युनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के २०२२ के नतीजों में लड़़कियों ने कमाल कर दिया। पहले चारों स्थान फतेह किये। पहले स्थान पर इशिता किशोर व दूसरे स्थान पर गरिमा लोहिया आइ। दोनों दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। तीसरे व चौथे स्थान पर उमा हरती व स्मृति मिश्रा रहीं। उमा आईआईटी‚ हैदराबाद से बीटेक हैं‚ स्मृति ड़ीयू से स्नातक हैं। बीते साल भी पहले तीन स्थानों पर लड़़कियां ही थीं। ९३३ उम्मीदवारों ने इस वर्ष यह परीक्षा उत्तीर्ण की। इनमें ३२० लड़़कियां हैं। कमीशन के अनुसार‚ शीर्ष १० में ६ व २५ में १४ लड़़कियां रहीं। बीते तेरह सालों में आठवीं बार लड़़कियों ने शीर्ष स्थान पाया है। छह सालों से लगातार लड़़कियों की भागीदारी यूपीएससी में बढती जा रही है। इस दफा ग्यारहवां स्थान पाने वाली प्रसन्नजीत कौर ने बिना किसी कोचिंग के खुद पढाई की और सारी तैयारी इंटरनेट से की। वह जम्मू यूनिवर्सिटी से परास्नातक हैं। लड़़कियों ने पढाई के महत्व को तो समझ ही लिया है। वे अब सामान्य व सुविधाजनक नौकरियों की बजाय अपने सपनों का काम चुन रही हैं। इसके लिए जबरदस्त मेहनत कर रही हैं और अर्जुन की तरह सिर्फ लक्ष्य तय कर रही हैं। कुछ टॉपर्स का यह तीसरा या चौथा प्रयास था जिन्होंने हताश होने की बजाय अपनी लगन को मजबूती प्रदान की। इनमें से कई ने बताया भी उन्हें अहसास था कि इस बार वे सफल जरूर होंगी। पर शीर्ष सूची में शामिल होने का अंदाजा ना था। बीस में से सोलह टॉपर अकेले उत्तर भारत से हैं जहां ना तो पढने की विशेष सुविधाएं हैं‚ ना ही माहौल बहुत सकारात्मक है। इसके बावजूद देश के सर्वाधिक सम्मानित सरकारी ओहदे तक पहुंचने का सपना साकार करने वालों ने अथक प्रयासों से साबित कर दिया कि जहां चाह‚ वहां राह। खासकर अपने यहां लड़़कियों ने बड़़ी लाइन ही नहीं खींची‚ बल्कि पिछली पीढी के संघर्षों से सीख भी ली। वे सिर्फ कॅरियर ही नहीं बना रहीं। समाज के लिए कुछ करने का जज्बा भी रखती हैं। शीर्ष में जगह बनाने वाली लड़़कियों का अपना–अपना संघर्ष है। अमूमन ये आम परिवारों से हैं जिनके साथ परिवार का सहयोगात्मक रवैया रहा। कुछ ही समय पहले तक मध्यवर्गीय परिवार अपनी बच्ची के नौकरी करने के पक्ष में नहीं होते थे। निश्चित तौर पर ये नई अधिकारी समाज को नई दिशा देने में सक्षम होंगी। लड़़कियों की सफलता हर दफा समाज में स्त्री के स्तर को संवारने का काम करती है। साबित करती है‚ स्त्री दोयम नहीं है‚ वह चाहे तो शीर्ष उसका है।
फिर कैसे बरी हो गए बृजभूषण शरण सिंह?
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी...







