ने कहा कि ‘पीएम ने भोपाल में कहा था- एनसीपी ने भ्रष्टाचार किया है। देश चलाना पवार साहब से सीखा है। अगर एनसीपी के नेता भ्रष्ट हैं तो उन्हें सरकार में क्यों शामिल किया। मैंने देश के कई प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। विरोधी विचारधारा के साथ जाना ठीक नहीं।’
बातचीत करके हल निकालना चाहिए-शरद पवार
किसी चीज से सहमत नहीं है तो बातचीत करके हल निकालना चाहिए। कार्यकर्ताओं की बदौलत एनसीपी यहां तक पहुंची। आज की बैठक ऐतिहासिक है। आज देश हमें देख रहा है। हमारी पार्टी ने नए नेता दिए। अगर सहमत नहीं तो बातचीत से हल निकाले। गलती को सुधारना हमारा काम है। मैं लोगों के बीच हूं, सत्ता में नहीं। अगर गलत किया है तो सजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
अजित पवार का चाचा शरद पवार के खिलाफ मोर्चा
अजित पवार ने चाचा शरद पवार के खिलाफ आज पूरी तरह मोर्चा खोल दिया। उन्होंने दिल का गुबार निकालते हुए कहा कि ऐसा वक्त किसी के घर में नहीं आना चाहिए। मैं किसी के पेट से जन्म नहीं लिया तो मेरी क्या गलती। आप 83 साल के हो गए हैं कही रुकेंगे कि नहीं। कहीं गलती हो तो आप बताइए। आप रैली करेंगे तो मैं भी करूंगा।
अजित पवार का शरद पवार पर तंज
शरद पवार पर तंज कसते हुए अजित पवार ने कहा कि सरकारी नौकरी हो या पॉलिटिक्स रिटायरमेंट की एक उम्र होती है। आपको भी मार्गदर्शन करना चाहिए और आशीर्वाद देना चाहिए। अजित पवार ने कहा कि हमारे वरिष्ठ ने कहा कि साल 2024 में नरेंद्र मोदी ही सत्ता में आएंगे। जब देश मे मोदी के सिवाय कोई विकल्प नहीं है तो उन्हें समर्थन देने में क्या दिक्कत है।
सबसे ज्यादा अपमान अजित पवार का हुआ
एनसीपी नेता और मंत्री पद शपथ लेने वाले धनंजय मुंडे ने कहा कि अजित पवार ने मुंबई के बांद्रा इलाके के एमईटी ग्राउंड में बैठक बुलाई है। इस दौरान मंच से बोलते हुए धनंजय मुंडे ने कहा कि अजित पवार का अब तक का सबसे ज्यादा अपमान हुआ है। अजित दादा की अब तक काफी आलोचना हो चुकी है। लेकिन उन्होंने यह अपमान अपमान सहा है। उन्होंने अपनी परछाई को भी उस अपमान का एहसास नहीं होने दिया। धनंजय मुंडे ने ये भी कहा कि उन्होंने शरद पवार साहेब के लिए सब कुछ सहा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में दो-फाड़ के कुछ दिन बाद अजीत पवार के नेतृत्व वाले गुट ने बुधवार को पार्टी और पार्टी के घड़ी चुनाव चिह्न पर दावा करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा-एकनाथ शिंदे सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार ने पोल पैनल से संपर्क किया है।
सूत्र ने कहा कि चुनाव आयोग को 30 जून को अजित पवार द्वारा प्रतीक आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत एक याचिका प्राप्त हुई है। इसके बाद 30 जून को ही सांसदों/विधायकों/एमएलसी के 40 से ज्यादा हलफनामे (5 जुलाई को) आयोग में प्राप्त हुए। एक प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ है जिस पर कोई तारीख नहीं है। इसमें सर्वसम्मति से अजित पवार को राकांपा का अध्यक्ष चुना गया है। सूत्र ने कहा कि आयोग को महाराष्ट्र राज्य राकांपा के अध्यक्ष जयंत आर. पाटिल से कैविएट दाखिल करने वाला 3 जुलाई का एक ईमेल भी प्राप्त हुआ है। पाटिल एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खेमे से हैं। सूत्र ने कहा कि आयोग को पाटिल का 3 जुलाई का एक पत्र भी मिला है जिसमें बताया गया है कि महाराष्ट्र विधानसभा के नौ सदस्यों की अयोग्यता के लिए अयोग्यता कार्यवाही सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दायर की गई है।
