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राजनीति बिहार के अफसरों को भाती और सुहाती है………

UB India News by UB India News
February 14, 2023
in पटना, बिहार
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राजनीति बिहार के अफसरों को भाती और सुहाती है………
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राजनीति बिहार के अफसरों को भाती और सुहाती है। अतीत से अब तक राजनीति में ऐसे कई नाम मिल जाएंगे, जिनके करियर की शुरुआत अफसरशाही से हुई, लेकिन आखिर में उन्होंने राजनीति का रास्ता अपनाया। पुरानी बातें छोड़ भी दें तो इसका ताजा मामला पुलिस सेवा के चर्चित अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय का रहा। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के ठीक पहले उन्होंने दोबारा वीआरएस चुनाव लड़ने के लिए ही लिया। माना जा रहा था कि वे जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उन्हें जेडीयू ने टिकट नहीं दिया और वे चुनाव लड़ने से वंचित हो गये। फिलवक्त वह अध्यात्म की दुनिया में गोते लगा रहे हैं। आईजी विकास वैभव और डीजी शोभा अहोतकर में शुरू हुए टकराव को भी वैभव के राजनीति में पदार्पण की आरंभिक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

आरसीपी सिंह ने भी आईएएस की नौकरी छोड़ी थी
मूल रूप से बिहार के रहने वाले आरसीपी के नाम से मशहूर राम चंद्र प्रसाद सिंह भी आईएएस रहे हैं। वे यूपी कैडर के आईएएस हैं। वे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उच्च पदों पर रहे। नीतीश कुमार के स्वजातीय और उनके ही जिले का निवासी होने के कारण उन्हें बिहार में प्रमुख सचिव बना कर लाया गया। उसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। नीतीश ने उन्हें जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया और 2010 में उन्हें राज्यसभा भेजा। पार्टी में उनके अचानक पावरफुल नेता बन कर उभरने से दूसरे नेता थोड़ा असहज थे, लेकिन सभी इसलिए खामोश थे कि उन्हें नीतीश कुमार लेकर आए थे। वे दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। मोदी मंत्रिमंडल के वे डेटीयू कोटे से सदस्य भी रहे। बाद में नीतीश से अनबन के कारण वे जेडीयू से अलग हो गये। तीसरी बार जेडीयू ने उन्हें राज्यसभा जाने का मौका नहीं दिया और जेडीयू के अध्यक्ष पद से भी हटा दिया। बाद में उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया गया था।

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यशवंत सिन्हा ने भी चुनी थी राजनीति की राह
पटना में जन्मे यशवंत सिन्हा 1960 में आईएएस बने। 1984 तक वे अफसर के रूप में काम करते रहे। 1990-91 में जनता दल के सदस्य के रूप में वे प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में फाइनेंस मिनिस्टर रहे। बाद में वे बीजेपी का हिस्सा बने। अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में भी सिन्हा वित्त मंत्री के साथ विदेश मामलों के मंत्री रहे। साल 2018 में यशवंत सिन्हा ने पार्टी नेतृत्व से मतभेदों के कारण बीजेपी छोड़ दी। यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा, लेकिन कामयाब नहीं हो पाये।

मीरा कुमार ने विदेश सेवा की नौकरी छोड़ी थी
देश की चर्चित महिला नेता मीरा कुमार भी विदेश सेवा की नौकरी छोड़ राजनीति में आयी थीं। बिहार के आरा में जन्म लेने वाली मीरा कुमार 2009 से 2014 तक लोकसभा की स्पीकर रहीं। स्पीकर बनने वाली वह देश की पहली महिला थीं। मीरा कुमार का पारिवारिक माहौल भी राजनीतिक था। उनके पिता जगजीवन राम ने भारत के चौथे उप प्रधानमंत्री के रूप में काम किया। मीरा कुमार 1973 में भारतीय विदेश सेवा की नौकरी में आयीं। लंबे समय तक वे नौकरी में रहीं। राजनीति में आने पर उन्होंने बिजनौर से उप चुनाव लड़ा। राम विलास पासवान और मायावती को हराकर पहली बार वह 1985 में संसदीय राजनीति में आईं। 2004 में उन्हें यूपीए सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री बनाया गया। कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में मीरा कुमार ने 2017 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन रामनाथ कोविंद से हार गईं।

राज कुमार सिंह ने गृह सचिव की नौकरी छोड़ी
आरा के सांसद राज कुमार सिंह भी आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आये हैं। सिंह 1975 बैच के बिहार कैडर के आईएएस हैं। उहोंने केंद्रीय गृह सचिव के रूप में भी कार्य किया। समस्तीपुर के वे डीएम भी रहे। बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी को 1990 में उन्होंने उनकी रथ यात्रा के दौरान गिरफ्तार किया था। उन्होंने साल 2013 में बीजेपी ज्वाइन किया। आरा से सांसद का चुनाव लड़े और विजयी हुए।

कई और सरकारी अफसर भी बने पॉलिटिशियन
बिहार मूल के सरकारी मुलाजिम और भी हैं, जिन्होंने आखिर में राजनीति की राह पकड़ ली। ऐसे लोगों में मीरा कुमार, यशवंत सिन्हा, गुप्तेश्वर पांडेय, आरसीपी सिंह, आरके सिंह के अलावा ललित विजय सिंह, गोरेलाल यादव, डीपी ओझा, सुधीर कुमार, सर्वेश कुमार (बेगूसराय से अभी एमएलसी), डीजी के पद से रिटायर सुनील कुमार (फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री), अरुण कुमार, मुनिलाल हैं। राजनीति में आने वाले अफसर सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हैं। आमतौर पर सरकारी मुलाजिम वीआरएस लेकर राजनीति में आते हैं। झारखंड में भी यही स्थिति है। झारखंड के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, बीडी राम जैसे नेता प्रशासनिक और पुलिस सेवा की नौकरी के बाद राजनीति में आए हैं।

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