सूत्र ने कहा कि आयोग द्वारा मौजूदा कानूनी ढांचे के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद अजित पवार ने आठ विधायकों के साथ पार्टी तोड़ दी है। शरद पवार और अजित पवार खेमे राज्य में अपनी ताकत दिखाने के लिए बुधवार को अलग-अलग बैठकें कर रहे हैं।
हालाँकि सरकारों को गिराने का सिलसिला हमारे यहाँ पुराना है। बहाने और कारण भी बड़े छिछले। किसी एक बलशाली के खिलाफ मिलकर खड़ा होने का 1977 का उदाहरण भारतीय राजनीति में अनोखा था। जय प्रकाश नारायण का यह प्रयोग सफल भी हुआ और जब वे वेंटिलेटर पर साँसें गिन रहे थे, तभी इस प्रयोग ने भी दम तोड़ दिया। अगर चौधरी चरण सिंह, मोरारजी की बात मान लेते, अगर मधु लिमये संघ की दोहरी सदस्यता का बखेड़ा खड़ा नहीं करते तो जेपी का यह सपना आधे रास्ते धराशायी नहीं होता।
चौधरी चरण सिंह को बिना शर्त समर्थन देने वाली कांग्रेस बहुमत साबित करने के दिन उन्हें अगर शर्तों का पुलिंदा नहीं थमाती, तो वो सरकार भी नहीं गिरती। प्रधानमंत्री पद के सिवाय कभी कोई पद न लेने की क़सम खाने वाले चंद्रशेखर के साथ भी यही हुआ। राजीव गांधी के घर के सामने हरियाणा पुलिस के दो सिपाही क्या नज़र आ गए, चंद्रशेखर की सरकार गिरा दी गई।
कुल मिलाकर आज का राजनीतिक माहौल डर और धौंस- पट्टी पर टिका हुआ है। नेताओं ने अपने लफ़्ज़ों को तलवारें थमा दी हैं और हम सोए हुए हैं वर्षों से। अब घनघोर बारिश भी हमें जगाती नहीं है, छत की चादरें बजाकर। क्योंकि छतें अब सीमेंट की हैं। न उनके कान हैं, न नाक। यह तो साफ़ है कि सत्ता के मंदिर के गर्भगृहों में अब चाँदी के छत्र हैं। सोने के दीपक हैं। हीरों से जड़ी झालरें भी हैं, लेकिन भगवान नहीं हैं। हमें इस सोने, इस चाँदी और इन हीरों के दर्शन से ज़्यादा संतुष्टि मिलने लगी है। यह तंद्रा खुलनी चाहिए। यह निद्रा ख़त्म होनी चाहिए।
क्या है विधायकों का गणित?
विधानपरिषद में एनसीपी के 9 विधायक हैं। शरद पवार के साथ 5 एमएलसी हैं। वहीं अजित के साथ 4 एमएलसी विधायक हैं। बता दें महाराष्ट्र में एनसीपी के 53 विधायक हैं। ऐसे में पार्टी तोड़ने के लिए और नए गुट बनाने के लिए करीब 36 विधायक चाहिए लेकिन मौजूदा स्थिति में एक सीट उपचुनाव में है। हारे और एक विधायक नवाब मलिक जेल में हैं यानीकि अब विधायको की संख्या 52 हो गई है।
शरद पवार के साथ कितने सांसद
एनसीपी के अगर सांसदों की बात करें तो महाराष्ट्र में 4 सांसद हैं। जिसमें शरद पवार के साथ सुप्रिया सुले (बारामती, पुणे), श्रीनिवास पाटिल (सातारा), अमोल कोल्हे (शिरूर, पुणे), लक्षद्वीप से सांसद मोहम्मद फैजल हैं। वहीं लोकसभा के कुल 4 सांसद पवार के साथ हैं।
अजित पवार के खेमे में कितने सांसद
अजित पवार के खेमे में सुनील तटकरे (रायगढ़) एकमात्र सांसद हैं। अगर राज्यसभा सदस्यों की बात करें तो 4 सांसद हैं। शरद पवार, वंदना चव्हाण, फौजिया खान, प्रफ्फुल पटेल। इन सदस्यों में प्रफ्फुल पटेल अजित पवार के साथ हैं, बाकी सांसद शरद पवार के साथ हैं।
महाराष्ट्र में किस पार्टी के पास कितने विधायक?
बीजेपी- 105
बीजेपी समर्थक विधायक- 10
शिवसेना शिंदे- 40
निर्दलीय समर्थक- 10
शिवसेना ऊद्धव- 16
कांग्रेस- 45
एनसीपी- 52
अभी एनडीए की कुल सीटें 202 तक पहुंची हैं। वहीं महाविकास आघाडी 81 तक हैं। एनसीपी पर अजित पवार का दावा है कि उनके पास 40 विधायकों का समर्थन है तो वहीं शरद पवार के साथ 12 विधायक हैं।







